लाड़ली बहनों के लिए सरकार का बड़ा ऐलान, मिलेगा यह खास तोहफा, पूरी डिटेल जानें

भोपाल मध्यप्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए मोहन सरकार एक और बड़ी सौगात की तैयारी में है। अब केवल हर महीने आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि महिलाओं को स्थायी रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया जा रहा है। सरकार की नई योजना के तहत इच्छुक लाड़ली बहनों को गाय-भैंस पालन के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी, ताकि वे डेयरी व्यवसाय से जुड़कर अपनी आय बढ़ा सकें। सूत्रों के मुताबिक, योजना की शुरुआत गोवर्धन पूजा से की जा सकती है। इस योजना के तहत सभी महिलाओं के लिए पशुपालन अनिवार्य नहीं होगा, बल्कि खेती-किसानी और पशुपालन में

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Published On :

अप्रैल 19, 2026

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भोपाल
मध्यप्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए मोहन सरकार एक और बड़ी सौगात की तैयारी में है। अब केवल हर महीने आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि महिलाओं को स्थायी रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया जा रहा है। सरकार की नई योजना के तहत इच्छुक लाड़ली बहनों को गाय-भैंस पालन के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी, ताकि वे डेयरी व्यवसाय से जुड़कर अपनी आय बढ़ा सकें।

सूत्रों के मुताबिक, योजना की शुरुआत गोवर्धन पूजा से की जा सकती है। इस योजना के तहत सभी महिलाओं के लिए पशुपालन अनिवार्य नहीं होगा, बल्कि खेती-किसानी और पशुपालन में रुचि रखने वाली महिलाएं ही इसका लाभ ले सकेंगी। सरकार पशुधन खरीदने के लिए आर्थिक मदद देगी, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें।

फिलहाल प्रदेश की करीब 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों को हर महीने 1500 रुपए की राशि दी जा रही है, जिस पर सरकार को लगभग 1836 करोड़ रुपए का मासिक भार उठाना पड़ रहा है। विपक्ष लगातार इस राशि को अपर्याप्त बताते हुए 3000 रुपए प्रतिमाह देने के वादे की याद दिला रहा है। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि भविष्य में इस राशि को बढ़ाकर 3000 रुपए तक ले जाने की योजना है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि सरकार का उद्देश्य केवल नकद सहायता देना नहीं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। इसी सोच के तहत नवंबर 2026 से महिलाओं को विभिन्न आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं।

महिला आधारित योजनाओं की समीक्षा के लिए सरकार ने मंत्री निर्मला भूरिया की अध्यक्षता में एक समिति भी बनाई है। इस समिति में मंत्री कृष्णा गौर, प्रतिमा बागरी, राधा सिंह और संपतिया उइके को शामिल किया गया है। समिति इस बात पर काम कर रही है कि महिलाओं को मासिक किस्त के बजाय एकमुश्त सहायता देकर स्थायी काम-धंधे से कैसे जोड़ा जाए, ताकि उनकी आमदनी कई गुना बढ़ सके।

सरकार योजना का नाम बदलने पर भी विचार कर रही है। संभावना है कि इसे प्रदेश की किसी ऐसी वीरांगना के नाम पर रखा जाए, जिन्होंने समाज और जनकल्याण के लिए साहसिक कार्य किए हों। हाल ही में नर्मदापुरम के सिवनी मालवा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा था कि प्रदेश की 1.25 करोड़ से अधिक लाड़ली बहनों को अब तक 55 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की सहायता दी जा चुकी है। योजना शुरू होने से अब तक प्रति बहन 40,500 रुपए से अधिक राशि सीधे बैंक खातों में पहुंच चुकी है। सीएम ने भरोसा दिलाया कि बहनों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। सरकार आगे भी हरसंभव मदद करेगी और योजना को और मजबूत बनाया जाएगा।

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