Political Retirement : टीएमसी को दूसरा बड़ा झटका, पूर्व मंत्री मनीष गुप्ता ने राजनीति से लिया संन्यास

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। टीएमसी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मनीष गुप्ता ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। उनके इस फैसले से राजनीतिक हलकों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आखिर इसके पीछे की वजह क्या है, जानिए पूरी कहानी।

Political Retirement

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 16, 2026

Political Retirement :  पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर मची उठापटक थमने का नाम नहीं ले रही है। पार्टी से नेताओं के इस्तीफे का सिलसिला जारी है। हाल ही में राज्यसभा सांसद के इस्तीफे के बाद अब पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। दक्षिण कोलकाता तृणमूल कांग्रेस के चेयरमैन और ममता सरकार में पूर्व बिजली मंत्री रहे वरिष्ठ नेता मनीष गुप्ता ने न केवल पार्टी छोड़ने की घोषणा की है, बल्कि उन्होंने राजनीति से पूर्ण संन्यास लेने का भी ऐलान कर दिया है। उन्होंने ममता बनर्जी को अपना इस्तीफा पत्र भेजकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अब सक्रिय राजनीति का हिस्सा नहीं रहेंगे।

‘नजरअंदाज’ किए जाने का दर्द और बढ़ती उम्र का हवाला

85 वर्षीय मनीष गुप्ता ने अपने इस्तीफे के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण बताए हैं। उन्होंने खुलकर कहा कि तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बावजूद उन्हें पिछले पांच वर्षों से हाशिए पर रखा गया और पार्टी ने उनकी क्षमताओं का कोई उपयोग नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें राजनीति में आने या पार्टी छोड़ने का कोई अफसोस नहीं है, लेकिन बढ़ती उम्र अब एक बड़ा कारक बन गई है। उन्होंने कहा, “मैं अब 85 वर्ष का हो गया हूं और मैंने तय किया है कि अब मुझे राजनीति नहीं करनी है। मैं किसी गुटबाजी का हिस्सा नहीं हूं, मैंने पूरी तरह से राजनीति से विदा लेने का निर्णय लिया है।”

विवादास्पद इतिहास और ममता बनर्जी के साथ का सफर

मनीष गुप्ता का राजनीतिक करियर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 21 जुलाई 1993 को जब पश्चिम बंगाल में वाममोर्चा की सरकार थी, तब मनीष गुप्ता गृह सचिव के पद पर तैनात थे। उस दौरान युवा कांग्रेस के प्रदर्शनकारियों पर हुई फायरिंग की घटना ने उन्हें विवादों के घेरे में ला दिया था, जिसमें कई कार्यकर्ताओं की मौत हुई थी। इत्तेफाक की बात यह है कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस हर साल 21 जुलाई को उसी घटना की याद में ‘शहीद दिवस’ मनाती है। 2011 में जब राज्य की सत्ता बदली, तो मनीष गुप्ता का तृणमूल कांग्रेस में शामिल होना और बाद में मंत्री बनना राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा का विषय रहा था।

शुभेंदु अधिकारी की कार्यशैली के मुरीद हुए मनीष गुप्ता

इस्तीफे के साथ ही मनीष गुप्ता ने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर अपनी राय रखते हुए राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने शुभेंदु अधिकारी को एक ‘कुशल प्रशासक’ करार देते हुए कहा कि बंगाल को ऐसा योग्य मुख्यमंत्री पहले कभी नहीं मिला। गुप्ता ने उनकी कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि जिस तरह से वे राज्य के नियमों और विकास कार्यों को एक-एक कर कुशलतापूर्वक संभाल रहे हैं, उसे देखते हुए यह तय है कि बंगाल की प्रगति को अब कोई नहीं रोक सकता। एक दिग्गज नेता के मुख से विरोधी खेमे के मुख्यमंत्री की ऐसी तारीफ ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

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