ट्रंप की हार के पीछे भारतीय वोटरों का कितना असर? मुनीर और वीजा मुद्दे भी चर्चा में

वाशिंगटन  करीब दो साल पहले जब अमेरिका में चुनाव होने वाले थे, तो रिपब्लिकन पार्टी की तरफ भारतीय-अमेरिकी वोटर्स ज्यादा आकर्षित दिख रहे थे. भारत के प्रति ट्रंप का झुकाव इसकी बड़ी वजह था, लेकिन दूसरे कार्यकाल में जिस तरह से ट्रंप ने खुद को पाकिस्तान से जोड़ लिया और गाहे-बगाहे भारत के विरोध में बयानबाजी करने लगे, उसने इस पूरे सीन को पलट दिया. मध्यावधि चुनाव आते-आते प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप का भारत विरोधी रुख असंतोष और आखिरकार उनके खिलाफ वोटों में तब्दील हो गया।  इस बदलाव के पीछे MAGA आंदोलन से जुड़े कुछ समर्थकों की भारत विरोधी बयानबाजी को

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Published On :

नवम्बर 6, 2026

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वाशिंगटन

 करीब दो साल पहले जब अमेरिका में चुनाव होने वाले थे, तो रिपब्लिकन पार्टी की तरफ भारतीय-अमेरिकी वोटर्स ज्यादा आकर्षित दिख रहे थे. भारत के प्रति ट्रंप का झुकाव इसकी बड़ी वजह था, लेकिन दूसरे कार्यकाल में जिस तरह से ट्रंप ने खुद को पाकिस्तान से जोड़ लिया और गाहे-बगाहे भारत के विरोध में बयानबाजी करने लगे, उसने इस पूरे सीन को पलट दिया. मध्यावधि चुनाव आते-आते प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप का भारत विरोधी रुख असंतोष और आखिरकार उनके खिलाफ वोटों में तब्दील हो गया। 

इस बदलाव के पीछे MAGA आंदोलन से जुड़े कुछ समर्थकों की भारत विरोधी बयानबाजी को एक अहम वजह माना जा रहा है. MAGA यानी ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ ट्रंप का राजनीतिक आंदोलन है. इसके कुछ समर्थकों की ओर से भारतीय प्रवासियों को निशाना बनाने वाली टिप्पणियों और भारत को लेकर नकारात्मक रुख ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय में नाराजगी पैदा की है. कहीं भी भारत को लेकर ट्रंप का रुख सकारात्मक नहीं था, खासतौर पर ऑपरेशन सिंदूर के बाद तो ट्रंप इसे खुलकर जाहिर कर रहे थे। 

भारतीय-अमेरिकी समुदाय की नाराजगी का एक उदाहरण टेक्सस में देखने को मिला. यहां रिपब्लिकन पार्टी के एक उम्मीदवार बो फ्रेंच ने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के दक्षिण एशियाई मूल के छात्रों की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए उनकी मौजूदगी पर टिप्पणी की थी. इस पोस्ट के बाद अमेरिका में भारतीयों की पहचान, प्रवासियों के अधिकार और समाज में उनकी जगह को लेकर बहस शुरू हो गई. MAGA समर्थकों की ओर से भारतीय प्रवासियों को लेकर की गई ऐसी टिप्पणियों ने समुदाय के एक हिस्से को यह सोचने पर मजबूर किया कि क्या रिपब्लिकन पार्टी उनके हितों का सही प्रतिनिधित्व कर रही है. ये भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के अपना मन बदलने के लिए पीछे वजह हो सकती है। 

कार्नेगी एंडोमेंट और रिसर्च फर्म YouGov के अक्टूबर 2026 के सर्वे में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का रुझान साफ दिखाई दिया. 1000 भारतीय-अमेरिकी वयस्कों पर किए गए इस सर्वे में 62 प्रतिशत नागरिकों ने कांग्रेस चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को वोट देने की इच्छा जताई, जबकि सिर्फ 19 प्रतिशत ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन किया. 12 प्रतिशत मतदाता असमंजस में थे. साल 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में 62 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकियों ने कमला हैरिस और 30 प्रतिशत ने डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन किया था यानी उस समय दोनों के बीच 32 प्रतिशत अंकों का अंतर था, जो 2026 के सर्वे में बढ़कर 43 प्रतिशत अंक हो गया. हालांकि दोनों सर्वे अलग-अलग तरह के चुनावों से जुड़े हैं, इसलिए उनकी सीधी तुलना सावधानी से करनी चाहिए। 

सर्वे में एक और दिलचस्प बात सामने आई. डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन करने वाले 35 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं ने कहा कि उनका फैसला मुख्य रूप से रिपब्लिकन पार्टी के विरोध में है. वहीं 65 प्रतिशत ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार या पार्टी के समर्थन को अपनी प्राथमिक वजह बताया. इस चुनाव में सुहास सुब्रमण्यम और पिया दांडिया समेत भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने भी जीत दर्ज की. कुल मिलाकर नतीजे बताते हैं कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय का वोट किसी एक मुद्दे पर निर्भर नहीं है. भारत विरोधी बयानबाजी, प्रवासियों को लेकर राजनीति, आर्थिक परेशानियां और ट्रंप प्रशासन की नीतियां मिलकर इस बदलाव को प्रभावित करती दिखाई दे रही हैं। 

 

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