ट्रेन लेट होने पर टिकट कैंसिलेशन से जुड़े नियमों में बदलाव, आयोग ने की रेलवे की आलोचना

भोपाल  ट्रेन यात्रा में अचानक बने प्लान के लिए तत्काल टिकट लाखों यात्रियों का सबसे बड़ा सहारा बन चुका है। मेडिकल इमरजेंसी हो, किसी जरूरी काम से तुरंत निकलना हो या आखिरी समय पर यात्रा तय हो, ऐसे में लोग बिना ज्यादा सोचे तत्काल टिकट बुक कर लेते हैं। लेकिन परेशानी तब शुरू होती है जब किसी वजह से यात्रा रद्द करनी पड़े और कंफर्म तत्काल टिकट कैंसिल करने पर एक भी रुपया वापस न मिले। यही वजह है कि रेलवे की नो रिफंड पॉलिसी इन दिनों चर्चा में है। हाल ही में भारतीय रेलवे की तत्काल टिकट रिफंड पॉलिसी

Wrriten By :

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Published On :

जनवरी 12, 2026

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भोपाल 

ट्रेन यात्रा में अचानक बने प्लान के लिए तत्काल टिकट लाखों यात्रियों का सबसे बड़ा सहारा बन चुका है। मेडिकल इमरजेंसी हो, किसी जरूरी काम से तुरंत निकलना हो या आखिरी समय पर यात्रा तय हो, ऐसे में लोग बिना ज्यादा सोचे तत्काल टिकट बुक कर लेते हैं। लेकिन परेशानी तब शुरू होती है जब किसी वजह से यात्रा रद्द करनी पड़े और कंफर्म तत्काल टिकट कैंसिल करने पर एक भी रुपया वापस न मिले। यही वजह है कि रेलवे की नो रिफंड पॉलिसी इन दिनों चर्चा में है।

हाल ही में भारतीय रेलवे की तत्काल टिकट रिफंड पॉलिसी को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कहा गया है कि जैसे ही कोई यात्री अपना कंफर्म तत्काल टिकट कैंसिल करता है, रेलवे वही सीट तुरंत वेटिंग लिस्ट में शामिल किसी दूसरे यात्री को दे देता है। ऐसे में एक ही सीट के लिए रेलवे दो बार किराया वसूलता है, जिसे याचिकाकर्ता ने अनुचित और यात्रियों के साथ अन्याय बताया है।

मामला भोपाल निवासी एक यात्री से जुड़ा है, जिसने सितंबर 2023 में भोपाल से नई दिल्ली के लिए आंध्रप्रदेश एक्सप्रेस में AC-2 श्रेणी का टिकट बुक किया था। निर्धारित समय पर पहुंचने के बजाय ट्रेन नई दिल्ली करीब तीन घंटे की देरी से पहुंची, जिससे यात्री की आगे की कनेक्टिंग यात्रा प्रभावित हो गई। नई दिल्ली से चंडीगढ़ जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस छूट जाने के बाद यात्री ने दोनों टिकट कैंसिल करा दिए। बाद में जब टिकट राशि का पूरा रिफंड नहीं मिला तो यात्री ने इसे रेलवे की सेवा में कमी बताते हुए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

हालांकि आयोग ने सुनवाई के बाद यह माना कि ट्रेन देरी से पहुंची थी, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यात्री ने उस स्थिति में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया, जो उसे नियमों के तहत करना चाहिए था। इसी आधार पर आयोग ने शिकायत खारिज करते हुए कहा कि केवल ट्रेन के लेट होने से ही रेलवे को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब यात्री स्वयं निर्धारित प्रक्रिया से हटकर कदम उठाए। बता दें कि यह फैसला हाल ही में कंज्यूमर आयोग की बैंच एक के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ला और प्रतिभा पांडे ने सुनाया।

आयोग ने क्या कहा जिला उपभोक्ता आयोग ने शिकायत खारिज कर दी। आयोग का कहना था कि यात्री ने वह प्रक्रिया नहीं अपनाई, जो ट्रेन देरी की स्थिति में जरूरी होती है। आयोग के अनुसार, अगर ट्रेन तीन घंटे या उससे ज्यादा लेट हो तो यात्री को टिकट कैंसिल करने के बजाय TDR (टिकट डिपॉजिट रिसीट) दाखिल करनी चाहिए थी। टिकट स्वयं कैंसिल करने पर रेलवे द्वारा की गई कटौती नियमों के अनुरूप है, इसलिए इसे सेवा में कमी नहीं माना जा सकता।

क्या है नियम?

