Trump China Visit 2026 : वैश्विक राजनीति और आर्थिक मोर्चे पर हलचल पैदा करते हुए अमेरिका ने ईरान से जुड़े एक बड़े नेटवर्क पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। अमेरिकी प्रशासन ने कुल 12 संस्थाओं और व्यक्तियों को काली सूची में डाल दिया है, जिनमें ईरान, हांगकांग और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की कंपनियां शामिल हैं। अमेरिका का स्पष्ट आरोप है कि यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय नियमों की धज्जी उड़ाते हुए ईरानी तेल को गुप्त रूप से चीन के बाजारों तक पहुंचाने और उसे बेचने में मदद कर रहा था। यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा से ठीक पहले की गई है।
फर्जी कंपनियों के जरिए IRGC का काला खेल: ट्रेजरी विभाग का खुलासा
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने सोमवार को जारी एक विस्तृत बयान में बताया कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) अपनी पहचान छिपाने के लिए एक जटिल मकड़जाल का इस्तेमाल कर रही है। विभाग के अनुसार, IRGC विभिन्न देशों में ‘फ्रंट’ या फर्जी कंपनियां स्थापित करती है ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचकर कच्चा तेल बेचा जा सके। इस गुप्त व्यापार से होने वाली भारी कमाई का उपयोग ईरान अपनी सरकार चलाने और अपनी सैन्य गतिविधियों को वित्तपोषित करने के लिए करता है। अमेरिका का मानना है कि इन आर्थिक स्रोतों को काटकर ही ईरान की विस्तारवादी नीतियों पर लगाम लगाई जा सकती है।
हांगकांग और यूएई की संपत्तियां फ्रीज: आर्थिक घेरेबंदी हुई और सख्त
इस ताजा प्रतिबंध की मार सबसे ज्यादा हांगकांग और यूएई स्थित कंपनियों पर पड़ी है। कार्रवाई के दायरे में ईरान के 3 व्यक्ति और 9 विदेशी कंपनियां आई हैं। प्रतिबंधों के लागू होते ही इन सभी की अमेरिका में स्थित चल-अचल संपत्तियों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिया गया है। इसके अलावा, अब कोई भी अमेरिकी नागरिक या व्यापारिक इकाई इन प्रतिबंधित संस्थाओं के साथ किसी भी प्रकार का लेनदेन नहीं कर पाएगी। इस कदम का उद्देश्य इन कंपनियों को वैश्विक वित्तीय प्रणाली से पूरी तरह अलग-थलग करना है ताकि वे भविष्य में ईरान की मदद न कर सकें।
‘इकोनॉमिक फ्यूरी’ अभियान: ईरान के परमाणु और हथियार कार्यक्रम पर वार
वॉशिंगटन लंबे समय से ईरान पर अधिकतम आर्थिक दबाव बनाने की नीति पर चल रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वे ईरान को उसके परमाणु हथियार कार्यक्रम और मध्य पूर्व में सक्रिय उसके समर्थित उग्रवादी संगठनों के लिए फंड जुटाने से रोकना चाहते हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कड़े शब्दों में कहा कि उनके ‘इकोनॉमिक फ्यूरी’ (Economic Fury) अभियान के तहत ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव की प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी, जब तक वह अपनी हानिकारक गतिविधियों को बंद नहीं कर देता। यह अभियान ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ को कमजोर करने के लिए तैयार किया गया है।
होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और तेल की बढ़ती कीमतें: वैश्विक बाजार में चिंता
ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों पर दिख रहा है। ईरान ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते को लगभग बाधित कर दिया है। ज्ञात हो कि दुनिया के कुल तेल और गैस परिवहन का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। इस अवरोध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान आने की आशंका प्रबल हो गई है, जिससे आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं। हालांकि मार्च में अमेरिका ने तेल की कमी को देखते हुए प्रतिबंधों में कुछ राहत दी थी, लेकिन अब फिर से सख्ती बढ़ा दी गई है।
ट्रंप की चीन यात्रा और द्विपक्षीय वार्ताओं में ईरान का मुद्दा
13 मई को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बीजिंग दौरा प्रस्तावित है, जहां वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार विवादों के साथ-साथ ईरान का मुद्दा इस बैठक में सबसे ऊपर रहेगा। चीन वर्तमान में ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, और अमेरिका चाहता है कि बीजिंग ईरान पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उस पर दबाव बढ़ाए। इससे पहले भी अमेरिका ने चीन की सैटेलाइट कंपनियों पर कार्रवाई की थी, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव पहले से ही बना हुआ है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात इस आर्थिक युद्ध को क्या नया मोड़ देती है।










