TMC Split : ममता बनर्जी को लगा बड़ा झटका, टीएमसी सांसद सयानी घोष भी हुईं अब बागी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल! ममता बनर्जी की बेहद करीबी और तेजतर्रार युवा सांसद सयानी घोष ने भी अब बागी रुख अख्तियार कर लिया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखने वाले २० सांसदों की सूची में सयानी का नाम आने के बाद हर कोई हैरान है। आखिर क्या है इस अचानक बगावत के पीछे की असली इनसाइड स्टोरी?

TMC Split

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 10, 2026

TMC Split : पश्चिम बंगाल की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य में सत्ता परिवर्तन होने के बाद अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) ताश के पत्तों की तरह बिखरती हुई नजर आ रही है। अंदरूनी सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बेहद करीबी और टीएमसी की फायरब्रांड युवा नेता सयानी घोष ने भी अब बगावत का बिगुल फूंक दिया है।

बताया जा रहा है कि पार्टी के इस बागी गुट में कुल 20 लोकसभा सांसद शामिल हैं, जो ममता बनर्जी का साथ छोड़कर अलग राह पकड़ चुके हैं। इन बागी चेहरों में सयानी घोष के साथ-साथ पार्टी के बेहद वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय का नाम भी प्रमुखता से सामने आ रहा है। आपको बता दें कि सयानी घोष बंगाल के हाई-प्रोफाइल जादवपुर लोकसभा क्षेत्र से टीएमसी की मौजूदा सांसद हैं और उनका बागी होना पार्टी के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।

पंद्रह साल का मजबूत किला ढहने के बाद राजनीतिक अस्तित्व का गहरा संकट

पश्चिम बंगाल की सत्ता में लगातार 15 वर्षों तक एकछत्र राज करने के बाद, सत्ता गंवाते ही ममता बनर्जी इस समय अपने राजनीतिक जीवन के सबसे कठिन और बुरे दौर से गुजर रही हैं। वर्तमान परिस्थितियां उनके सामने न केवल पार्टी को एकजुट रखने की हैं, बल्कि पूरे संगठन के अस्तित्व को बचाने की एक बहुत बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो गई हैं।

तृणमूल कांग्रेस के भीतर मचे इस घमासान और बगावत के बाद जो नेता कभी ममता बनर्जी के दाहिने हाथ माने जाते थे और उनके बेहद वफादार थे, वे भी अब मुश्किल वक्त में उनका साथ छोड़ रहे हैं। चारों तरफ से उठ रहे इन विरोधी सुरों और अपनों की बेरुखी ने ममता बनर्जी को पूरी तरह से अलग-थलग और अकेला कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इस समय स्थिति ऐसी हो गई है कि खुद पार्टी के वजूद पर ही संकट के काले बादल मंडराने लगे हैं।

अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद शुरू हुआ आंतरिक असंतोष 

तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष और विद्रोह का यह लंबा दौर ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के निष्कासन के बाद से शुरू हुआ था। पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने के चलते ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन दोनों नेताओं को दल से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। लेकिन ममता बनर्जी का यह फैसला पार्टी पर ही भारी पड़ गया। निष्कासन के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने बागी तेवर अपना लिए और वे अपने साथ टीएमसी के 58 विधायकों का एक बड़ा धड़ा लेकर अलग हो गए और विधानसभा में विपक्ष के मुख्य नेता बन गए।

हालांकि, तकनीकी रूप से ये सभी विधायक अभी भी टीएमसी का ही हिस्सा बने हुए हैं, लेकिन उनका दिल और समर्थन अब पार्टी के साथ नहीं है। विधायकों की इस बड़ी सेंधमारी के बाद अब बारी सांसदों की थी, जिन्होंने दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

केंद्रीय मंत्री के आवास पर सीक्रेट मीटिंग और अलग गुट का बड़ा दावा

विधायकों की बगावत के बाद संसद में भी टीएमसी को बड़ा झटका लगा, जब बीते दिनों टीएमसी की बेहद वरिष्ठ सांसद काकोली घोष की अगुवाई में तृणमूल के कई दिग्गज सासंदों ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के निवास स्थान पर एक बेहद महत्वपूर्ण और गोपनीय बैठक की। इस हाई-प्रोफाइल बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी विशेष रूप से वहां मौजूद रहे।

इस बैठक के तुरंत बाद बागी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और उन्हें एक औपचारिक पत्र सौंपा। इस पत्र पर टीएमसी के 20 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर मौजूद थे। काकोली घोष ने संसद में अपने इस नए धड़े को एक अलग गुट के रूप में मान्यता देने का बड़ा दावा पेश किया है। गौरतलब है कि लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 28 सांसद हैं, जिनमें से 20 का बागी होना ममता के लिए बहुत बड़ी तबाही जैसा है।

राज्यसभा के दो दिग्गज सांसदों के इस्तीफे ने बढ़ाईं मुश्किलें

लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में भी ममता बनर्जी को लगातार एक के बाद एक दो बड़े झटके लगे हैं। सोमवार, 8 जून को टीएमसी के बेहद वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा उस नाजुक वक्त पर हुआ जब टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी दिल्ली में मौजूद थीं और विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा ले रही थीं।

सुखेंदु शेखर राय ने अपने इस्तीफे की एक प्रति सीधे ममता बनर्जी को भी भेजी, जो विपक्षी एकता के बीच उनके लिए एक बहुत बड़ा व्यक्तिगत झटका साबित हुआ। अभी टीएमसी इस झटके से संभल भी नहीं पाई थी कि इसके ठीक दो दिन बाद यानी बुधवार, 10 जून को एक और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी टीएमसी छोड़ने का आधिकारिक एलान कर दिया।

टीएमसी के लगातार कमजोर होने का संकेत

विपक्षी खेमे में हलचल तेज करते हुए सुष्मिता देव ने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देने के तुरंत बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा से मुलाकात की, जिससे उनके अगले राजनीतिक कदम के साफ संकेत मिल रहे हैं। ज्ञात हो कि सुष्मिता देव साल 2021 में कांग्रेस का हाथ छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई थीं और ममता ने उन्हें पूर्वोत्तर में पार्टी विस्तार की बड़ी जिम्मेदारी दी थी।

इन दोनों कद्दावर राज्यसभा सासंदों का महज दो दिनों के भीतर इस्तीफा दे देना यह साफ तौर पर दर्शाता है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी ममता बनर्जी की पकड़ ढीली हो चुकी है और उनकी टीएमसी लगातार अंदर से खोखली और कमजोर होती जा रही है। बंगाल से लेकर दिल्ली तक पार्टी का यह बिखराव फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है।

Read More :  UP Politics: 15 दिन बाद लौटे बृजभूषण शरण सिंह! PM मोदी की तारीफ में पढ़े कसीदे, विपक्षी नेताओं को लिया निशाने पर