Trump Iran Ultimatum : ट्रंप ने ईरान को 60 दिन का अल्टीमेटम दिया, होर्मुज में टोल की धमकी

ट्रंप ने ईरान को 60 दिन का अल्टीमेटम देकर दुनिया का ध्यान मध्य पूर्व की ओर मोड़ दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित टोल और बढ़ते तनाव के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या यह केवल कूटनीतिक दबाव है या आने वाले दिनों में वैश्विक तेल बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर बड़ा असर देखने को मिलेगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 21, 2026

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Trump Iran Ultimatum : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनावपूर्ण संबंधों के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर एक कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के साथ 60 दिनों के अंतरिम सीजफायर के दौरान इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरने वाले किसी भी जहाज से कोई टोल नहीं वसूला जाएगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि यह शांति वार्ता विफल रहती है, तो अमेरिका इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर स्वयं अपना टोल शुल्क लगा सकता है। यह बयान वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक स्थिति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का ऐलान और ‘गार्जियन एंजेल’ की भूमिका

शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ट्रंप ने अपनी रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि स्विट्जरलैंड में रविवार से शुरू होने वाली वार्ता 60 दिनों के भीतर किसी ठोस समाधान पर नहीं पहुंचती है, तो अमेरिका कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा। उन्होंने कहा, “60 दिनों के सीजफायर और उसके बाद भी तब तक कोई टोल नहीं लगेगा, जब तक कि वह अमेरिका द्वारा निर्धारित न हो।” ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो मध्य-पूर्व के देशों के ‘गार्जियन एंजेल’ (रक्षक) के रूप में दी गई सेवाओं की पिछली और भविष्य की लागत वसूलने के लिए अमेरिका निश्चित रूप से टोल लगाएगा।

ईरान का दावा और अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कड़ा खंडन

एक तरफ जहां ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने दावा किया है कि अमेरिका द्वारा युद्ध समाप्त करने में विफल रहने और प्रतिबद्धताओं के उल्लंघन के चलते होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया गया है, वहीं अमेरिका ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने स्पष्ट किया कि ईरान का इस स्ट्रेट पर कोई नियंत्रण नहीं है। उन्होंने बताया कि जलमार्ग पर यातायात पूरी तरह सामान्य है और शनिवार को ही 55 व्यापारिक जहाजों ने 17 मिलियन बैरल से अधिक तेल के साथ सुरक्षित आवाजाही की है। अमेरिकी सेना स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है।

स्विट्जरलैंड में निर्णायक वार्ता और वैश्विक कूटनीति का दौर

तनाव के बीच एक सकारात्मक संकेत यह है कि ईरान की वार्ता टीम स्विट्जरलैंड रवाना हो चुकी है। इस टीम में संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची, तेल अधिकारी और सेंट्रल बैंक के प्रतिनिधि शामिल हैं। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में रविवार से तकनीकी स्तर की वार्ता शुरू हो रही है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पुष्टि की है कि व्हाइट हाउस के वार्ताकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ पहले ही स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं, जो परमाणु कार्यक्रम के तकनीकी ब्योरे पर चर्चा कर रहे हैं।

वैश्विक तेल बाजार पर होर्मुज स्ट्रेट की रणनीतिक अहमियत

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘चोकपॉइंट’ है, जहां से रोजाना वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। इस जलमार्ग पर किसी भी प्रकार की अनिश्चितता या टोल संबंधी विवाद का सीधा असर दुनिया भर में तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। इसी कारण, ईरान-अमेरिका के बीच की यह बातचीत न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब स्विट्जरलैंड में होने वाली इस वार्ता के नतीजों पर टिकी हैं।

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