मकान मालिक के रहने की सुविधा पर किराएदार नहीं करेगा फैसला! हाईकोर्ट की इंदौर मामले में बड़ी टिप्पणी

इंदौर  मकान खाली कराने के लिए कोर्ट पहुंचे मकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता पर सवाल उठाए जाने को हाई कोर्ट ने गलत बताया है। कोर्ट ने कहा कि जब मकान मालिक यह सिद्ध कर दे कि बेटे की पढ़ाई या परिवार के सदस्य के बेहतर इलाज के लिए उसे दूसरे शहर में रहना है तो शहर को चुनने का फैसला सही है या गलत, यह सिद्ध करने की उसे आवश्यकता नहीं। आवश्यकतानुसार कौन-सी जगह उपयुक्त है, यह मकान मालिक और उसका परिवार तय करेगा। कोर्ट ने किराएदार की अपील निरस्त करते हुए यह फैसला सुनाया। मामला खजराना क्षेत्र की कालोनी

Wrriten By :

Editor

Published On :

अगस्त 21, 2026

Advertisements
728x90-Pension-Mission-Shakti-Digital

इंदौर
 मकान खाली कराने के लिए कोर्ट पहुंचे मकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता पर सवाल उठाए जाने को हाई कोर्ट ने गलत बताया है। कोर्ट ने कहा कि जब मकान मालिक यह सिद्ध कर दे कि बेटे की पढ़ाई या परिवार के सदस्य के बेहतर इलाज के लिए उसे दूसरे शहर में रहना है तो शहर को चुनने का फैसला सही है या गलत, यह सिद्ध करने की उसे आवश्यकता नहीं।

आवश्यकतानुसार कौन-सी जगह उपयुक्त है, यह मकान मालिक और उसका परिवार तय करेगा। कोर्ट ने किराएदार की अपील निरस्त करते हुए यह फैसला सुनाया। मामला खजराना क्षेत्र की कालोनी का है। मकान मालिक का कहना था कि वर्ष 2003 में उसने मकान 1100 रुपये मासिक किराए पर दिया था।

मकान मालिक ने यह कहते हुए मकान खाली कराने के लिए मुकदमा दायर किया था कि उसके पति बीपी के मरीज हैं और सेवानिवृत्त होने वाले हैं। बड़ा बेटा कंपनी सेक्रेटरी की पढ़ाई कर रहा है और पढ़ाई के लिए इंदौर में रहना चाहता है। छोटा बेटा 12वीं के बाद इंदौर में इंजीनियरिंग करना चाहता है। उसे मकान की वास्तविक आवश्यकता है।

728x90-Pension-Mission-Shakti-Digital

60 रुपये महीने था किराया
किराएदार ने इस बातों का विरोध करते हुए कहा कि किराया सिर्फ 60 रुपये माह था, जिसका वह नियमित भुगतान कर रहा है। मकान मालिक से वर्ष 2009 में मकान का सौदा तीन लाख रुपये में हुआ था। मकान की कीमत बढ़ने की वजह से मकान मालिक अब बिक्री से पीछे हट रहा है।

विचारण न्यायालय ने मकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता को स्वीकारते हुए मकान खाली करने का आदेश किराएदार को दिया था। किराएदार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अपील की, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। इस पर मामला हाई कोर्ट पहुंचा।

किराएदार ने तर्क रखा था कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि सीएस के कोर्स के लिए मकान मालिक के बेटे का इंदौर में रहना जरूरी है। कोर्ट ने उसके तर्क को गलत माना। कोर्ट ने कहा कि मकान मालिक और उसका बेटा यह तय करते हैं कि कोर्स करते हुए इंदौर में रहना उनके लिए सुविधाजनक है तो यह उनकी पसंद है। कोर्ट ने किराएदार की याचिका निरस्त कर दी।

2