TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस के 19 सांसदों की बगावत, अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में 19 सांसदों की बड़ी बगावत के बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने मांग की है कि संसद में केवल आधिकारिक टीएमसी को ही मान्यता दी जाए और किसी भी बागी या अलग गुट को कोई संसदीय दर्जा या सुविधा न दी जाए.

TMC Crisis

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 14, 2026

TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे आंतरिक घमासान और 19 सांसदों की कथित बगावत के बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने रविवार को एक बड़ा कदम उठाया है. अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक औपचारिक पत्र लिखकर मांग की है कि संसद के भीतर टीएमसी को केवल एक ही राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी जाए. उन्होंने जोर देकर कहा कि सदन में पार्टी का प्रतिनिधित्व सिर्फ और सिर्फ उसके सही तरीके से अधिकृत नेता और तय व्हिप (सचेतक) के माध्यम से ही होना चाहिए, न कि किसी अलग धड़े के जरिए.

बागी गुट को मान्यता देने का विरोध

बताते चले कि, लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए इस पत्र में अभिषेक बनर्जी ने अपनी ही पार्टी के बागी सांसदों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने स्पीकर ओम बिरला से स्पष्ट शब्दों में अनुरोध किया है कि संसद के भीतर किसी भी तरह के कथित अलग ग्रुप या असंतुष्ट गुट को कोई आधिकारिक पहचान, विशेष स्टेटस या संसदीय सुविधाएं देने से साफ इनकार किया जाए. टीएमसी नेतृत्व की इस कोशिश का सीधा मकसद संसद में बगावती सुर अपनाने वाले सांसदों के मंसूबों पर पानी फेरना और पार्टी की कमान को अपने हाथ में सुरक्षित रखना है.

सुनवाई का मौका देने की गुहार

अपनी अर्जी में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से एक और महत्वपूर्ण अपील की है. उन्होंने अनुरोध किया है कि भविष्य में इस बगावत या पार्टी के दर्जे से जुड़े किसी भी विषय पर कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले वह आधिकारिक तृणमूल कांग्रेस को अपना पक्ष रखने का पूरा और उचित मौका दें. पार्टी का मानना है कि जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ हो सकता है, इसलिए ‘विधिवत अधिकृत नेता’ के माध्यम से ही दल की बात सुनी जानी चाहिए.

महाराष्ट्र प्रकरण का हवाला

अभिषेक बनर्जी का यह पत्र लेकर टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष सीधे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के आवास पर पहुंचे और उन्हें यह आवेदन सौंपा. इस मौके पर मीडिया से बात करते हुए कीर्ति आजाद ने कानूनी और संवैधानिक स्थिति को स्पष्ट किया. उन्होंने महाराष्ट्र के पिछले राजनीतिक घटनाक्रम का उदाहरण देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच के फैसले और संविधान की 10वीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के आर्टिकल 4 के मुताबिक, अब मूल पार्टी में किसी भी तरह के विभाजन (Split) को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती.

नियमों के तहत कार्रवाई की उम्मीद

पत्र सौंपने के बाद कीर्ति आजाद ने विश्वास जताया कि लोकसभा अध्यक्ष इस संवेदनशील मामले में स्थापित नियमों और संवैधानिक प्रावधानों के तहत ही कोई कदम उठाएंगे. उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र में जो हुआ, वह पूरी तरह गलत था. हम इसी सिलसिले में अपनी अर्जी लेकर यहां आए हैं. हमें पूरा भरोसा है कि स्पीकर साहब देश के कानून और संसद की नियमावली के मुताबिक ही काम करेंगे, जैसा कि वे अब तक करते आए हैं.” अब देखना यह है कि 19 सांसदों की इस बड़ी बगावत के बाद लोकसभा सचिवालय इस मामले पर क्या रुख अपनाता है.