TMC Rebellion : TMC बागियों पर कीर्ति आजाद और कल्याण बनर्जी का हमला, “गद्दारों को जाना है तो जाएं, इस्तीफा देकर …”

TMC Rebel Crisis: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर मची भीषण रार अब खुलकर सड़कों पर आ गई है। सांसद कीर्ति आजाद और कल्याण बनर्जी ने बागी सुर अलाप रहे नेताओं को सरेआम 'गद्दार' कहते हुए पार्टी और विधायकी से इस्तीफा देने की खुली चुनौती दे डाली है। आखिर इस सियासी घमासान के पीछे कौन सा बड़ा गुप्त खेल चल रहा है? जानिए!

TMC Rebellion

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 9, 2026

TMC Rebellion : पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सियासी भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। टीएमसी के बागी सांसदों के दिल्ली में भाजपा के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर पहुंचने और पाला बदलने की अटकलों के बाद अब पार्टी के वफादार खेमे ने मोर्चा खोल दिया है। लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी और वरिष्ठ नेता कीर्ति आजाद ने बागी सांसदों, विशेष रूप से काकोली घोष दस्तीदार और शर्मिला सरकार पर बेहद तीखा हमला बोला है। दोनों नेताओं ने बागियों को ‘गद्दार’ करार देते हुए चुनौती दी है कि अगर उनमें जरा भी नैतिकता बची है, तो वे तुरंत अपने सांसद पद से इस्तीफा दें और भाजपा के टिकट पर नए सिरे से चुनाव लड़कर दिखाएं।

काकोली घोष दस्तीदार का फोन बंद, बैठकों का दौर जारी

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच, बागी गुट की कमान संभाल रहीं सांसद काकोली घोष दस्तीदार का फोन सुबह से ही लगातार बंद आ रहा है। उनके इस कदम से राजनीतिक गलियारों में सस्पेंस और गहरा गया है। यहां तक कि उनके करीबी सहयोगियों और समर्थकों के पास भी इस बात की कोई पुख्ता जानकारी नहीं है कि लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) से मुलाकात और अलग गुट को मान्यता देने को लेकर आगे की क्या रणनीति है।

स्पीकर दफ्तर को नहीं मिली कोई चिट्ठी: कल्याण बनर्जी

टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने बागी गुट के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि काकोली घोष दस्तीदार द्वारा लोकसभा स्पीकर को लिखी गई कथित चिट्ठी 24 घंटे बीत जाने के बाद भी अब तक सार्वजनिक नहीं हो सकी है। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय से भी यही जानकारी मिली है कि उनके पास ऐसी कोई आधिकारिक चिट्ठी नहीं पहुंची है। कल्याण बनर्जी ने तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह ये लोग गुपचुप तरीके से भूपेंद्र यादव के घर पहुंचे, उससे साफ है कि अब ममता बनर्जी नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इनके नए नेता बन चुके हैं।

दलबदल कानून से बचने के लिए भाजपा में शामिल होने की मजबूरी

कल्याण बनर्जी ने कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि बागी सांसदों के पास चाहे 20 का आंकड़ा हो या 21 का, अगर उन्हें संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत अयोग्य होने से बचना है, तो उन्हें किसी राजनीतिक दल में विलय करना ही होगा। चूंकि एनडीए (NDA) एक गठबंधन है, कोई राजनीतिक दल नहीं, इसलिए उन्हें अपनी सदस्यता बचाने के लिए सीधे तौर पर भाजपा की सदस्यता लेनी ही पड़ेगी। उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव के दौरान यही काकोली दस्तीदार ममता बनर्जी की तारीफ करते नहीं थकती थीं, और आज विकास न कर पाने का झूठा बहाना बना रही हैं।

आरजी कर कांड पर चुप्पी और चीफ व्हिप पद पर विवाद

बागी नेताओं को घेरते हुए कल्याण बनर्जी ने अतीत की घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बंगाल में आरजी कर अस्पताल की दुखद घटना हुई थी, तब शर्मिला सरकार और काकोली दस्तीदार जैसी महिला नेता कहां छिपी थीं? उस समय पार्टी की तरफ से उन्होंने आवाज उठाई थी, इन बागियों ने नहीं। उन्होंने आगे कहा कि जब काकोली दावा कर रही हैं कि उन्होंने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, तो वे संसद में चीफ व्हिप का पद या अलग व्यवस्था की मांग किस हैसियत से कर रही हैं?

“शेरनी जब घायल होती है, तो और ज्यादा खतरनाक हो जाती है”

कल्याण बनर्जी ने कड़े शब्दों में कहा कि बागी सांसद यह न भूलें कि ममता बनर्जी ने उन्हें शून्य से उठाकर पांच बार चुनाव जिताया है। संसद सत्र से लगातार गायब रहने के कारण ही काकोली को चीफ व्हिप के पद से मुक्त किया गया था। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह पार्टी किसी को विरासत में नहीं मिली है, बल्कि संघर्षों से उपजी है। उन्होंने कहा, “याद रखें, जब शेरनी घायल होती है, तो वह और भी ज्यादा खतरनाक हो जाती है। लोकसभा चुनाव में हमें सिर्फ 32 लाख वोटों के अंतर से पीछे धकेला गया है, हम हारे नहीं हैं। साल 2029 तक भाजपा का केंद्र और राज्य दोनों जगह से सफाया होना तय है।”

कीर्ति आजाद ने साधा निशाना: “गद्दारों को जाना है तो जाएं”

पार्टी के एक और वरिष्ठ नेता कीर्ति आजाद ने भी बागी गुट को आड़े हाथों लेते हुए इस पूरी बगावत को भाजपा की सोची-समझी साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि इन बागी सांसदों को ममता बनर्जी और ‘मां-माटी-मानुष’ के नारे के साथ गद्दारी करने पर शर्म आनी चाहिए। कीर्ति आजाद ने कहा कि काकोली घोष लगातार तीन बार चुनाव हारी थीं, इसके बावजूद ममता दीदी ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें संसद भेजा। अगर उन्हें कोई व्यक्तिगत या राजनीतिक तकलीफ थी, तो उन्हें पहले बताना चाहिए था, न कि भाजपा नेताओं के घर जाकर चाय की चुस्कियां लेनी चाहिए थीं। उन्होंने साफ कहा कि गद्दारों को जहां जाना है जाएं, लेकिन वे भविष्य में कभी भी तृणमूल कांग्रेस का नाम न लें।

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