Trump Gold Card : ट्रंप की ‘गोल्ड कार्ड’ वीज़ा योजना हुई फ्लॉप, चार महीने में मिला सिर्फ एक निवेशक, बढ़ी चिंता

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए लाई गई 'गोल्ड कार्ड' वीज़ा योजना पूरी तरह विफल होती दिख रही है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार महीनों में मात्र एक निवेशक ने इसके लिए आवेदन किया है। क्या निवेश की ऊँची शर्तें और कड़े नियम इस विफलता का मुख्य कारण हैं?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 24, 2026

Trump Gold Card :  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बड़े तामझाम के साथ शुरू की गई ‘गोल्ड कार्ड वीजा’ योजना अपने शुरुआती चार महीनों में बुरी तरह फ्लॉप साबित होती दिख रही है। दुनिया भर के अमीरों और प्रतिभाशाली लोगों को आकर्षित करने के लिए बनाई गई इस योजना के तहत अब तक केवल एक ही व्यक्ति को मंजूरी मिल सकी है। इस चौंकाने वाली जानकारी का खुलासा अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक ने गुरुवार को एक संसदीय समिति की बैठक के दौरान किया। ट्रंप प्रशासन को उम्मीद थी कि यह योजना अमेरिका में निवेश की बाढ़ ला देगी, लेकिन वर्तमान आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।

निवेश के बदले नागरिकता का रास्ता: क्या है गोल्ड कार्ड योजना?

गोल्ड कार्ड वीजा योजना को पुराने EB-5 वीजा प्रोग्राम के विकल्प के रूप में पेश किया गया था। इसके तहत किसी भी विदेशी नागरिक को अमेरिका में कानूनी रूप से रहने और काम करने का अधिकार पाने के लिए कम से कम 10 लाख डॉलर (लगभग 9.4 करोड़ रुपये) का निवेश करना अनिवार्य है। शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप ने इस निवेश की सीमा 50 लाख डॉलर तक रखने का सुझाव दिया था। आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 15,000 डॉलर की अतिरिक्त प्रोसेसिंग फीस भी रखी गई है। यह वीजा न केवल अमेरिका में रहने की अनुमति देता है, बल्कि भविष्य में अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करने का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

जांच की कड़ी प्रक्रिया या आवेदन में कमी: वाणिज्य मंत्री की सफाई

योजना की विफलता पर उठ रहे सवालों के बीच वाणिज्य मंत्री लुटनिक ने बचाव करते हुए कहा कि आवेदनों की संख्या कम नहीं है। उनके अनुसार, अब तक सैकड़ों लोग इस वीजा के लिए आवेदन कर चुके हैं, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता को देखते हुए हर फाइल की बारीकी से जांच की जा रही है। सरकार का तर्क है कि वे किसी भी ऐसे व्यक्ति को प्रवेश नहीं देना चाहते जिसका निवेश संदिग्ध हो। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि अत्यधिक सख्त नियमों और भारी निवेश राशि के कारण निवेशक अन्य देशों (जैसे पुर्तगाल या यूनान) की गोल्डन वीजा योजनाओं को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।

भविष्य की योजना: 50 लाख डॉलर वाला ‘ट्रंप प्लेटिनम कार्ड’ और टैक्स छूट

भले ही गोल्ड कार्ड योजना फिलहाल सुस्त हो, लेकिन प्रशासन की योजनाएं काफी महत्वाकांक्षी हैं। सरकार ने इसके प्रचार के लिए एक विशेष वेबसाइट बनाई है, जिसमें स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी जैसे अमेरिकी प्रतीकों का उपयोग किया गया है। इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन जल्द ही ‘प्लेटिनम कार्ड’ लॉन्च करने की तैयारी में है। इस कार्ड की कीमत 50 लाख डॉलर होगी और इसका सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि इसके धारक 270 दिनों तक अमेरिका में रहकर अपनी विदेशी आय पर टैक्स छूट प्राप्त कर सकेंगे। सरकार को उम्मीद है कि यह योजना दुनिया के ‘अल्ट्रा-रिच’ वर्ग को अमेरिका की ओर खींचने में सफल होगी।

अमेरिकी कर्ज और घटता वैश्विक आकर्षण: क्या पूरा होगा 1 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य?

अमेरिकी सरकार ने गोल्ड कार्ड और भविष्य की अन्य योजनाओं से लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर की कमाई का लक्ष्य रखा है। यह भारी-भरकम राशि अमेरिका पर लदे 31.3 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज और बढ़ते बजट घाटे को कम करने में मदद कर सकती है। हालांकि, राह इतनी आसान नहीं है। गैलप (Gallup) के हालिया सर्वे के अनुसार, दुनिया भर के लोगों में अमेरिका में बसने की चाहत तेजी से कम हो रही है। साल 2025 में केवल 15% लोग ही अमेरिका को अपनी पहली पसंद मान रहे हैं, जो 2007-2009 के 24% के मुकाबले काफी कम है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप की यह ‘प्रीमियम वीजा’ नीति अमेरिका की आर्थिक सेहत सुधार पाएगी।

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