Strait Of Hormuz: ‘होर्मुज’ नहीं अब ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ कहिए! डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी प्रिंस को दी खुली चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा में सऊदी कारोबारियों को संबोधित करते हुए ईरान के सुप्रीम लीडर के बेटे मुज्तबा खामेनेई की मौत या गंभीर हालत का दावा किया है। ट्रंप ने मजाक में 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' बताया और कहा कि सऊदी अरब अब अमेरिका की ताकत का लोहा मान रहा है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मार्च 28, 2026

Strait Of Hormuz: फ्लोरिडा में सऊदी कारोबारियों के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक शक्ति संतुलन और मध्य पूर्व की स्थिति पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने अमेरिका की बढ़ती सैन्य ताकत का हवाला देते हुए सऊदी अरब और ईरान को कड़ा संदेश दिया।

सऊदी नेतृत्व को ट्रंप की दो टूक

ट्रंप ने अपने संबोधन में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) का नाम लिए बिना उन पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि पहले सऊदी नेतृत्व ने उन्हें ‘हल्के’ में लिया था और उन्हें लगा था कि अमेरिका कमजोर हो रहा है। ट्रंप के अनुसार, हालिया मुलाकात में खुद सऊदी नेता ने स्वीकार किया कि एक साल पहले के मुकाबले अब अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बन चुका है। ट्रंप ने मजाकिया लहजे में भीड़ से कहा कि वे MBS को समझाएं कि अब उनके साथ ठीक से पेश आएं, क्योंकि अमेरिका की ताकत अब पहले जैसी नहीं रही।

ईरान में नेतृत्व का संकट और मुज्तबा खामेनेई पर दावा

ईरान की आंतरिक स्थिति पर बोलते हुए ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर के संभावित उत्तराधिकारी मुज्तबा खामेनेई या तो मर चुके हैं या फिर उनकी हालत अत्यंत गंभीर है। ट्रंप ने तर्क दिया कि काफी समय से उनका सार्वजनिक रूप से सामने न आना ईरान में गहरे नेतृत्व संकट (Leadership Crisis) की ओर इशारा करता है। ट्रंप के अनुसार, ईरान अब मध्य पूर्व में अपना पुराना दबदबा खो चुका है और वहाँ की सरकार फिलहाल सबसे कमजोर स्थिति में है।

‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ और परमाणु हथियारों का खतरा

भाषण के दौरान एक दिलचस्प पल तब आया जब ट्रंप ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को गलती से ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ कह दिया। हालांकि, उन्होंने तुरंत अपनी गलती सुधारी, लेकिन यह उनकी कार्यशैली को दर्शाने के लिए काफी था। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चिंता जताई और कहा कि अगर ईरान परमाणु हथियार बना लेता, तो वह उसका इस्तेमाल जरूर करता। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के रास्ते खुले हैं, लेकिन किसी भी समझौते के लिए अमेरिका की शर्तों का मानना जरूरी होगा।

आधुनिक हथियारों की प्रदर्शनी और खाड़ी देशों की सुरक्षा

ट्रंप ने अमेरिका की सैन्य आधुनिकता का जिक्र करते हुए दावा किया कि उनके पास ऐसे अत्याधुनिक हथियार (Advanced Weaponry) हैं जिनके बारे में दुनिया को कल्पना भी नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे ईरान ने सऊदी अरब, यूएई, कतर और कुवैत जैसे देशों पर मिसाइलों की बारिश की थी, लेकिन अमेरिका की समय पर की गई सैन्य कार्रवाई ने एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध को टाल दिया। उन्होंने साल 2020 में जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या का उदाहरण देते हुए कहा कि वह ऑपरेशन अमेरिका की अजेय शक्ति का सबसे बड़ा संदेश था।

नाटो की आलोचना और अब्राहम समझौते की अपील

अंत में, ट्रंप ने एक बार फिर नाटो (NATO) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और कहा कि सैन्य मदद के मामले में उसे और सक्रिय होना चाहिए था। वहीं, उन्होंने तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोगन की प्रशंसा करते हुए कहा कि कुछ देशों ने अमेरिका का बखूबी साथ दिया है। ट्रंप ने सऊदी अरब से अब्राहम समझौते (Abraham Accords) का हिस्सा बनने की पुरजोर अपील की। उन्होंने जोर दिया कि इस ऐतिहासिक समझौते में शामिल होने से न केवल मध्य पूर्व में स्थाई शांति आएगी, बल्कि पूरे क्षेत्र को भारी आर्थिक लाभ भी होगा।