The Kerala Story 2: फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में केरल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए फिल्म की रिलीज पर अस्थायी रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब तक फिल्म की रिलीज को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक इसे सिनेमाघरों में प्रदर्शित नहीं किया जाए।
यह फैसला तीन अलग-अलग याचिकाओं की सुनवाई के दौरान लिया गया। याचिकाकर्ताओं ने फिल्म के कंटेंट, उसके टाइटल और प्रमोशनल सामग्री पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उनका कहना है कि फिल्म में केरल को गलत और नकारात्मक रूप में पेश किया गया है, जिससे सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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CBFC सर्टिफिकेट पर भी उठे सवाल

याचिकाओं में फिल्म के निर्माताओं को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से मिले प्रमाणपत्र को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि जिस तरह की सामग्री फिल्म में दिखाई गई है, वह संवेदनशील है और इससे राज्य की छवि प्रभावित हो सकती है।
एक याचिका में यह भी मांग की गई है कि फिल्म के शीर्षक से ‘केरल’ शब्द हटाया जाए, क्योंकि यह राज्य को एक विशेष संदर्भ में प्रस्तुत करता है, जिससे लोगों के बीच गलत संदेश जा सकता है।
अदालत की टिप्पणी और चेतावनी
इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने कहा कि यदि फिल्म निर्माता बहस के लिए और समय चाहते हैं तो अदालत मामले की सुनवाई आगे भी जारी रख सकती है। हालांकि उन्होंने साफ तौर पर निर्देश दिया कि जब तक सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, फिल्म की रिलीज नहीं होनी चाहिए।
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वह फिल्म की सामग्री को स्वयं देखने के बाद ही अंतिम राय बनाएगी। इससे पहले मंगलवार को अदालत ने फिल्म देखने की इच्छा भी जताई थी।
ट्रेलर के बाद बढ़ा विवाद
फिल्म का ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ दृश्यों को लेकर यूजर्स ने कड़ा विरोध जताया। खासतौर पर एक सीन में जबरन एक महिला को प्रतिबंधित मांस खिलाने का दृश्य दिखाया गया है, जिस पर आपत्ति दर्ज की गई।
फिल्म का निर्माण विपुल अमृतलाल शाह के प्रोडक्शन हाउस के तहत किया गया है। निर्माताओं ने अदालत में कहा कि फिल्म को CBFC की मंजूरी मिल चुकी है और सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की गई हैं। इसके बावजूद याचिकाकर्ताओं ने प्रमाणन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।
सामाजिक सौहार्द पर चिंता
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फिल्म का टाइटल और प्रचार सामग्री ऐसे विषयों को उजागर करती है जो समाज में विभाजन और भाईचारे को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उनका तर्क है कि यदि फिल्म रिलीज होती है तो राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।
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