Iran-US War 2026 : ट्रंप ने ‘शांति’ के लिए रोका हमला, लेकिन ईरान ने बातचीत के दावों को नकारा

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह कहकर दुनिया को चौंका दिया कि उन्होंने ईरान पर होने वाले हमले को अंतिम क्षणों में रोक दिया है। उन्होंने बातचीत का रास्ता खोलने का दावा किया, लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया कि "धमकी और संवाद साथ नहीं चल सकते।" क्या यह शांति की शुरुआत है या भयंकर तूफान से पहले की शांति?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 23, 2026

Iran-US War 2026: अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष के 24वें दिन एक नाटकीय मोड़ सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि उन्होंने अपने युद्ध विभाग को अगले 5 दिनों तक ईरान पर किसी भी तरह का हमला न करने का निर्देश दिया है। ट्रंप का यह बयान उनके पिछले आक्रामक रुख से बिल्कुल अलग है। राष्ट्रपति ने दावा किया कि पिछले दो दिनों में तेहरान के साथ पर्दे के पीछे सकारात्मक बातचीत हुई है, जिसके चलते उन्होंने कूटनीति को एक मौका देने के लिए सैन्य अभियानों को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है।

ईरान का पलटवार: ट्रंप के बातचीत के दावों को बताया ‘झूठ’

एक तरफ जहाँ डोनाल्ड ट्रंप शांति और वार्ता की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान ने उनके इन दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने साफ तौर पर कहा है कि उनकी ट्रंप प्रशासन के साथ किसी भी तरह की कोई गुप्त या प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हुई है। ईरान का तर्क है कि ट्रंप किसी कूटनीतिक सफलता के कारण नहीं, बल्कि ईरान की ‘भीषण जवाबी कार्रवाई’ की चेतावनी से डरकर पीछे हटे हैं। तेहरान ने स्पष्ट किया कि जब ट्रंप ने उनकी शक्ति और इरादों को भांप लिया, तो उन्होंने अपने अल्टीमेटम से पीछे हटना ही बेहतर समझा।

48 घंटे का अल्टीमेटम और ‘पावर ग्रिड’ युद्ध की धमकी

इस पूरे विवाद की जड़ वह 48 घंटे का अल्टीमेटम था, जो ट्रंप ने हाल ही में ईरान को दिया था। ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान अगले 48 घंटों के भीतर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति के लिए नहीं खोलता है, तो अमेरिकी वायुसेना ईरान के पावर ग्रिड और बिजली संयंत्रों को तबाह कर देगी। इस धमकी ने वैश्विक स्तर पर हड़कंप मचा दिया था, क्योंकि बिजली संयंत्रों पर हमले का मतलब पूरे देश को अंधेरे में धकेलना था।

तेहरान की चेतावनी: “अमेरिका का पूरा नेटवर्क होगा ध्वस्त”

ट्रंप की धमकी के जवाब में ईरान ने भी बेहद आक्रामक रुख अपनाया था। ईरान ने दो टूक शब्दों में कहा था कि यदि अमेरिका उनके बिजली संयंत्रों को निशाना बनाता है, तो तेहरान पूरे मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उनके बिजली नेटवर्क को मलबे में तब्दील कर देगा। ईरान की इस ‘ईंट का जवाब पत्थर से’ देने वाली नीति ने शायद व्हाइट हाउस को अपनी रणनीति पर दोबारा सोचने को मजबूर कर दिया। ईरानी विशेषज्ञों का मानना है कि इसी संभावित तबाही के डर ने ट्रंप को ‘युद्धविराम’ का ऐलान करने पर मजबूर किया है।

ट्रंप का भविष्य का प्लान: क्या 5 दिन बाद थमेगी जंग?

अपने ताजा ऐलान में ट्रंप ने कहा कि अगले 5 दिनों तक गहन वार्ता का दौर चलेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इन 5 दिनों के परिणामों के आधार पर ही तय होगा कि आगे क्या करना है। हालांकि, कूटनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या यह वास्तव में शांति की पहल है या केवल अपनी सेना को पुनर्गठित करने का एक बहाना? फिलहाल, ईरान की ओर से कोई आधिकारिक सरकारी बयान तो नहीं आया है, लेकिन वहां के मीडिया ने ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

अनिश्चितता के साये में वैश्विक ऊर्जा बाजार

दोनों देशों के बीच जारी इस ‘दावे और वादे’ की जंग ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को भारी अनिश्चितता में डाल दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अभी भी प्रभावी रूप से बंद है और तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। अगर अगले 5 दिनों में कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष एक और भीषण रूप अख्तियार कर सकता है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह 5 दिन का विराम वास्तव में शांति का मार्ग प्रशस्त करेगा या यह किसी बड़े तूफान से पहले की शांति है।

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