Netanyahu Jail: ईरान से जंग जीतेंगे या जेल जाएंगे नेतन्याहू? ट्रंप की इस बात ने चौंकाया

एक तरफ ईरान पर अमेरिकी-इजराइली मिसाइलें बरस रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इजराइल के अंदर नेतन्याहू को जेल भेजने की तैयारी चल रही है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अब इजराइली राष्ट्रपति से मांग की है कि नेतन्याहू को भ्रष्टाचार के सभी आरोपों से 'पार्डन' (माफी) दी जाए। क्या ट्रंप नेतन्याहू को बचाने के लिए युद्ध का इस्तेमाल कर रहे हैं?

Netanyahu Jail

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 6, 2026

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Netanyahu Jail: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को उनके खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों में तुरंत माफी दे दें। ट्रंप का तर्क है कि इस समय इजराइल ईरान के साथ एक गंभीर संघर्ष की स्थिति में है और देश के नेतृत्व का पूरा ध्यान केवल युद्ध पर होना चाहिए। अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘एक्सियोस’ को दिए गए एक विशेष फोन इंटरव्यू में ट्रंप ने खुलासा किया कि उनकी नेतन्याहू से लगभग हर दिन बातचीत होती है। ट्रंप चाहते हैं कि नेतन्याहू के दिमाग पर अदालती कार्यवाही का कोई बोझ न रहे, ताकि वे पूरी शक्ति के साथ ईरान के खिलाफ मोर्चा संभाल सकें।

नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार के आरोप: सिगार और शैंपेन से जुड़ा विवाद

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू साल 2020 से ही भ्रष्टाचार के कई गंभीर मुकदमों का सामना कर रहे हैं। उन पर मुख्य आरोप यह है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कुछ प्रभावशाली अरबपतियों से महंगे उपहार स्वीकार किए। इन तोहफों की सूची में महंगी ज्वेलरी, विदेशी सिगार और शैंपेन जैसी विलासी वस्तुएं शामिल थीं। अभियोजन पक्ष का दावा है कि इन उपहारों के बदले नेतन्याहू ने उन व्यवसायियों को अनुचित राजनीतिक लाभ पहुँचाया। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने इन आरोपों को पूरी तरह से “राजनीतिक साजिश” करार दिया है। ट्रंप का मानना है कि वाइन और सिगार जैसे छोटे विषयों को लेकर किसी देश के प्रधानमंत्री पर मुकदमा चलाना अनुचित है, विशेषकर तब जब देश युद्ध जैसी स्थिति का सामना कर रहा हो।

राष्ट्रपति हर्जोग पर ट्रंप का दबाव और मुलाकात न करने की चेतावनी

ट्रंप ने इंटरव्यू के दौरान एक चौंकाने वाला दावा भी किया। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने उनसे कम से कम पांच बार नेतन्याहू को माफी देने का वादा किया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ट्रंप के अनुसार, हर्जोग इस माफीनामे के मुद्दे का उपयोग प्रधानमंत्री नेतन्याहू पर राजनीतिक दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि जल्द ही नेतन्याहू को क्लीन चिट नहीं दी गई, तो वे इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाते रहेंगे। इतना ही नहीं, ट्रंप ने यहाँ तक कह दिया कि जब तक माफी की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, वे राष्ट्रपति हर्जोग से किसी भी प्रकार की औपचारिक मुलाकात नहीं करेंगे।

इजराइली अधिकारियों का पलटवार: ट्रंप के दावों को बताया निराधार

ट्रंप के इन तीखे बयानों के बाद इजराइल के प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई है। इजराइल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि राष्ट्रपति हर्जोग ने कभी भी माफी देने का कोई निश्चित वादा नहीं किया था। अधिकारी के अनुसार, हर्जोग ने केवल इतना कहा था कि वे मौजूदा कानूनी प्रक्रियाओं और नियमों के दायरे में रहकर ही किसी भी अपील पर विचार करेंगे। इजराइली अधिकारियों का मानना है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता सर्वोपरि है और इसे किसी बाहरी राजनीतिक दबाव के तहत प्रभावित नहीं किया जा सकता।

राष्ट्रपति कार्यालय का आधिकारिक रुख और कानूनी पेचदगियां

राष्ट्रपति हर्जोग के कार्यालय ने भी इस मुद्दे पर एक औपचारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। बयान में जोर देकर कहा गया है कि इजराइल एक पूर्णतः संप्रभु लोकतांत्रिक राष्ट्र है, जहाँ सभी निर्णय किसी बाहरी हस्तक्षेप के बजाय राष्ट्रीय कानूनों के आधार पर लिए जाते हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मत है कि यदि ट्रंप के दबाव में आकर अभी माफी दी जाती है, तो इसे “विदेशी हस्तक्षेप” मानकर इजराइल के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। इसके अलावा, इजराइली कानून के तहत माफी की पहली शर्त यह है कि आरोपी अपनी गलती स्वीकार करे और उस पर पछतावा व्यक्त करे, जबकि नेतन्याहू शुरू से ही खुद को निर्दोष बताते आए हैं।

युद्ध के साये में रुका हुआ ट्रायल और अनिश्चित भविष्य

वर्तमान में जारी युद्ध की स्थिति को देखते हुए इजराइल की अदालतों के कामकाज को काफी सीमित कर दिया गया है। इसी कारण नेतन्याहू के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मुकदमों की सुनवाई भी अस्थायी रूप से रुकी हुई है। नेतन्याहू के वकील भी सुरक्षा और व्यस्तता का हवाला देकर सुनवाई को बार-बार टालने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि ट्रंप की पैरवी ने इस मुद्दे को फिर से विश्व पटल पर ला खड़ा किया है, लेकिन इजराइल के कड़े कानूनी प्रावधानों और नेतन्याहू के अडिग रुख को देखते हुए यह विवाद फिलहाल सुलझता नजर नहीं आ रहा है।

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