TN Election 2026: तमिलनाडु 2026 चुनाव से पहले NDA की सीट शेयरिंग लगभग तय, पीएमके को बड़ी हिस्सेदारी

क्या तमिलनाडु में इस बार सत्ता का समीकरण बदल जाएगा? 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर बड़ी खबर आई है। सूत्रों के मुताबिक, पीएमके को गठबंधन में उम्मीद से ज्यादा सीटें दी जा रही हैं। आखिर अन्नामलाई और ईपीएस के बीच क्या डील हुई है और क्या यह गठबंधन स्टालिन के किले को भेद पाएगा?

TN Election 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 7, 2026

TN Election 2026: तमिलनाडु में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) की रणनीति और सीट शेयरिंग को लेकर स्थिति तेजी से स्पष्ट होती नजर आ रही है। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) का एनडीए में शामिल होकर चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है। यह कदम राज्य की राजनीति में गठबंधन संतुलन और जातीय समीकरणों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

पीएमके को 18 विधानसभा और 1 राज्यसभा सीट का प्रस्ताव

सूत्रों के अनुसार, एनडीए में पीएमके के अंबुमणि रामदास गुट को 18 विधानसभा सीटें और 1 राज्यसभा सीट देने पर सहमति बन गई है। यह प्रस्ताव पीएमके को सीमित लेकिन प्रभावशाली भूमिका देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। राज्यसभा सीट का आश्वासन पार्टी नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व देने का संकेत भी देता है, जिससे पीएमके के लिए यह सौदा राजनीतिक रूप से लाभकारी बनता दिख रहा है।

EPS का दिल्ली दौरा और अमित शाह से अहम बैठक

सीट शेयरिंग को अंतिम रूप देने के लिए AIADMK प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी (EPS) दो दिवसीय दिल्ली दौरे पर हैं। बुधवार शाम उनकी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात संभावित बताई जा रही है। इस बैठक में तमिलनाडु में एनडीए की सीटों के बंटवारे, साझा चुनावी रणनीति और आपसी समन्वय पर अंतिम मुहर लग सकती है।

एनडीए में बीजेपी और AIADMK की अलग-अलग प्राथमिकताएं

बीजेपी तमिलनाडु में एनडीए को एक मजबूत, संगठित और विश्वसनीय विकल्प के रूप में पेश करना चाहती है। वहीं AIADMK की कोशिश है कि वह गठबंधन की धुरी बनी रहे और राज्य में अपने पारंपरिक प्रभाव को सुरक्षित रखे। इसी संतुलन के तहत सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत बेहद संवेदनशील और रणनीतिक मानी जा रही है।

वन्नियार वोट बैंक पर एनडीए की नजर

पीएमके का वन्नियार समुदाय में मजबूत जनाधार उत्तर और मध्य तमिलनाडु में निर्णायक भूमिका निभाता है। एनडीए सीमित लेकिन प्रभावी सीटें देकर जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रहा है। इससे डीएमके के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की संभावना भी जताई जा रही है।

2021 विधानसभा चुनाव से मिलते संकेत

2021 के विधानसभा चुनाव में AIADMK और बीजेपी ने एनडीए के तहत मिलकर चुनाव लड़ा था। उस समय एनडीए को कुल 75 सीटें मिली थीं, जिनमें AIADMK ने 66 और बीजेपी ने 4 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वोट शेयर में डीएमके करीब 38 फीसदी के साथ आगे रही थी, जबकि AIADMK को लगभग 33 फीसदी और बीजेपी को करीब 2.6 फीसदी वोट मिले थे। यही आंकड़े एनडीए की मौजूदा रणनीति की पृष्ठभूमि तैयार करते हैं।

अमित शाह की तमिलनाडु यात्राओं से बढ़ी हलचल

हाल के महीनों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तमिलनाडु यात्राओं ने राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है। उन्होंने न केवल बड़ी जनसभाओं को संबोधित किया, बल्कि बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक भी ली। इससे संकेत मिला कि पार्टी राज्य में संगठन और चुनावी तैयारी दोनों स्तरों पर आक्रामक रुख अपना रही है।

शहरी सीटों पर बीजेपी का खास फोकस

बीजेपी इस बार कोयंबटूर, मदुरै और चेन्नई जैसे शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों पर विशेष ध्यान दे रही है। कोयंबटूर की दो सीटों और चेन्नई महानगर की 3 से 4 सीटों पर पार्टी मजबूती से दावा ठोक रही है, जहां मध्यम वर्ग और हिंदी भाषी मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

एनडीए को अभेद्यबनाने की बड़ी रणनीति

सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह की रणनीति केवल बीजेपी को मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे एनडीए को चुनावी रूप से अभेद्य बनाने की है। इसी क्रम में AIADMK के अन्य धड़ों—टीटीवी दिनाकरन और ओ. पन्नीरसेल्वम—को EPS के नेतृत्व वाले गठबंधन में वापस लाने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। यदि यह राजनीतिक ‘सोशल इंजीनियरिंग’ सफल होती है, तो 2026 का तमिलनाडु चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है।

Read More: दूषित पानी को लेकर उज्जैन में हाई अलर्ट, नगर निगम ने लाउडस्पीकर से कराई मुनादी, वीडियो वायरल