हेलीकॉप्टर से दागी जाने वाली ध्रुवास्त्र मिसाइल से भारतीय सेना को मिलेगा नया दम

नई दिल्ली डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) द्वारा विकसित ध्रुवास्त्र मिसाइल भारतीय सेना के बेड़े में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह हेलीकॉप्टर से दागी जाने वाली नाग एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) का आधुनिक संस्करण है, जिसे पहले हेलिना (HELINA) के नाम से जाना जाता था। यह मिसाइल न केवल भारत की आत्मनिर्भर भारत मुहिम को मजबूती प्रदान करेगी, बल्कि युद्ध के मैदान में खासकर ऊंचे पहाड़ी इलाकों में भारतीय वायुसेना और थल सेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी। रुवास्त्र की क्या-क्या खूबियां? ध्रुवास्त्र भारत के इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम का हिस्सा

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Published On :

अप्रैल 12, 2026

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नई दिल्ली

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) द्वारा विकसित ध्रुवास्त्र मिसाइल भारतीय सेना के बेड़े में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह हेलीकॉप्टर से दागी जाने वाली नाग एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) का आधुनिक संस्करण है, जिसे पहले हेलिना (HELINA) के नाम से जाना जाता था। यह मिसाइल न केवल भारत की आत्मनिर्भर भारत मुहिम को मजबूती प्रदान करेगी, बल्कि युद्ध के मैदान में खासकर ऊंचे पहाड़ी इलाकों में भारतीय वायुसेना और थल सेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी।

रुवास्त्र की क्या-क्या खूबियां?
ध्रुवास्त्र भारत के इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम का हिस्सा है। इसकी परिकल्पना 1980 के दशक में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में की गई थी। नाग मिसाइल परिवार के तहत अब तक जमीन से दागी जाने वाली नाग, कैरियर (NAMICA) और मैन-पोर्टेबल (MPATGM) जैसे कई संस्करण तैयार किए जा चुके हैं। ध्रुवास्त्र इसी कड़ी का हवाई संस्करण है।

ध्रुवास्त्र की सबसे बड़ी ताकत इसकी थर्ड-जनरेशन फायर एंड फॉरगेट प्रणाली है। एक बार लक्ष्य पर लॉक होने के बाद, मिसाइल ऑटोमैटिक रूप से उसे ट्रैक कर नष्ट कर देती है। यह मिसाइल खराब मौसम और रात के अंधेरे में भी दुश्मन के टैंकों की गर्मी को पहचान कर उन्हें सटीक निशाना बना सकती है।

आधुनिक टैंकों का ऊपरी हिस्सा सबसे कमजोर होता है। ध्रुवास्त्र पहले ऊंचाई पर जाती है और फिर सीधे ऊपर से हमला करती है, जिससे भारी से भारी बख्तरबंद वाहन भी नष्ट हो जाते हैं। इसकी मारक दूरी 7 किलोमीटर तक है। 43 किलोग्राम वजनी यह मिसाइल 800 मिलीमीटर मोटी स्टील प्लेट को भेदने की क्षमता रखती है।

स्वदेशी हेलीकॉप्टरों की ताकत
ध्रुवास्त्र को विशेष रूप से लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए तैयार किया गया है। इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित रुद्र और प्रचंड जैसे अटैक हेलीकॉप्टरों से दागा जा सकता है। हाल ही में सरकार ने 156 प्रचंड हेलीकॉप्टरों के ऑर्डर दिए हैं। इन हेलीकॉप्टरों पर ध्रुवास्त्र की तैनाती से भारतीय सेना को सीमा पर दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों के खिलाफ एक निर्णायक बढ़त मिलेगी।

सरकार ने सितंबर 2023 में लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत से 200 से अधिक ध्रुवास्त्र मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी थी। एक मिसाइल की लागत 1 करोड़ रुपये से भी कम रहने का अनुमान है। इसकी तैनाती के बाद भारत को रूस या यूरोप से कोंकुर्स और मिलान जैसी पुरानी मिसाइलें आयात करने की जरूरत कम हो जाएगी।

ध्रुवास्त्र की सफलता के बाद DRDO अब SANT पर काम कर रहा है। इसकी रेंज और भी अधिक होगी और इसमें मिलीमीटर-वेव रडार जैसे और भी आधुनिक सेंसर लगे होंगे।

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