रोहिंग्या शिविर में त्रासदी: आग ने झोपड़ियां जलाकर हजारों शरणार्थियों को घर से बेदखल किया

ढाका बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार जिले में स्थित रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में मंगलवार तड़के लगी भीषण आग ने भारी तबाही मचा दी। कैंप-16 में आग से 335 अस्थायी झोपड़ियाँ पूरी तरह जल गईं और 72 अन्य को नुकसान पहुंचा। इस हादसे में 2,000 से अधिक रोहिंग्या शरणार्थी बेघर हो गए। दमकल कर्मियों को आग पर काबू पाने में करीब तीन घंटे लगे। राहत की बात यह रही कि कोई मौत नहीं हुई, हालांकि कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं। लेकिन हजारों लोगों ने अपने घरों के साथ-साथ जरूरी सामान, पहचान पत्र और अहम दस्तावेज़ भी खो दिए। संयुक्त राष्ट्र की

Wrriten By :

Editor

Published On :

जनवरी 22, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

ढाका
बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार जिले में स्थित रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में मंगलवार तड़के लगी भीषण आग ने भारी तबाही मचा दी। कैंप-16 में आग से 335 अस्थायी झोपड़ियाँ पूरी तरह जल गईं और 72 अन्य को नुकसान पहुंचा। इस हादसे में 2,000 से अधिक रोहिंग्या शरणार्थी बेघर हो गए। दमकल कर्मियों को आग पर काबू पाने में करीब तीन घंटे लगे। राहत की बात यह रही कि कोई मौत नहीं हुई, हालांकि कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं। लेकिन हजारों लोगों ने अपने घरों के साथ-साथ जरूरी सामान, पहचान पत्र और अहम दस्तावेज़ भी खो दिए। संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) ने कहा कि यह आग उन परिवारों के लिए नई मानवीय आपदा बन गई है, जो पहले ही कठिन हालात में जी रहे थे।

IOM के बांग्लादेश प्रमुख लांस बोनो ने कहा, “भीड़भाड़ वाले शिविरों में आग लगने से असर सिर्फ ढांचे तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सुरक्षा और बुनियादी सेवाओं तक पहुंच भी खतरे में पड़ जाती है।” नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल (NRC) के अनुसार, आग से पानी और स्वच्छता केंद्र, 11 लर्निंग सेंटर, रास्ते और अन्य बुनियादी ढांचे भी क्षतिग्रस्त हुए। फिलहाल IOM, NRC और अन्य एजेंसियां कंबल, मच्छरदानी, खाना पकाने का सामान, हाइजीन किट और सोलर लाइट जैसी आपात सहायता उपलब्ध करा रही हैं। गौरतलब है कि 2017 में म्यांमार की सेना की कार्रवाई के बाद 7 लाख से अधिक रोहिंग्या बांग्लादेश आए थे। इसके बाद से म्यांमार के राखाइन प्रांत में जारी संघर्ष के चलते हजारों और शरणार्थी कॉक्स बाज़ार पहुंचते रहे हैं।राहत एजेंसियों ने बताया कि शिविरों में बने बांस और प्लास्टिक से ढके अस्थायी घर, जो सिर्फ 6–12 महीने के लिए थे, आज भी इस्तेमाल हो रहे हैं और आग के लिए बेहद संवेदनशील हैं।
 
एक रिपोर्ट के मुताबिक 2018 से 2025 के बीच 2,425 आग की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनसे 1 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए। NRC ने कहा कि 50,000 अर्ध-पक्के शेल्टर बनाने की योजना थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मदद में भारी कटौती के कारण यह रोकनी पड़ी। खासतौर पर अमेरिका और यूरोपीय देशों की सहायता में कटौती से फंडिंग संकट गहरा गया है। 2025 में रोहिंग्या राहत के लिए जरूरी धन का सिर्फ आधा हिस्सा मिला, जिससे 466.6 मिलियन डॉलर का घाटा रहा। राहत संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर तुरंत फंड नहीं बढ़ाया गया, तो ऐसी आग की घटनाएं बार-बार होती रहेंगी और शरणार्थियों को बार-बार शून्य से जीवन शुरू करना पड़ेगा।

 

Leave a Comment

2