मध्यप्रदेश राज्य सेवा परीक्षा में 26 अप्रैल 2026 से थ्री-लेयर सिक्योरिटी सिस्टम, यूपीएससी की तर्ज पर सुधार

इंदौर  मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग अपनी आगामी परीक्षाओं के लिए एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है। आगामी 26 अप्रैल को आयोजित होने वाली राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 से आयोग थ्री लेयर सिक्योरिटी सिस्टम को लागू करने की तैयारी में है। यूपीएससी की तर्ज पर अपनाई जा रही इस व्यवस्था के लिए आयोग ने कमर कस ली है। पूर्व में टेंडर प्रक्रिया निरस्त होने के बाद अब दोबारा टेंडर के माध्यम से इसे अमलीजामा पहनाया जा रहा है। आयोग की योजना है कि इस महत्वपूर्ण परीक्षा के बाद भविष्य में होने वाली सभी परीक्षाओं में इसी त्रि-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली

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Published On :

जनवरी 26, 2026

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इंदौर 

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग अपनी आगामी परीक्षाओं के लिए एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है। आगामी 26 अप्रैल को आयोजित होने वाली राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 से आयोग थ्री लेयर सिक्योरिटी सिस्टम को लागू करने की तैयारी में है।

यूपीएससी की तर्ज पर अपनाई जा रही इस व्यवस्था के लिए आयोग ने कमर कस ली है। पूर्व में टेंडर प्रक्रिया निरस्त होने के बाद अब दोबारा टेंडर के माध्यम से इसे अमलीजामा पहनाया जा रहा है। आयोग की योजना है कि इस महत्वपूर्ण परीक्षा के बाद भविष्य में होने वाली सभी परीक्षाओं में इसी त्रि-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली का पालन किया जाए।

व्यापक स्तर पर अभ्यर्थियों की जांच
आगामी प्रारंभिक परीक्षा में प्रदेश भर से लगभग डेढ़ लाख से अधिक अभ्यर्थियों के शामिल होने का अनुमान है। इतनी बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों की गहन जांच और स्कैनिंग के लिए इस अत्याधुनिक सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। पिछले कुछ समय में देश की अन्य बड़ी परीक्षाओं जैसे नीट, जेईई और व्यापम की परीक्षाओं में जिस तरह से फर्जी परीक्षार्थियों और धांधली के मामले सामने आए हैं, उन्हें देखते हुए एमपीपीएससी ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने का फैसला लिया है। यह कदम परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

पारदर्शी व्यवस्था की ओर कदम
एमपीपीएससी के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी डॉ. रवींद्र पंचभाई के अनुसार प्रशासन का पूरा प्रयास है कि राज्य सेवा प्री परीक्षा से ही इस नई व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाए। वर्तमान में इस परियोजना पर तेजी से कार्य चल रहा है। हालांकि एमपीपीएससी की परीक्षाओं में अब तक डमी कैंडिडेट या फर्जीवाड़े के मामले बहुत कम देखे गए हैं, लेकिन नकल और अन्य अवांछित गतिविधियों को पूरी तरह रोकने के लिए इस सख्त प्रणाली की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इस बदलाव के बाद इंदौर सहित पूरे प्रदेश के केंद्रों पर सुरक्षा का ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा। 

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