Trump’s 15-Point Plan: डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव, क्या अब थमेगा मिडिल ईस्ट का महायुद्ध?

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सामने 15 कड़ी शर्तें रखी हैं, जिनमें परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने और अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार के लिए रास्ता खोलने की मांग की गई है। पाकिस्तान इस डील में मुख्य मध्यस्थ है। क्या ईरान इन शर्तों को मानकर युद्ध विराम करेगा या संघर्ष और भीषण होगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 25, 2026

Trump’s 15-Point Plan: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी भीषण संघर्ष के 26वें दिन एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सामने 15 सूत्री शांति योजना पेश की है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य युद्ध को समाप्त करना, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना है। ट्रंप ने दावा किया है कि पिछले दो दिनों में “बेहद उपयोगी” बातचीत हुई है, जिसके कारण उन्होंने ईरान के पावर प्लांट्स पर होने वाले हमलों को 5 दिनों के लिए टाल दिया है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और ट्रंप का ‘शांति मास्टरप्लान’

यह शांति प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से ईरान तक पहुँचाया गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस वार्ता की मेजबानी करने की पेशकश की है, जिसे ट्रंप ने भी सराहा है। ट्रंप के इस 15 सूत्री प्लान में सबसे प्रमुख शर्त एक महीने का तत्काल ‘सीजफायर’ है। इसके अलावा, ईरान को लिखित गारंटी देनी होगी कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। योजना के तहत ईरान के मौजूदा परमाणु ढांचे को नष्ट करना, संवर्धित यूरेनियम का स्टॉक देश से बाहर भेजना और भविष्य में यूरेनियम संवर्धन पर पूर्ण रोक लगाना शामिल है।

सैन्य और क्षेत्रीय सुरक्षा पर कड़े प्रतिबंध

शांति समझौते के मसौदे में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने की बात कही गई है। साथ ही, ईरान को हिजबुल्लाह और हमास जैसे ‘प्रॉक्सी’ समूहों को हथियार और फंडिंग देना बंद करना होगा। हॉर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रंप ने शर्त रखी है कि ईरान को अमेरिकी और इजरायली जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना होगा, बदले में वह ट्रांजिट फीस ले सकता है। यदि ईरान इन शर्तों को मानता है, तो उसे आर्थिक प्रतिबंधों में आंशिक राहत दी जाएगी, लेकिन उस धन का उपयोग केवल मानवीय कार्यों जैसे दवा और भोजन के लिए ही किया जा सकेगा।

ईरान का सख्त रुख: “तीसरी बार नहीं फंसेंगे”

भले ही ट्रंप बातचीत को सकारात्मक बता रहे हों, लेकिन तेहरान का रुख अभी भी बेहद कड़ा है। ईरान ने किसी भी सीधी बातचीत से इनकार किया है और अपनी पुरानी मांगें दोहराई हैं। ईरान चाहता है कि अमेरिका खाड़ी देशों से अपने सभी सैन्य बेस हटाए, सभी प्रतिबंध खत्म करे और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई करे। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि ट्रंप ने पहले भी दो बार समझौते तोड़कर धोखा दिया है, इसलिए वे इस बार उनके झांसे में नहीं आएंगे। ईरान हॉर्मुज पर अपना पूर्ण नियंत्रण बनाए रखने पर अड़ा हुआ है।

इजरायल की सैन्य रणनीति और जमीनी हकीकत

दिलचस्प बात यह है कि इजरायली अधिकारी ट्रंप के इस अचानक आए ‘सीजफायर प्लान’ से हैरान हैं। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने स्पष्ट किया है कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान में लिटानी नदी तक कब्जा जारी रखेगी। युद्ध के मैदान में तनाव कम नहीं हुआ है; हिजबुल्लाह ने इजरायल के हाइफा पर रॉकेट दागे हैं, वहीं इजरायल ने ईरान के शिराज एयरपोर्ट और अन्य ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं। अमेरिका ने भी स्थिति को देखते हुए क्षेत्र में 3000 अतिरिक्त सैनिक भेजे हैं।

भारत की भूमिका और वैश्विक तेल बाजार पर असर

इस कूटनीतिक हलचल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप से फोन पर बात की है। भारत ने हॉर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। रिलायंस ने अमेरिकी छूट का फायदा उठाते हुए ईरान से 5 मिलियन बैरल कच्चे तेल की खरीद की है। ट्रंप के शांति प्रस्ताव की खबर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में मामूली गिरावट देखी गई है, लेकिन युद्ध की अनिश्चितता के कारण बाजार अब भी दबाव में है।

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