Trump Citizenship Law : अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर ‘जन्म के आधार पर नागरिकता’ (Birthright Citizenship) का मुद्दा चर्चा के केंद्र में है। हाल ही में, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ट्रंप प्रशासन के उस प्रयास को खारिज कर दिया, जिसके तहत वे अमेरिका में जन्म लेने वाले उन बच्चों की नागरिकता सीमित करना चाहते थे, जिनके माता-पिता अमेरिकी नागरिक या स्थायी निवासी नहीं हैं। इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने पिछले 150 से अधिक वर्षों से चली आ रही उस परंपरा को सुरक्षित रखा है, जिसके अनुसार अमेरिकी धरती पर जन्म लेने वाले लगभग हर बच्चे को स्वतः ही अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है।
ट्रंप प्रशासन के कार्यकारी आदेश को मिली कानूनी चुनौती
यह विवाद तब शुरू हुआ था जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) के माध्यम से यह नियम लागू करने की कोशिश की थी कि अवैध या अस्थायी रूप से रह रहे प्रवासियों की संतानों को जन्म के आधार पर नागरिकता नहीं दी जाएगी। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि यह नीति देश की आव्रजन प्रणाली को सख्त बनाने के लिए आवश्यक है। हालांकि, इस मामले ने कानूनी गलियारों में एक लंबी बहस को जन्म दिया, जो अंततः सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची। मंगलवार, 30 जून को कोर्ट ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिन इस मामले पर अपना बहुप्रतीक्षित निर्णय सुनाया।
6-3 के बहुमत से संविधान की व्याख्या
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के स्पष्ट बहुमत के साथ ट्रंप प्रशासन के इस आदेश को असंवैधानिक करार दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन (14th Amendment) और दशकों पुरानी न्यायिक परंपराओं का विस्तृत हवाला दिया। न्यायाधीशों ने स्पष्ट किया कि संविधान का मूल भाव अमेरिकी धरती पर पैदा होने वाले हर व्यक्ति को नागरिकता के समान अधिकार प्रदान करना है। इस निर्णय का अर्थ यह है कि अब बच्चों की नागरिकता उनके माता-पिता की आव्रजन स्थिति (Immigration Status) से प्रभावित नहीं होगी, और उन्हें जन्म से ही नागरिकता का अधिकार प्राप्त रहेगा।
ट्रंप की प्रतिक्रिया और भविष्य की विधायी योजनाएं
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि यद्यपि वे अदालत के निर्णय का सम्मान करते हैं, लेकिन वे वर्तमान व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं। ट्रंप ने संकेत दिया कि वे इसे देश के व्यापक हित में नहीं मानते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में आवश्यकता पड़ती है, तो उनकी सरकार कार्यकारी आदेशों के बजाय विधायी मार्ग (Legislative path) अपनाकर कानून में बदलाव लाने का प्रयास कर सकती है। हालांकि, विधायी रास्ता भी काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि इसके लिए कांग्रेस में व्यापक समर्थन की आवश्यकता होगी।
फैसले का दूरगामी प्रभाव और आव्रजन बहस
यह फैसला अमेरिका में आव्रजन नीति पर जारी लंबी बहस में एक बड़ा मोड़ है। एक तरफ जहां नागरिक अधिकार समूहों ने कोर्ट के इस फैसले को संविधान की जीत बताया है, वहीं दूसरी तरफ इसे आव्रजन पर सख्त नियंत्रण चाहने वाले लोगों के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। यह फैसला साबित करता है कि अमेरिकी न्यायिक प्रणाली संवैधानिक अधिकारों और ऐतिहासिक परंपराओं के संरक्षण के लिए कितनी प्रतिबद्ध है। अब देखना यह होगा कि क्या ट्रंप या उनके समर्थक भविष्य में इसे किसी कानून के माध्यम से बदलने में सफल हो पाते हैं या नहीं।
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