TG Mohandas Arrest: केरल के वरिष्ठ दक्षिणपंथी टिप्पणीकार और भाजपा के पूर्व बौद्धिक प्रकोष्ठ प्रमुख टी.जी. मोहनदास को कथित आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणियों के मामले में साइबर पुलिस ने हिरासत में लिया है। मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक के विरोध में चल रहे छात्रों के प्रदर्शन से संबंधित है। तिरुवनंतपुरम सिटी साइबर पुलिस की टीम ने रविवार शाम कोच्चि के मट्टनचेरी स्थित उनके आवास से उन्हें हिरासत में लिया। इसके बाद मेडिकल जांच कराकर उन्हें तिरुवनंतपुरम ले जाया गया।
यूट्यूब वीडियो से शुरू हुआ पूरा विवाद
पुलिस के मुताबिक, विवाद मोहनदास के यूट्यूब चैनल ‘पत्रिका’ पर प्रकाशित कुछ वीडियो को लेकर है। आरोप है कि 24 और 25 जुलाई को अपलोड किए गए इन वीडियो में उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और महिलाओं को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। उनके कथित बयानों को लेकर छात्र संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।
महिलाओं को लेकर कथित आपत्तिजनक बयान
आरोप है कि वीडियो में मोहनदास ने प्रदर्शन में शामिल महिलाओं को लेकर सामूहिक दुष्कर्म जैसी गंभीर और आपत्तिजनक बातों का उल्लेख किया। उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि प्रदर्शन में शामिल महिलाएं ऐसी घटनाओं को लेकर शिकायत नहीं करेंगी। इन टिप्पणियों के सामने आने के बाद महिला सम्मान, अभिव्यक्ति की सीमा और सार्वजनिक मंचों पर जिम्मेदार बयानबाजी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। आलोचकों ने आरोप लगाया कि इस तरह की भाषा महिलाओं और प्रदर्शनकारियों को अपमानित करने वाली है।
प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग की बात
मोहनदास पर यह भी आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए बेहद कठोर कार्रवाई की बात कही। कथित वीडियो में उन्होंने कहा कि यदि जंतर-मंतर पर आंदोलन को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी उन्हें दी जाती, तो वह इलाके में कर्फ्यू लगाते और प्रदर्शनकारियों को कई बार चेतावनी देने के बाद गोली चलाने का आदेश देते। उन्होंने दावा किया कि इस तरह कुछ लोगों के घायल या मारे जाने के बावजूद स्थिति कुछ घंटों में नियंत्रण में आ सकती है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
छात्र संगठनों SFI और AISF की शिकायतों के आधार पर तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस ने मोहनदास के खिलाफ मामला दर्ज किया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 192 और 353(1)(b), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 तथा केरल पुलिस अधिनियम की धारा 120(o) के तहत कार्रवाई की है। जांच के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर वीडियो बनाने और उन्हें अपलोड करने में इस्तेमाल किए गए डिजिटल उपकरणों के साथ उनके यूट्यूब अकाउंट से संबंधित जानकारी भी जुटाई है।
आरएसएस ने बयान से किया किनारा
मोहनदास की टिप्पणी को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी दूरी बना ली है। दक्षिण केरल प्रांत के सह-कार्यवाह के.बी. श्रीकुमार ने कहा कि मोहनदास के बयान उनके निजी विचार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरएसएस इन विचारों से सहमत नहीं है और ऐसे बयानों की कड़ी निंदा की जानी चाहिए। संघ की इस प्रतिक्रिया के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया।
भाजपा ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, भाजपा के स्थानीय नेताओं और प्रतिनिधियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मोहनदास के खिलाफ की गई गिरफ्तारी राजनीतिक भेदभाव का उदाहरण है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जिन धाराओं में तीन वर्ष से कम सजा का प्रावधान है, ऐसे मामलों में गिरफ्तारी के बजाय नोटिस जारी करने का विकल्प मौजूद था। हालांकि, पुलिस ने कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की बात कही है।
विपक्ष ने टिप्पणी की कड़ी आलोचना
माकपा के प्रदेश सचिव एम.वी. गोविंदन और कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने भी मोहनदास के कथित बयान की तीखी आलोचना की। नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा भड़काने वाली भाषा स्वीकार नहीं की जा सकती। महिलाओं को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों की भी उन्होंने निंदा की और इसे सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार आचरण के खिलाफ बताया।
जांच के बाद आगे की कार्रवाई पर नजर
अब साइबर पुलिस की जांच इस बात पर केंद्रित रहेगी कि विवादित वीडियो किस संदर्भ में बनाए गए, उनमें इस्तेमाल की गई सामग्री और बयान किस तरह प्रकाशित किए गए तथा संबंधित डिजिटल साक्ष्यों की क्या भूमिका है। मोहनदास को हिरासत में लिए जाने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इस पूरे विवाद ने NEET प्रदर्शन, सोशल मीडिया पर बयानबाजी और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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