रेलवे के मौजूदा नियमों के अनुसार, अगर आपका तत्काल टिकट कंफर्म है और आप उसे कैंसिल करते हैं, तो आमतौर पर कोई रिफंड नहीं मिलता। इसका मतलब साफ है कि आपने यात्रा की या नहीं की पूरा किराया रेलवे के पास ही रहेगा। यही वजह है कि कंफर्म तत्काल टिकट कैंसिल करने के बाद यात्रियों को सबसे ज्यादा झटका लगता है।

कई लोग यह मान लेते हैं कि तत्काल टिकट भी सामान्य टिकट की तरह होता है और कैंसिल करने पर कुछ रकम वापस मिल जाएगी। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। कंफर्म तत्काल टिकट को कैंसिल करना संभव है, लेकिन इसका मतलब सिर्फ सीट छोड़ना होता है, पैसा वापस पाना नहीं। यही सबसे बड़ी गलतफहमी है, जिसमें ज्यादातर यात्री फंस जाते हैं।
कब नहीं मिलेगा रिफंड?

हालांकि, हर स्थिति में तत्काल टिकट पर नो रिफंड नियम लागू नहीं होता। अगर आपका तत्काल टिकट चार्ट बनने तक कंफर्म नहीं हुआ और वह वेटिंग लिस्ट में ही रह गया, तो टिकट अपने आप कैंसिल हो जाता है। ऐसी स्थिति में यात्रियों को पूरा किराया वापस कर दिया जाता है। इसी तरह RAC या वेटिंग तत्काल टिकट पर भी कुछ मामलों में रिफंड मिल सकता है।

अगर रेलवे की तरफ से ट्रेन ही रद्द कर दी जाती है, तो तत्काल कंफर्म टिकट होने के बावजूद यात्रियों को पूरा रिफंड मिलता है। इसके अलावा अगर ट्रेन तीन घंटे या उससे ज्यादा देरी से चलती है और यात्री यात्रा नहीं करता, तो वह TDR फाइल कर सकता है। हालांकि यह रिफंड हर मामले में मंजूर होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं होती। अधिकतर मामलों में कंफर्म तत्काल टिकट पर TDR डालने के बाद भी पैसा वापस नहीं मिलता, जब तक गलती रेलवे की तरफ से साबित न हो।
क्या है रिफंड पॉलिसी की वजह?

रेलवे की इस नो रिफंड पॉलिसी के पीछे एक वजह यह भी बताई जाती है कि इससे गलत इस्तेमाल रोका जा सके। अगर कंफर्म तत्काल टिकट पर भी रिफंड मिलने लगे, तो लोग जरूरत न होने पर भी टिकट बुक करके बाद में कैंसिल करने लगेंगे। इससे असली जरूरतमंद यात्रियों को सीट मिलने में परेशानी होगी।

तत्काल टिकट के अलावा भी कुछ ऐसी स्थितियां हैं, जिनमें रिफंड नहीं मिलता। अगर कंफर्म टिकट ट्रेन के तय समय से दो घंटे बाद कैंसिल किया जाता है, तो कोई पैसा वापस नहीं होगा। RAC या वेटिंग टिकट अगर ट्रेन के असल समय से तीन घंटे बाद कैंसिल किए जाते हैं, तो भी रिफंड नहीं मिलता। डुप्लीकेट तत्काल टिकट पर तो किसी भी हालत में रिफंड नहीं दिया जाता।

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