Trump Iran War : ईरान युद्ध पर ट्रंप का बड़ा दावा, आखिर किस खतरे को रोकने की बात कही?

ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता तो उनके अनुसार इजराइल और मध्य पूर्व को भारी खतरा होता। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना कार्रवाई का कारण था।

Trump Iran War

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 29, 2026

Trump Iran War : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष और मध्य पूर्व की स्थिति को लेकर कई अहम बयान दिए हैं। ट्रंप ने दावा किया कि अगर अमेरिका ने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो इजराइल के अस्तित्व पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता था और मध्य पूर्व में हालात और ज्यादा बिगड़ सकते थे। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हस्तक्षेप से इस स्थिति को रोकने में मदद मिली। ट्रंप ने एक बार फिर अपना रुख दोहराते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रुख

ट्रंप ने कहा कि ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने के मुद्दे पर अमेरिका ने कड़े कदम उठाए हैं। उनका कहना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में संघर्ष, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और ईरान की सैन्य क्षमताओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जारी है। अमेरिकी अधिकारियों ने भी चीन से ईरान को किसी तरह की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सैन्य मदद नहीं देने की बात कही है।

शी जिनपिंग से हथियार खरीद पर क्या हुई बात?

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अमेरिकी हथियारों की संभावित खरीद को लेकर ट्रंप के बयान ने नया विवाद पैदा कर दिया है। चीन में अमेरिकी राजदूत डेविड परड्यू ने ‘फॉक्स न्यूज संडे’ को बताया था कि ट्रंप ने शी से पूछा था कि क्या चीन अमेरिकी हथियार खरीदने में रुचि रखता है। हालांकि, ट्रंप ने सोमवार को इस दावे से दूरी बनाते हुए कहा कि उन्हें ऐसी बातचीत की जानकारी नहीं है और संभव है कि परड्यू चीन की जगह ताइवान की बात कर रहे हों।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की

हथियारों से जुड़े इस बयान के बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी कानून चीन को हथियारों की बिक्री पर रोक लगाता है। विभाग ने कहा कि चीन को अमेरिकी हथियार बेचने का कोई प्रस्ताव या योजना नहीं है। ट्रंप ने भी बातचीत के दौरान चीन के बजाय ताइवान का संदर्भ होने की संभावना जताई। वहीं परड्यू ने कहा था कि ताइवान को लेकर ट्रंप का रुख मजबूत है और अमेरिका वहां हथियारों की बिक्री जारी रखता है।

चीन और ताइवान का मुद्दा फिर चर्चा में

अमेरिका लंबे समय से ताइवान को सैन्य उपकरण उपलब्ध कराता रहा है, जबकि चीन अमेरिकी हथियार बिक्री का विरोध करता है। ऐसे में ट्रंप और परड्यू के बयानों में अंतर ने इस मुद्दे को फिर सुर्खियों में ला दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका और चीन के बीच हालिया बातचीत में ताइवान के साथ-साथ ईरान और अन्य रणनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

आयोवा में बनेगा बड़ा स्टील प्लांट

ट्रंप ने अमेरिका के घरेलू स्टील उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना के तहत आयोवा में एक बड़े स्टील प्लांट के निर्माण की घोषणा भी की। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, परियोजना में करीब 15 अरब डॉलर का निवेश प्रस्तावित है और इसके पूरी तरह संचालन में आने के बाद सालाना करीब एक करोड़ टन स्टील उत्पादन का लक्ष्य है। ट्रंप ने इसे अमेरिका का सबसे बड़ा स्टील प्लांट बताया।

कनाडा के साथ व्यापार पर ट्रंप की टिप्पणी

कनाडा के साथ व्यापारिक संबंधों को लेकर भी ट्रंप ने अपनी स्थिति सामने रखी। उन्होंने कहा कि कनाडा अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करना चाहता है। हालांकि, ट्रंप ने आरोप लगाया कि अतीत में कनाडा ने अमेरिका के साथ उचित व्यवहार नहीं किया। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच बातचीत में मौजूद समस्याओं में से एक बताया। इस बीच अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर बातचीत और नीतिगत मतभेद लगातार चर्चा में बने हुए हैं।

बयान के बीच अंतरराष्ट्रीय रिश्तों पर नजर

ट्रंप के ताजा बयानों में मध्य पूर्व का संघर्ष, ईरान का परमाणु कार्यक्रम, चीन के साथ संबंध, ताइवान को अमेरिकी हथियार और कनाडा के साथ व्यापार जैसे कई मुद्दे शामिल रहे। हथियारों की बिक्री को लेकर राष्ट्रपति के बयान और उनके राजदूत की टिप्पणी में अंतर सामने आया है, जबकि अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने चीन को हथियार बेचने की किसी योजना से इनकार किया है।

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