अभ्युदय जैन केस: हाईकोर्ट ने मां के खिलाफ एफआईआर की निरस्त, 360 दिन बाद अलका जैन को राहत

 ग्वालियर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने गुना के बहुचर्चित अभ्युदय जैन मृत्यु प्रकरण में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी मां अलका जैन के खिलाफ दर्ज एफआईआर और समस्त आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की कि केवल अनुमानों और संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति के विरुद्ध मुकदमा चलाना न्याय का उल्लंघन है। गौरतलब है कि 14 फरवरी 2025 को 14 वर्षीय अभ्युदय जैन का शव घर के बाथरूम में मिला था। घटना के बाद पुलिस ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर उसकी मां अलका जैन को संदेह के दायरे

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Published On :

फ़रवरी 25, 2026

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 ग्वालियर 

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने गुना के बहुचर्चित अभ्युदय जैन मृत्यु प्रकरण में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी मां अलका जैन के खिलाफ दर्ज एफआईआर और समस्त आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की कि केवल अनुमानों और संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति के विरुद्ध मुकदमा चलाना न्याय का उल्लंघन है।

गौरतलब है कि 14 फरवरी 2025 को 14 वर्षीय अभ्युदय जैन का शव घर के बाथरूम में मिला था। घटना के बाद पुलिस ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर उसकी मां अलका जैन को संदेह के दायरे में लिया। 22 फरवरी को कोतवाली थाना में अपराध क्रमांक 115/2025 दर्ज किया गया और 8 मार्च को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। करीब 98 दिन न्यायिक हिरासत में रहने के बाद 17 जून को उन्हें जमानत मिली, लेकिन मामला अदालत में विचाराधीन रहा।

इस बीच अभ्युदय के पिता अनुपम जैन ने पुलिस जांच पर असंतोष जताया। उनके आग्रह पर आईजी के निर्देश पर शिवपुरी डीएसपी अवनीत शर्मा के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया। एसआईटी ने भोपाल स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों से मेडिको-लीगल राय प्राप्त की। रिपोर्ट में मृत्यु का कारण फांसी पर लटकना बताया गया। इसके आधार पर एसआईटी ने 5 मई को अदालत में क्लोजर रिपोर्ट पेश कर अलका जैन को दोषमुक्त माना।

हालांकि 9 मई 2025 को गुना की सीजेएम कोर्ट ने एसआईटी की रिपोर्ट खारिज कर दी और स्वयं संज्ञान लेते हुए हत्या तथा साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मुकदमा चलाने का आदेश दिया। इसी आदेश को चुनौती देते हुए अलका जैन ने हाईकोर्ट का रुख किया। 9 फरवरी को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।

 सुनाए गए निर्णय में हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत के निष्कर्ष अनुमानों और अटकलों पर आधारित थे, न कि ठोस और विधिसम्मत साक्ष्यों पर। अदालत ने माना कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में याचिकाकर्ता को दोषमुक्त किए जाने के बावजूद कार्यवाही जारी रखना विधि का दुरुपयोग होगा।

न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 103 और 238 के तहत 9 मई 2025 के सीजेएम आदेश को रद्द करते हुए कोतवाली गुना में दर्ज अपराध से संबंधित सभी आगे की कार्यवाही समाप्त कर दी। करीब 360 दिनों तक हत्या के आरोपों और सामाजिक-मानसिक दबाव का सामना करने के बाद यह फैसला अलका जैन के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

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