आशा भोंसले को मोहन यादव सरकार की बड़ी श्रद्धांजलि, मध्य प्रदेश सरकार शुरू करेगी राष्ट्रीय सम्मान

भोपाल भारतीय संगीत के स्वर्णिम युग की एक और महान आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई है। रविवार, 12 अप्रैल 2026 को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में 92 वर्ष की आयु में सुर सम्राज्ञी आशा भोंसले का निधन हो गया। मध्य प्रदेश सरकार ने इस महान हस्ती की विरासत को संजोने और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देने के लिए उनके नाम पर एक विशेष 'राष्ट्रीय पुरस्कार' शुरू करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। लता मंगेशकर के बाद अब आशा भोंसले के नाम पर सम्मान मध्य प्रदेश के संस्कृति और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने पुष्टि की है कि

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Published On :

अप्रैल 15, 2026

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भोपाल
भारतीय संगीत के स्वर्णिम युग की एक और महान आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई है। रविवार, 12 अप्रैल 2026 को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में 92 वर्ष की आयु में सुर सम्राज्ञी आशा भोंसले का निधन हो गया। मध्य प्रदेश सरकार ने इस महान हस्ती की विरासत को संजोने और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देने के लिए उनके नाम पर एक विशेष 'राष्ट्रीय पुरस्कार' शुरू करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।

लता मंगेशकर के बाद अब आशा भोंसले के नाम पर सम्मान
मध्य प्रदेश के संस्कृति और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने पुष्टि की है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ इस प्रस्ताव पर अंतिम चर्चा के बाद पुरस्कार की रूपरेखा तय की जाएगी। मंत्री लोधी के अनुसार, 'राज्य में पहले से ही लता मंगेशकर के नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया जाता है। अब उनकी छोटी बहन और संगीत जगत की दिग्गज आशा भोंसले के नाम पर पुरस्कार स्थापित करना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होगा।' प्रस्तावित आशा भोंसले एक्सीलेंस अवॉर्ड का उद्देश्य न केवल स्थापित कलाकारों को सम्मानित करना होगा, बल्कि इसके जरिए उभरते हुए गायकों को नकद पुरस्कार, प्रदर्शन के अवसर और मेंटरशिप भी प्रदान की जाएगी। यह कदम मध्य प्रदेश सरकार के उस अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत राज्य की सांस्कृतिक विरासत और संगीत प्रतिभाओं को वैश्विक मंच दिया जा रहा है।

आठ दशकों का सफर और 12,000 गीतों का जादू
आशा भोंसले का संगीत सफर किसी चमत्कार से कम नहीं रहा। 1943 में मात्र 10 साल की उम्र से गायकी शुरू करने वाली आशा ताई ने आठ दशकों के करियर में कई भाषाओं में 12,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए, जिसके लिए उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। उनकी बहुमुखी आवाज ने फिल्मी गीतों से लेकर गजल, भजन और पॉप संगीत तक, हर विधा को जीवंत किया। साल 2000 में उन्हें दादा साहब फाल्के और 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।

आशा भोंसले केवल एक गायिका नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की एक जीवंत संस्था थीं। उनके नाम पर पुरस्कार शुरू करना मध्य प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। यह सम्मान न केवल उनकी यादों को संजोएगा, बल्कि संगीत की दुनिया में नए सितारों को चमकने का मौका देगा।

धर्मेंद्र सिंह लोधी, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री, मध्य प्रदेश
अधिकारियों का मानना है कि यह पुरस्कार आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बनेगा। जिस तरह आशा ताई ने अपनी मेहनत से एक अलग पहचान बनाई, यह पुरस्कार भी संगीत की नई पौध को उसी ऊंचाई तक पहुंचने का हौसला देगा। हालांकि पुरस्कार की शुरुआत की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन इस पहल ने देशभर के संगीत प्रेमियों के बीच एक सकारात्मक लहर पैदा कर दी है।

 

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