सिंहस्थ 2028 में तकनीक बनेगी सुरक्षा कवच, AI आधारित मौसम अलर्ट और स्मार्ट सिक्योरिटी पर जोर

उज्जैन  सिंहस्थ महापर्व वर्ष 2028 की तैयारियां जोरो पर हैं. वर्ष 2016 सिंहस्थ के दौरान आए भीषण आंधी तूफान और प्राकृतिक आपदा की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए उज्जैन आलोट संसदीय क्षेत्र से सांसद अनिल फिरोजिया ने मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग उठाई है. सांसद अनिल फ़िरोजिया ने चर्चा में कहा, ''मैंने मौसम विभाग दिल्ली मुख्यालय को एक लेटर लिखा है।  2016 में आई थी प्राकृतिक आपदा अनिल फिरोजिया ने लिखा, ''सभी के संज्ञान में है कि, पिछली बार सिंहस्थ महापर्व वर्ष 2016 के दौरान उज्जैन में प्राकृतिक आपदा आई थी और कई टिन शेड, पेड़

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Published On :

जून 14, 2026

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उज्जैन
 सिंहस्थ महापर्व वर्ष 2028 की तैयारियां जोरो पर हैं. वर्ष 2016 सिंहस्थ के दौरान आए भीषण आंधी तूफान और प्राकृतिक आपदा की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए उज्जैन आलोट संसदीय क्षेत्र से सांसद अनिल फिरोजिया ने मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग उठाई है. सांसद अनिल फ़िरोजिया ने चर्चा में कहा, ''मैंने मौसम विभाग दिल्ली मुख्यालय को एक लेटर लिखा है। 

2016 में आई थी प्राकृतिक आपदा
अनिल फिरोजिया ने लिखा, ''सभी के संज्ञान में है कि, पिछली बार सिंहस्थ महापर्व वर्ष 2016 के दौरान उज्जैन में प्राकृतिक आपदा आई थी और कई टिन शेड, पेड़ धराशाई हो गए थे. लोग घायल भी हुए थे, जिससे प्रशासन और श्रद्धालु दोनों के लिए गंभीर चुनौती खड़ी हो गई थी. आने वाला समय 2028 में सिंहस्थ का है, और हम चाहते हैं कि उस वक़्त ऐसी परिस्थितियां नहीं बने। 

अनिल फिरोजिया ने मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था की उठाई मांग
सांसद ने कहा, ''सिंहस्थ महापर्व को ध्यान में रखते हुए विभाग को पत्र लिखते हुए संज्ञान में लाया कि, उज्जैन में अत्याधुनिक मौसम पूर्वानुमान उपकरण की अभी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. आधुनिक यंत्र लगाए जाएं ताकि पूर्वानुमान लग जाए मौसम की क्या स्थिति रहेगी. जिससे प्रशासन पहले से सतर्क हो जाए और उससे निपटने की तैयारी कर सके. देश विदेश से आने वाले लाखों करोड़ों दर्शनार्थियों को सुरक्षित किया जा सके. वर्ष 2028 में दर्शनार्थियों की संख्या पिछली बार से 3 गुना अधिक होने की संभावना है. ऐसे में मौसम संबंधी सटीक और समय पर पूर्वानुमान उपलब्ध होना बेहद आवश्यक है। 

सिंहस्थ 2016 बनाम 2028 मौसम प्रबंधन और व्यवस्थाओं में क्या होगा अंतर
मौसम विशेषज्ञ बताते हैं, यदि केंद्र और राज्य समय पर स्वीकृति देता है तो वर्ष 2028 तक उज्जैन में कई तरह से व्यवस्थाएं की जा सकती हैं। 

पहला रियल टाइम वेदर स्टेशन– सिंहस्थ क्षेत्र में कई स्वचलित मौसम केंद्र लगाए जाते हैं, जो हर कुछ मिनट में हवा की गति, तापमान, नमी और वर्षा की जानकारी दें। 

दूसरा डॉप्लर रडार कवरेज– इंदौर उज्जैन क्षेत्र के लिए उन्नत रडार कवरेज मिलने पर 30 मिनट से 3 घण्टे तक आंधी और तूफान की चेतावनी संभव हो सकेगी। 

तीसरा AI आधारित पूर्वानुमान- वर्ष 2028 तक AI आधारित मौसम पूर्वानुमान से स्थानीय स्तर पर बेहतर सटीक चेतावनियां जारी की जा सकती हैं। 

चौथा श्रद्धालुओं के लिए अलर्ट सिस्टम- मोबाइल संदेश, एलईडी स्क्रीन, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से तत्काल चेतावनी, पांचवा मजबूत अस्थाई ढांचे 2016 के अनुभव के बाद टेंट, शेड, विद्युत पोल और घाट क्षेत्र की संरचनाओं को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है। 

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