गरुड़ पुराण में सूर्यास्त बाद अंतिम संस्कार वर्जित, जानें धार्मिक मान्यता

 किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होना बेहद दुखद क्षण होता है. जब कोई अपना हमें छोड़कर जाता है, तो एक ओर जहां उसके जाने का गहरा दुख होता है, वहीं दूसरी ओर उसके अंतिम संस्कार की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं. गरुड़ पुराण में मृत्यु और उससे जुड़े कई नियमों और मान्यताओं का विस्तार से वर्णन मिलता है. इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण मान्यता यह है कि सूर्यास्त के बाद किसी भी व्यक्ति का अंतिम संस्कार नहीं किया जाता है. रात में अंतिम संस्कार क्यों नहीं किया जाता? गरुड़ पुराण के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु सूर्यास्त के

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Published On :

अगस्त 7, 2026

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 किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होना बेहद दुखद क्षण होता है. जब कोई अपना हमें छोड़कर जाता है, तो एक ओर जहां उसके जाने का गहरा दुख होता है, वहीं दूसरी ओर उसके अंतिम संस्कार की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं. गरुड़ पुराण में मृत्यु और उससे जुड़े कई नियमों और मान्यताओं का विस्तार से वर्णन मिलता है. इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण मान्यता यह है कि सूर्यास्त के बाद किसी भी व्यक्ति का अंतिम संस्कार नहीं किया जाता है.

रात में अंतिम संस्कार क्यों नहीं किया जाता?
गरुड़ पुराण के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु सूर्यास्त के बाद होती है, तो उसके अंतिम संस्कार के लिए अगले दिन सूर्योदय तक प्रतीक्षा की जाती है. इसके पीछे धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों कारण बताए गए हैं. गरुड़ पुराण में कहा गया है कि रात के समय दाह संस्कार करना वर्जित है, क्योंकि इससे मृत आत्मा को परलोक में कष्ट हो सकता है.

मान्यता यह भी है कि यदि रात में अंतिम संस्कार किया जाए, तो अगले जन्म में उस व्यक्ति को किसी न किसी प्रकार की शारीरिक कमी या दोष का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए दिन के समय ही अंतिम संस्कार करना शुभ माना गया है, क्योंकि यह वह समय होता है जब सूर्य का प्रभाव सक्रिय रहता है. हिंदू धर्म में सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है. सूर्य जीवन, ऊर्जा और चेतना का प्रतीक है. मान्यता है कि आत्मा सूर्य से ही उत्पन्न होती है और अंत में उसी में विलीन हो जाती है. इसलिए सूर्य के रहते हुए, यानी दिन के समय अंतिम संस्कार करना आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए अधिक अनुकूल माना जाता है.

इसके अलावा, यह भी कहा जाता है कि सूर्यास्त के बाद स्वर्ग के द्वार बंद हो जाते हैं और नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय हो जाती हैं. ऐसे में यदि दाह संस्कार किया जाए, तो आत्मा के मोक्ष के मार्ग में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं.

रात में मृत्यु होने पर क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु रात में हो जाए, तो गरुड़ पुराण में कुछ विशेष सावधानियां रखने के लिए भी कहा गया है. जैसे शव को घर के अंदर न रखकर, तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाकर रखना चाहिए. साथ ही शव को कभी भी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस समय नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ सकता है. परिवार के किसी सदस्य को मृतक के पास बैठकर भगवान से उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए. ऐसा करने से आत्मा को शांति मिलती है और वह अपने अगले सफर के लिए तैयार होती है.

क्या है अंतिम संस्कार?
हिंदू धर्म में कुल 16 संस्कार बताए गए हैं, जिनमें अंतिम संस्कार सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. यह केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मा को शरीर से मुक्त करने और उसे पंचतत्व में विलीन करने की प्रक्रिया है. शरीर पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश, इन पांच तत्वों से बना है और दाह संस्कार के माध्यम से ये सभी तत्व पुनः प्रकृति में मिल जाते हैं.

कुछ विशेष परिस्थितियों में अपवाद भी देखने को मिलते हैं. जैसे साधु-संतों को दाह संस्कार के बजाय समाधि दी जाती है, क्योंकि उनका शरीर साधना और तपस्या के कारण विशेष ऊर्जा से युक्त माना जाता है. इसलिए, मृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार विधि-विधान और सही समय पर करना अत्यंत आवश्यक है. इससे न केवल आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि उसके मोक्ष प्राप्त करने की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं.

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