Trump Iran Peace Deal: वैश्विक राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान एक ऐतिहासिक ‘मेगा डील’ के बेहद करीब हैं। एयर फोर्स वन में मीडिया से चर्चा के दौरान ट्रंप ने संकेत दिए कि ईरान के साथ चल रही बातचीत अब तक के सबसे सकारात्मक मोड़ पर है। इस पूरी कूटनीति में सबसे चौंकाने वाला पहलू पाकिस्तान की भूमिका है, जो इस समझौते के लिए एक मध्यस्थ या अप्रत्यक्ष चैनल के रूप में कार्य कर रहा है।
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सद्भावना के तौर पर ईरान का बड़ा कदम
ट्रंप के अनुसार, ईरान ने बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अपनी गंभीरता का प्रदर्शन किया है। सम्मान के प्रतीक (Tribute) के रूप में, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से 20 तेल टैंकरों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे एक सकारात्मक संकेत बताया और कहा कि सोमवार सुबह से इन जहाजों की रवानगी शुरू हो जाएगी। ट्रंप का मानना है कि अमेरिका की सख्त नीतियों के कारण ही ईरान अब झुकने और समझौते की मेज पर आने के लिए मजबूर हुआ है।
अमेरिका का 15-सूत्रीय ‘पीस प्लान’

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के सामने 15 शर्तों वाला एक विस्तृत प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव पर सीधी बैठकों के साथ-साथ पाकिस्तान के माध्यम से अप्रत्यक्ष (Indirect) संवाद भी किया जा रहा है। ट्रंप का दावा है कि ईरान इस 15-पॉइंट प्लान की अधिकांश शर्तों को स्वीकार करने की दिशा में बढ़ रहा है। पाकिस्तान के जरिए हो रही इस गुपचुप बातचीत ने दक्षिण एशिया और मिडिल ईस्ट के समीकरणों को नई चर्चा में ला दिया है।
अमेरिका का 15-पॉइंट प्लान
मनीकंट्रोल और द गार्जियन की रिपोर्ट्स के अनुसार, इस योजना की मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं:
- न्यूक्लियर प्रोग्राम पर रोक – ईरान को अपना न्यूक्लियर कार्यक्रम पूरी तरह बंद करना होगा। इसमें यूरेनियम संवर्धन रोकना, पुराने स्टॉक सौंपना और नतांज व इस्फहान जैसे मुख्य केंद्रों को बंद करना शामिल है।
- क्षेत्रीय हस्तक्षेप बंद करना – ईरान को मिडिल ईस्ट में हिजबुल्लाह और हूतियों जैसे गुटों को हथियार और वित्तीय सहायता देना बंद करना होगा।
- समुद्री मार्ग और युद्धविराम – ग्लोबल शिपिंग के लिए होर्मुज जलमार्ग खुला रहना चाहिए और बातचीत की सुविधा के लिए एक महीने का सीजफायर लागू करना होगा।
ईरान को मिलने वाले लाभ
अगर ईरान इन शर्तों को स्वीकार करता है, तो अमेरिका उस पर लगे कड़े प्रतिबंध हटाने पर सहमत होगा। इसके अलावा, ईरान को सीमित निगरानी के तहत सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम चलाने की अनुमति मिलेगी और “स्नैपबैक” सैंक्शन के डर से राहत मिलेगी।
पुराने समझौते पर ट्रंप की आलोचना
ट्रंप ने 2015 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए ईरान न्यूक्लियर डील (JCPOA) की भी आलोचना की। उन्होंने इसे “सबसे खराब और बेवकूफी भरा समझौता” बताया। उनका कहना है कि यदि उन्होंने इसे रद्द नहीं किया होता, तो आज ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार होते। ट्रंप ने यह भी कहा कि उनकी सख्ती और नीतियों के कारण ही ईरान अब वार्ता की मेज पर आया है।









