कीचड़ में पहुंचीं डीएम, प्राकृतिक खेती का संदेश देने खेत में उतरीं

पटना किसी जिले का डीएम… यानी फाइलें, मीटिंग, निरीक्षण और सरकारी दफ्तर. लेकिन बिहार के वैशाली में लोगों ने डीएम को बिल्कुल अलग अंदाज में देखा. न मंच था, न माइक और न कोई औपचारिक कार्यक्रम. सामने था धान का खेत, पैरों तक कीचड़, हाथों में धान की पौध… और किसानों के बीच थीं वैशाली की जिला पदाधिकारी वर्षा सिंह… यह तस्वीर वैशाली जिले के बिदुपुर प्रखंड के खजवत्ता गांव की है, जहां डीएम वर्षा सिंह सीधे खेत में उतर गईं. उन्होंने किसान उमेश राय के खेत में श्रीविधि (SRI) पद्धति से धान की रोपनी की और किसानों के साथ

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Published On :

जुलाई 31, 2026

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पटना
किसी जिले का डीएम… यानी फाइलें, मीटिंग, निरीक्षण और सरकारी दफ्तर. लेकिन बिहार के वैशाली में लोगों ने डीएम को बिल्कुल अलग अंदाज में देखा. न मंच था, न माइक और न कोई औपचारिक कार्यक्रम. सामने था धान का खेत, पैरों तक कीचड़, हाथों में धान की पौध… और किसानों के बीच थीं वैशाली की जिला पदाधिकारी वर्षा सिंह…

यह तस्वीर वैशाली जिले के बिदुपुर प्रखंड के खजवत्ता गांव की है, जहां डीएम वर्षा सिंह सीधे खेत में उतर गईं. उन्होंने किसान उमेश राय के खेत में श्रीविधि (SRI) पद्धति से धान की रोपनी की और किसानों के साथ खेती की बारीकियों को भी समझा. खेत में मौजूद किसानों से बातचीत की.

डीएम वर्षा सिंह ने कहा कि प्राकृतिक खेती आने वाले समय की जरूरत है. उनका कहना था कि इस पद्धति से खेती की लागत कम होती है, रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता घटती है, मिट्टी की सेहत बेहतर रहती है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है. साथ ही किसानों की आय बढ़ाने में भी यह तरीका मददगार साबित हो सकता है.

डीएम वर्षा सिंह ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि ज्यादा से ज्यादा किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाए. उन्हें ट्रेनिंग दी जाए, समय पर बीज और जैविक इनपुट उपलब्ध कराए जाएं और सरकारी योजनाओं का फायदा बिना किसी परेशानी के किसानों तक पहुंचे. इस दौरान उन्होंने खजवत्ता स्थित बायो रिसर्च सेंटर का भी जायजा लिया.

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्राकृतिक खेती के मॉडल को ज्यादा से ज्यादा गांवों तक पहुंचाया जाए, ताकि किसान कम लागत में टिकाऊ खेती अपना सकें.

जिला प्रशासन के मुताबिक, बिदुपुर प्रखंड में फिलहाल प्राकृतिक खेती के 10 क्लस्टर बनाए गए हैं, जिनसे 1,250 किसान जुड़े हुए हैं. इन किसानों को 2-2 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जा चुकी है, ताकि वे प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित हों.

कीचड़ से सने खेत में उतरकर धान की रोपनी करती डीएम वर्षा सिंह की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा में हैं. प्रशासन का मानना है कि अगर अधिकारी खुद खेत तक पहुंचेंगे, तो किसानों का भरोसा भी बढ़ेगा और नई खेती की तकनीकों को अपनाने की रफ्तार भी तेज होगी.

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