Tehran Unrest: ईरान में लहूलुहान हुई सड़कें, प्रदर्शनों में अब तक 2,571 लोगों की मौत, पढ़ें रिपोर्ट

ईरान से आ रही खबरें रोंगटे खड़े करने वाली हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, सुरक्षाबलों की बर्बरता में अब तक 2,571 प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं। सड़कों पर टैंक तैनात हैं और इंटरनेट पूरी तरह ठप है। क्या ट्रंप की सैन्य दखल की धमकी ईरान को तबाही से बचा पाएगी या महायुद्ध शुरू होगा?

Tehran Unrest

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 14, 2026

Tehran Unrest: ईरान में 28 दिसंबर से भड़की विरोध प्रदर्शनों की आग अब एक भीषण मानवीय संकट में तब्दील हो चुकी है। देश भर में जारी इस जनाक्रोश के बीच हालात पल-पल बिगड़ रहे हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने जो आंकड़े पेश किए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। जहाँ ईरानी सरकार इन प्रदर्शनों को विदेशी ताकतों की साजिश बता रही है, वहीं आम जनता बुनियादी अधिकारों और आजादी के लिए सड़कों पर डटी हुई है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त तेवरों ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है।

मौतों का भयावह आंकड़ा: मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट

ईरान में हिंसा का पैमाना किस कदर बढ़ गया है, इसका अंदाजा मौतों के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी’ (HRANA) के ताजा दावों के मुताबिक, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और संघर्ष में अब तक 2,571 लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि, ईरानी सरकारी मीडिया इन मौतों के लिए ‘आतंकवादी समूहों’ को जिम्मेदार ठहरा रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय का स्पष्ट मानना है कि निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग ही इस नरसंहार की मुख्य वजह है।

डोनाल्ड ट्रंप का ईरानी जनता को संदेश: “मदद रास्ते में है”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संकट पर कड़ा रुख अपनाते हुए ईरानी सरकार को चेतावनी दी है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रंप ने लिखा कि प्रदर्शनकारियों की हत्या किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने ईरानी नागरिकों से अपील की कि वे अपने संस्थानों पर कब्जा करें और अत्याचारियों के नाम सुरक्षित रखें। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक हत्याएं बंद नहीं होतीं, वे ईरानी अधिकारियों के साथ कोई बातचीत नहीं करेंगे। उन्होंने ईरानियों को भरोसा दिलाते हुए कहा, “प्रदर्शन जारी रखें, मदद रास्ते में है।”

संचार माध्यमों पर पाबंदी और मानवता की गुहार

ईरान में फिलहाल इंटरनेट और एसएमएस सेवाएं पूरी तरह ठप हैं, जिससे देश का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग कट गया है। हालांकि, कुछ पाबंदियां हटाए जाने के बाद लोग सीमित तौर पर विदेश में फोन कॉल कर पा रहे हैं। ट्रंप ने ईरान के शासकों से मानवता दिखाने की अपील करते हुए कहा कि उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्थिति पर पैनी नजर रख रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनकारियों को फांसी देने का सिलसिला शुरू हुआ, तो अमेरिका बहुत कड़ी सैन्य या आर्थिक कार्रवाई कर सकता है।

ईरान का पलटवार: अमेरिका और इजरायल पर लगाए आरोप

दूसरी तरफ, ईरान ने ट्रंप के बयानों को अपने आंतरिक मामलों में दखल और हिंसा भड़काने की कोशिश करार दिया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने सुरक्षा परिषद को पत्र लिखकर दावा किया कि निर्दोष युवाओं की मौत के लिए अमेरिका और इजरायल द्वारा समर्थित तत्व जिम्मेदार हैं। ईरान का आरोप है कि अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप के लिए केवल बहाने तलाश रहा है और प्रदर्शनों की आड़ में देश की संप्रभुता को खतरा पहुँचा रहा है।

वैश्विक स्तर पर विरोध: यूरोपीय देशों ने राजदूतों को किया तलब

ईरान में हो रही हिंसा पर केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरा यूरोप आक्रोशित है। ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, फिनलैंड और नीदरलैंड जैसे देशों ने ईरानी राजदूतों को तलब कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। यूरोपीय संघ (EU) ने ईरान पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। फिनलैंड ने इंटरनेट बंदी की आलोचना करते हुए इसे “खामोशी में किया जा रहा दमन” बताया है। यूरोपीय नेताओं का मानना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग अमानवीय और अस्वीकार्य है।

संयुक्त राष्ट्र की अपील: दमन चक्र तुरंत थमे

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने ईरानी नेतृत्व से हिंसा तुरंत रोकने का आह्वान किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नागरिकों को अपनी शिकायतों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकवादी’ कहना बंद किया जाए और उनकी जायज मांगों को सुना जाए, न कि उन्हें गोलियों के दम पर दबाया जाए।

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