West Bengal Politics: शताब्दी रॉय के बयान से गरमाई बंगाल की सियासत, ममता बनर्जी के कामकाज के तरीके पर उठाए सवाल

तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ सांसद शताब्दी रॉय ने पार्टी नेतृत्व से अपनी दूरियों पर पहली बार खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी का व्यवहार अब पहले जैसा नहीं रहा और पार्टी के भीतर संवाद की भारी कमी हो गई है। उनके इस विस्फोटक बयान के बाद बंगाल की राजनीति में आंतरिक घमासान तेज हो गया है।

West Bengal Politics

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 9, 2026

West Bengal Politics:  पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सड़कों पर आने लगी है। पार्टी की वरिष्ठ नेता, पूर्व अभिनेत्री शताब्दी रॉय ने पहली बार खुलकर उन कारणों पर बात की है, जिनकी वजह से उन्होंने कुछ समय पहले पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से दूरियां बना ली थी। उनका यह विस्फोटक बयान ऐसे नाजुक समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर सांगठनिक असंतोष, आपसी गुटबाजी और नेताओं की नाराजगी की खबरें लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं। एक हालिया मीडिया इंटरव्यू में शताब्दी रॉय ने पार्टी के पुराने दिनों को याद करते हुए वर्तमान कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिससे बंगाल के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

तृणमूल कांग्रेस में सांगठनिक असंतोष

बताते चले कि, शताब्दी रॉय ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत को याद करते हुए कहा कि जब उन्होंने राजनीति में कदम रखा था, तब पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सीधे कार्यकर्ताओं और जमीनी नेताओं से संवाद किया करती थी। उस दौर में टीएमसी का हर छोटा-बड़ा कार्यकर्ता अपनी बात और शिकायतें सीधे ‘दीदी’ के सामने रख सकता था, जहां तुरंत उन समस्याओं का न्यायसंगत समाधान भी निकाला जाता था। हालांकि, समय बदलने के साथ-साथ पार्टी के भीतर के हालात पूरी तरह बदल गए हैं। सांसद के अनुसार, अब तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच आपसी बातचीत और संवाद की भारी कमी महसूस होने लगी है, जो संगठन के लिए एक चिंताजनक संकेत है।

TMC के भीतर बढ़ती नाराजगी पर बड़ा बयान

आपको बता दे कि, सांसद शताब्दी रॉय ने साफ किया कि उन्होंने हमेशा ममता बनर्जी को अपना सर्वोच्च नेता माना है और उनका दिल से सम्मान करती हैं। इसके बावजूद, उन्होंने बेहद बेबाकी से इस कड़वी सच्चाई को स्वीकार किया कि एक दौर ऐसा भी आया जब उन्हें स्पष्ट रूप से महसूस हुआ कि ‘दीदी अब बदल चुकी हैं’। उनके मुताबिक, पहले जो सहजता, सरलता और अपनापन ममता बनर्जी के नेतृत्व में दिखाई देता था, वह धीरे-धीरे खत्म होता चला गया। नेतृत्व के इसी बदलते रुख के कारण पार्टी के कई पुराने वफादार नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के मन में गहरी नाराजगी और उपेक्षा की भावना पैदा हुई, जिसने आगे चलकर आंतरिक कलह का रूप ले लिया।

पार्टी की मजबूती के लिए आंतरिक संवाद को बताया जरूरी

एक इंटरव्यू के दौरान टीएमसी सांसद ने यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया कि उनकी यह नाराजगी या दूरी किसी व्यक्तिगत हित या स्वार्थ की वजह से नहीं थी। उन्होंने कहा कि वह हमेशा से दल की मजबूती और संगठन के कल्याण के बारे में ही सोचती रही हैं। शताब्दी रॉय के अनुसार, किसी भी राजनीतिक संगठन को लंबे समय तक शक्तिशाली बनाए रखने के लिए उसके शीर्ष नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच अटूट और निरंतर संवाद होना अनिवार्य है। जब भी किसी दल के भीतर यह वैचारिक बातचीत कमजोर पड़ती है, तो नेताओं के बीच गलतफहमियां बढ़ने लगती हैं, जिसका सीधा और नकारात्मक असर पूरे सांगठनिक ढांचे पर दिखाई देने लगता है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़

हालांकि, अपनी चिंताओं को सामने रखने के बाद शताब्दी रॉय ने यह भी जोड़ा कि उनकी यह वैचारिक लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है। उनका दृढ़ विश्वास है कि पार्टी को मजबूत बनाने के लिए सभी वरिष्ठ नेताओं और नए कार्यकर्ताओं को एक साथ लेकर चलना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में संगठन के भीतर आंतरिक लोकतंत्र मजबूत होगा और सबकी बात सुनी जाएगी। चूंकि शताब्दी रॉय टीएमसी का एक बेहद लोकप्रिय और पुराना चेहरा हैं, इसलिए उनके इस बयान के बाद विपक्ष को ममता सरकार को घेरने का नया मौका मिल गया है। विपक्षी दल इसे टीएमसी के पतन और आंतरिक अंतर्विरोध का प्रतीक बता रहे हैं, जबकि पार्टी समर्थकों का तर्क है कि एक लोकतांत्रिक संगठन में अलग-अलग राय होना स्वाभाविक है।