Donald Trump Impose Tariffs on Pharma Industry: विदेशी दवाओं और मेटल्स पर बढ़ेगा कस्टम ड्यूटी, जानिए भारत को कितना नुकसान?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशी पेटेंट दवाओं पर 100% और स्टील, एल्युमिनियम जैसे मेटल्स पर 25% का नया टैरिफ लागू कर दिया है। 'लिबरेशन डे' की पहली वर्षगांठ पर उठाए गए इस कदम का मकसद कंपनियों को अमेरिका में फैक्ट्री लगाने पर मजबूर करना है। दुनिया के फार्मा हब भारत पर भी इसका गंभीर असर पड़ने वाला है।

Donald Trump Impose Tariffs on Pharma Industry

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 3, 2026

Donald Trump Impose Tariffs on Pharma Industry: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार, 3 अप्रैल को विदेशी दवाओं और मेटल्स (धातुओं) पर नए टैरिफ लागू करने का एक बड़ा आदेश जारी किया है। यह कदम उनके आक्रामक व्यापार एजेंडे और ‘अमेरिका फर्स्ट’ की रणनीति को आगे बढ़ाने का हिस्सा माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि यह ऐलान ‘लिबरेशन डे’ के ठीक एक साल बाद किया गया है, जब ट्रंप ने लगभग सभी प्रमुख वैश्विक व्यापारिक साझेदार देशों के साथ एक व्यापक ट्रेड वॉर (व्यापार युद्ध) का बिगुल फूंका था। इस नए फरमान से वैश्विक बाजारों में हलचल तेज हो गई है।

विदेशी मेडिसिन पर 100 प्रतिशत का ‘कस्टम ड्यूटी’

ट्रंप के नए आदेश के अनुसार, विदेश में बनी पेटेंट वाली दवाओं पर अब सीधे 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। यह भारी-भरकम टैक्स तब तक लागू रहेगा जब तक कि संबंधित देश अमेरिका के साथ नए व्यापार समझौते करके कम दरें हासिल नहीं कर लेते, या फिर वे कंपनियां अमेरिका में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट (फैक्ट्री) स्थापित करने का ठोस वादा नहीं करतीं। इस नई नीति के तहत:

  • बड़ी फार्मा कंपनियों को अपना उत्पादन अमेरिका में वापस लाने (रीशोरिंग) के लिए 120 दिन की समयसीमा दी गई है।
  • छोटी कंपनियों को इस ट्रांजिशन के लिए 180 दिन की मोहलत मिलेगी।
  • जो कंपनियां अमेरिका में फैक्ट्री लगाने का लिखित वादा करेंगी, उन पर लगने वाले टैरिफ को 100% से घटाकर 20% कर दिया जाएगा।
  • हालांकि, यूरोपियन यूनियन (EU), जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड को इस योजना से बाहर रखा गया है, क्योंकि उनके साथ पहले से ट्रेड पैक्ट हैं; इन पर पहले की तरह ही 15 प्रतिशत फार्मा टैरिफ लागू रहेगा।

भारतीय फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री पर अमेरिकी ‘इंपोर्ट टैक्स’ की दोहरी मार

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लागू किए गए इस सख्त कानून का भारत पर बहुत ही गंभीर असर पड़ने की पूरी आशंका है। भारत को वर्तमान में ‘दुनिया का फार्मा हब’ कहा जाता है, जहाँ अमेरिका समेत दुनिया भर की कई दिग्गज दवा निर्माता कंपनियां बड़े पैमाने पर उत्पादन करती हैं। इन नए टैरिफ नियमों के चलते भारत में बनने वाली और अमेरिका निर्यात होने वाली दवाओं की कीमतें आसमान छू सकती हैं। इससे भारत के फलते-फूलते फार्मास्यूटिकल एक्सपोर्ट और घरेलू इंडस्ट्री पर बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है।

स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर उत्पादों पर 25% का अतिरिक्त लेवी

दवाइयों के अलावा, अब स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर (तांबा) की बड़ी मात्रा वाले तैयार उत्पादों पर भी 25 प्रतिशत का सीधा टैरिफ लगेगा। इससे पहले तक टैरिफ केवल धातु के वजन या मात्रा के हिसाब से ही वसूला जाता था, लेकिन अब पूरे तैयार उत्पाद पर यह लागू होगा। इस बदलाव से कंस्ट्रक्शन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इस्तेमाल होने वाली चीजें महंगी हो जाएंगी, जिसका सीधा बोझ आम अमेरिकी उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दरकिनार कर लागू किए गए नए ‘ट्रेड बैरियर्स’

ध्यान देने वाली बात यह है कि इसी साल फरवरी में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा लगाए गए कुछ वैश्विक टैरिफ को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था। लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अलग-अलग विशेष कानूनी अधिकारों और प्रेसिडेंशियल पावर्स का इस्तेमाल करके एक बार फिर से इन शुल्कों को लागू करने की कोशिश की है। अब देखना यह होगा कि इस फैसले को कोर्ट में दोबारा चुनौती मिलती है या वैश्विक स्तर पर इसके जवाब में दूसरे देश भी जवाबी टैक्स लगाते हैं।