Hormuz Crisis: ईरान से तनाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने रद्द की छुट्टी, 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट की मांग

ईरान के साथ बढ़ते सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी छुट्टियां रद्द कर दी हैं और रक्षा क्षेत्र के लिए $1.5 ट्रिलियन के अभूतपूर्व बजट की मांग की है। ट्रंप का कहना है कि "युद्ध के समय सेना सर्वोपरि है।" क्या यह रकम ईरान के खिलाफ अंतिम प्रहार की तैयारी है?

Hormuz Crisis

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 4, 2026

Hormuz Crisis: मिडल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध की आहट के बीच अमेरिकी राजनीति में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मौजूदा परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए अपनी साप्ताहिक छुट्टी (वीकेंड) को रद्द करने का फैसला लिया है। व्हाइट हाउस से प्राप्त आधिकारिक सूचना के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप इस दौरान वाशिंगटन में ही मौजूद रहेंगे और बंद कमरे में उच्चस्तरीय रणनीतिक बैठकों की अध्यक्षता करेंगे। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान के साथ अमेरिका के संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।

व्हाइट हाउस में बैठकों का दौर: युद्ध की तैयारियों पर चर्चा

सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी निर्धारित छुट्टियों को त्यागकर लगातार बैठकों में शामिल होने का निर्णय लिया है। इन बैठकों में पेंटागन के शीर्ष अधिकारी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और खुफिया एजेंसियों के प्रमुख शामिल हो रहे हैं। माना जा रहा है कि इन चर्चाओं का मुख्य केंद्र ईरान के साथ जारी तनाव और संभावित सैन्य कार्रवाई की रूपरेखा तैयार करना है। प्रशासन का पूरा ध्यान इस समय खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी हितों की रक्षा करने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सेना को मुस्तैद रखने पर है।

रक्षा बजट में ऐतिहासिक उछाल: 1.5 ट्रिलियन डॉलर का भारी-भरकम प्रस्ताव

इसी बीच, ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी कांग्रेस के सामने एक ऐसा वित्तीय प्रस्ताव पेश किया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। प्रशासन ने अगले वित्त वर्ष के लिए 1.5 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 125 लाख करोड़ रुपये) के रक्षा बजट की मांग की है। यह मांग पिछले साल के मुकाबले लगभग 42 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य खर्च में इतनी भारी वृद्धि का सीधा कारण ईरान के साथ बढ़ती शत्रुता और आधुनिक हथियारों की तत्काल आवश्यकता है। यदि यह बजट पास होता है, तो यह अमेरिका के सैन्य इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ी सैन्य वृद्धि का संकेत

पेंटागन की रिपोर्ट और बजट प्रस्तावों का विश्लेषण करें तो यह स्पष्ट होता है कि यदि अमेरिकी कांग्रेस इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देती है, तो यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अब तक की सबसे बड़ी सैन्य बजट बढ़ोतरी होगी। 2026 के लिए प्रस्तावित इस 42% की वृद्धि का उद्देश्य न केवल वर्तमान खतरों से निपटना है, बल्कि अमेरिका की वैश्विक सैन्य संप्रभुता को और अधिक सशक्त बनाना है। इसके तहत परमाणु क्षमता के आधुनिकीकरण, साइबर सुरक्षा और उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर भारी निवेश करने की योजना है।

घरेलू कटौती और सैन्य सुदृढ़ीकरण पर ट्रंप का जोर

व्हाइट हाउस द्वारा शुक्रवार को जारी किया गया यह बजट प्रस्ताव फिलहाल एक मांग है और इसे कानून का रूप लेने के लिए कांग्रेस के दोनों सदनों की मंजूरी की आवश्यकता होगी। हालांकि, इस प्रस्ताव ने ट्रंप सरकार की प्राथमिकताओं को साफ कर दिया है। प्रशासन का मुख्य फोकस ‘लॉ एंड ऑर्डर’ को मजबूत करने और सैन्य शक्ति को अजेय बनाने पर है।

इस भारी रक्षा खर्च की भरपाई के लिए ट्रंप ने अन्य क्षेत्रों में बड़ी कटौती का सुझाव भी दिया है। प्रस्ताव में कांग्रेस से गैर-रक्षा (Non-Defense) खर्च में करीब 73 अरब डॉलर (लगभग 10 प्रतिशत) की कटौती करने की अपील की गई है। सरकार का तर्क है कि गैर-जरूरी और विवादास्पद कार्यक्रमों को बंद कर वह पैसा सुरक्षा पर खर्च किया जाना चाहिए। साथ ही, कई नागरिक जिम्मेदारियों को राज्यों और स्थानीय सरकारों को सौंपने की बात भी कही गई है। आने वाले सप्ताहों में अमेरिकी कांग्रेस में इस ऐतिहासिक और विवादास्पद बजट पर तीखी बहस होने की पूरी उम्मीद है।

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