Congress Alliance TVK : देश के पांच राज्यों के चुनावी नतीजे सामने आ चुके हैं और राजनीतिक तस्वीर अब पूरी तरह साफ है। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने ममता बनर्जी के गढ़ में सेंध लगाकर इतिहास रचा, तो असम में हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की वापसी हुई, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा तमिलनाडु की हो रही है। यहाँ सुपरस्टार थलपति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (TVK) 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी शक्ति के रूप में उभरी है। इस बीच, विजय के पिता एस.ए. चंद्रशेखर ने कांग्रेस को एक ऐसा ऑफर दिया है, जिसने तमिलनाडु की सत्ता के समीकरणों में ‘मौका-मौका’ वाली स्थिति पैदा कर दी है।
पिता चंद्रशेखर का खुला ऑफर: “कांग्रेस को हम देंगे सत्ता”
विजय के पिता और मशहूर निर्देशक एस.ए. चंद्रशेखर ने कांग्रेस की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए एक बड़ा राजनीतिक पासा फेंका है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “कांग्रेस का एक गौरवशाली इतिहास रहा है, लेकिन सत्ता से दूर रहने के कारण यह कमजोर हो रही है। किसी दूसरी पार्टी का पिछलग्गू बनने से कांग्रेस को नुकसान हो रहा है। वह सत्ता हम (विजय) देने को तैयार हैं।” चंद्रशेखर का मानना है कि यदि कांग्रेस विजय की पार्टी के साथ गठबंधन करती है, तो वह न केवल सत्ता में भागीदार बनेगी, बल्कि अपनी खोई हुई विरासत को भी बचा पाएगी। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को इस मौके को न चूकने की सलाह दी है।
विजय का 30 साल का सपना और मुख्यमंत्री पद की ओर कदम
चंद्रशेखर ने विजय के सार्वजनिक जीवन में आने के उद्देश्य पर भी रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि विजय केवल एक कलाकार बनकर संतुष्ट नहीं थे, बल्कि पिछले 30 वर्षों से उनके मन में तमिलनाडु के लिए कुछ बड़ा करने की इच्छा थी। उन्होंने कहा, “एक इंसान के तौर पर समाज के प्रति सोच होना जरूरी है। विजय की यह सोच धीरे-धीरे विकसित हुई और आज परिणाम सबके सामने है।” 108 सीटें जीतने के बाद विजय अब मुख्यमंत्री बनने की दहलीज पर खड़े हैं और उनके पिता का मानना है कि उनका विज़न तमिलनाडु की राजनीति को नई दिशा देगा।
सीटों का गणित: क्या कांग्रेस बनेगी किंगमेकर?
तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 है। चुनाव आयोग के ताजा डेटा के अनुसार, विजय की TVK ने 108 सीटें जीती हैं, जो बहुमत से 10 कम हैं। दूसरी ओर, डीएमके (DMK) के पास 59 सीटें हैं और कांग्रेस के पास 5 सीटें। यदि कांग्रेस अपने पुराने साथी डीएमके का साथ छोड़कर TVK के साथ आती है, तो यह आंकड़ा 113 तक पहुँच जाएगा। बहुमत के लिए अभी भी 5 और सीटों की जरूरत होगी, जिसके लिए पीएमके (4 सीटें) और आईयूएमएल (2 सीटें) जैसी छोटी पार्टियों की भूमिका अहम हो जाएगी। विजय के लिए डीएमके के साथ जाना मुश्किल है, क्योंकि उनकी पूरी राजनीति डीएमके विरोधी लहर पर टिकी है।
कांग्रेस के लिए वर्चस्व वापसी का सुनहरा अवसर
तमिलनाडु में कांग्रेस लंबे समय से द्रविड़ पार्टियों (DMK या AIADMK) के साये में रही है। 2016 के चुनावों में कांग्रेस के पास 8 सीटें थीं और वह डीएमके गठबंधन का हिस्सा थी, लेकिन सत्ता में उसकी कोई सीधी भागीदारी नहीं थी। एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार में भी कांग्रेस का कोई मंत्री नहीं है। विजय के पिता का ऑफर कांग्रेस के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ उसे कैबिनेट में जगह मिल सकती है। यदि गांधी परिवार स्टालिन का साथ छोड़कर विजय के साथ हाथ मिलाता है, तो दक्षिण भारत के दो प्रमुख राज्यों (केरल और तमिलनाडु) में कांग्रेस का मजबूत दबदबा कायम हो जाएगा।
गठबंधन धर्म बनाम सत्ता की चाह: गांधी परिवार की दुविधा
अब गेंद कांग्रेस आलाकमान के पाले में है। एक तरफ ‘इंडिया’ गठबंधन की एकजुटता और एम.के. स्टालिन के साथ पुराने रिश्ते हैं, तो दूसरी तरफ तमिलनाडु की सरकार में सीधे तौर पर शामिल होकर अपना खोया हुआ जनाधार वापस पाने का लालच। एस.ए. चंद्रशेखर के बयान ने कांग्रेस के भीतर हलचल पैदा कर दी है। क्या कांग्रेस ‘गठबंधन धर्म’ निभाएगी या विजय के साथ मिलकर तमिलनाडु में एक नए युग की शुरुआत करेगी? आने वाले कुछ दिन तमिलनाडु और देश की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।
थलपति विजय का उदय तमिलनाडु में एक तीसरे विकल्प की मजबूती को दर्शाता है। कांग्रेस के लिए यह मौका अपने आप को एक जूनियर पार्टनर से आगे बढ़ाकर सत्ता के मुख्य केंद्र में स्थापित करने का है। अब देखना यह है कि क्या कांग्रेस इस ‘मौका-मौका’ ऑफर को भुना पाती है।
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