Iran-US Tensions: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जुबानी जंग ने एक बार फिर वैश्विक कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है। इस बार विवाद का केंद्र अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह सनसनीखेज दावा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान अपना संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार हो गया है। ईरान ने इन दावों को न केवल सिरे से खारिज कर दिया है, बल्कि ट्रंप के बयानों का खुलकर मजाक भी उड़ाया है। ईरान के अनुसार, ट्रंप की बातें वास्तविकता से कोसों दूर हैं और वे केवल अपनी राजनीतिक छवि चमकाने के लिए काल्पनिक दावे कर रहे हैं।
ईरानी मीडिया का कड़ा प्रहार: “हवा में महल बना रहे हैं ट्रंप”
ईरान के आधिकारिक सरकारी ब्रॉडकास्टर ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग’ (IRIB) ने ट्रंप के दावों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। IRIB ने ट्रंप की बयानबाजी को “हवा में महल बनाना” करार देते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जिसका हकीकत से कोई वास्ता नहीं है। ईरानी मीडिया ने एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें ट्रंप को यह कहते सुना जा सकता है कि दोनों देश एक ऐतिहासिक समझौते के बेहद करीब हैं। IRIB ने इस वीडियो के साथ तंज कसते हुए कहा कि ट्रंप केवल उन सपनों को बेच रहे हैं जो कभी हकीकत में नहीं बदल सकते।
यूरेनियम भंडार और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप का तर्क
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में वाशिंगटन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दावा किया था कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने की शर्त पर अपना पूरा एनरिच्ड यूरेनियम भंडार अमेरिका के हवाले कर सकता है। ट्रंप ने इस संभावित समझौते को अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत बताते हुए कहा था कि इससे अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में “मुफ्त पहुंच” और नियंत्रण की स्थिति प्राप्त हो सकती है। ट्रंप के अनुसार, यह कदम क्षेत्र में वर्षों से चले आ रहे तनाव को हमेशा के लिए खत्म कर देगा, लेकिन ईरान ने इसे पूरी तरह से ‘कोरी कल्पना’ करार दिया है।
फारसी कहावतों के जरिए तंज: “मुंगेरी लाल के हसीन सपने”
ईरानी मीडिया ने ट्रंप की रणनीति पर तंज कसने के लिए एक प्रसिद्ध फारसी कहावत का सहारा लिया, जिसका भावार्थ है कि “कुछ लोग ऐसे असंभव सपने देखते हैं जो कभी पूरे नहीं हो सकते।” ईरानी विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की बयानबाजी केवल मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की एक कोशिश है। तेहरान का मानना है कि अमेरिका एक तरफ प्रतिबंध लगा रहा है और दूसरी तरफ दुनिया को गुमराह करने के लिए झूठे समझौते की खबरें फैला रहा है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी परमाणु संपदा उसकी राष्ट्रीय संप्रभुता का हिस्सा है और इसे किसी भी देश को सौंपने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
ईरानी संसद के स्पीकर का बयान: परमाणु सामग्री सौंपने पर कोई चर्चा नहीं
मामले की गंभीरता को देखते हुए ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ के करीबी सूत्रों ने स्थिति स्पष्ट की है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका के साथ चल रही अनौपचारिक बातचीत में ‘परमाणु सामग्री सौंपने’ जैसा कोई मुद्दा कभी एजेंडे में शामिल ही नहीं रहा। एक अन्य वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने ट्रंप के दावों को “सफेद झूठ” बताते हुए कहा कि बातचीत में कोई बड़ी प्रगति नहीं हुई है और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिरोध पहले की तरह ही बना हुआ है। ईरान का रुख साफ है कि जब तक प्रतिबंध पूरी तरह नहीं हटाए जाते, तब तक किसी भी बड़े समझौते की उम्मीद करना व्यर्थ है।
ट्रंप की जिद: “जल्द होगी शांति समझौते की घोषणा”
ईरान के सख्त रुख के बावजूद, डोनाल्ड ट्रंप अपने दावों पर अडिग नजर आ रहे हैं। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि बातचीत सकारात्मक दिशा में है और ईरान के पास समझौता करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। ट्रंप के अनुसार, ईरान की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है और वे यूरेनियम भंडार पर समझौता करने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगले कुछ दिनों में इस संबंध में कोई बड़ी आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वास्तव में पर्दे के पीछे कोई गुप्त समझौता हुआ है या यह केवल ट्रंप का एक चुनावी और कूटनीतिक पैंतरा है।









