मेडिकल जांचों और दवाइयों की कीमतों में भारी फर्क, प्रदेश में चार गुना तक अंतर, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

इंदौर  एमपी में अलग अलग जगहों पर मेडिकल जांचों और दवाइयों की कीमतों में जबर्दस्त अंतर है। एक ही फार्मूले की दवाइयों के अलग अलग कंपनियां के रेट में 4 गुना तक अंतर देखा जा रहा है। कुछ ऐसा ही हाल मेडिकल जांचों के रेट में भी है। अलग अलग लैब और अस्पतालों में एक ही जांच के अलग-अलग रेट वसूले जा रहे हैं। इतना ही नहीं, कई डॉक्टर दूसरे अस्पताल या लैब की रिपोर्ट को नहीं मानते हैं और नए सिरे से जांच कराते हैं। कीमतों में इस असमानता को लेकर इंदौर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की

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Published On :

अप्रैल 15, 2026

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इंदौर 

एमपी में अलग अलग जगहों पर मेडिकल जांचों और दवाइयों की कीमतों में जबर्दस्त अंतर है। एक ही फार्मूले की दवाइयों के अलग अलग कंपनियां के रेट में 4 गुना तक अंतर देखा जा रहा है। कुछ ऐसा ही हाल मेडिकल जांचों के रेट में भी है। अलग अलग लैब और अस्पतालों में एक ही जांच के अलग-अलग रेट वसूले जा रहे हैं। इतना ही नहीं, कई डॉक्टर दूसरे अस्पताल या लैब की रिपोर्ट को नहीं मानते हैं और नए सिरे से जांच कराते हैं। कीमतों में इस असमानता को लेकर इंदौर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका पर बुधवार को सुनवाई होने की संभावना है।

वरिष्ठ अभिभाषक विजय कुमार आसुदानी के जरिए दायर याचिका में एक ही फार्मूले की दवाइयों की कीमतों और लैब की जांच फीस में भारी अंतर को समाप्त करने का मुद्दा उठाया गया है।

याचिका में बताया गया है कि एक ही तरह की दवाइयों की कीमतों में अलग-अलग कंपनियों में तीन से चार गुना तक अंतर है। उदाहरण के तौर पर बुखार की पैरासिटामॉल की एक कंपनी की टेबलेट 5 रुपए में उपलब्ध है, जबकि अन्य कंपनियों की कीमत इससे कई गुना अधिक है। ऐसी कई दवाइयों की लिस्ट और उनके अलग- अलग रेट की जानकारी कोर्ट के समक्ष रखी गई है।

मेडिकल जांच के रेट में असमानता को लेकर बताया गया है कि विभिन्न लैब और निजी अस्पताल एक ही जांच के लिए अलग-अलग राशि वसूलते हैं। अगर कोई मरीज सस्ती लैब में जांच कराता है तो कई डॉक्टर उस रिपोर्ट को मान्यता ही नहीं देते हैं और नई जांच कराने को कहते हैं।

सरकार ने करीब दस साल पहले इस मामले में कानून बनाया, लेकिन इसका नोटिफिकेशन आज तक जारी नहीं किया

याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि जनता के साथ हो रही इस असमान वसूली पर रोक लगाई जाए और दवाइयों व मेडिकल जांच के रेट एक समान किए जाएं। सरकार ने करीब दस साल पहले इस मामले में कानून बनाया, लेकिन इसका नोटिफिकेशन आज तक जारी नहीं किया है।

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ में इस याचिका पर सुनवाई की संभावना

इंदौर हाईकोर्ट में आमजन से संबंधित इस अहम जनहित याचिका पर आज ही सुनवाई हो सकती है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ में इस याचिका पर सुनवाई की संभावना है।

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