TCS Nashik Conversion : नासिक से दिल्ली तक हलचल, टीसीएस धर्मांतरण केस में अब होगी बड़ी कानूनी कार्रवाई?

नासिक स्थित टीसीएस (TCS) कार्यालय में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में मांग की गई है कि ऐसे कृत्यों को 'संगठित अपराध' और 'आतंकवाद' की श्रेणी में रखा जाए। क्या कोर्ट इस पर सख्त रुख अपनाएगा? जानिए पूरी रिपोर्ट।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 16, 2026

TCS Nashik Conversion :  नासिक में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) के केंद्र में सामने आया कथित धर्मांतरण और उत्पीड़न का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर पहुँच गया है। इस सनसनीखेज मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें इस तरह की गतिविधियों को देश की एकता और अखंडता के लिए गंभीर खतरा बताया गया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि नासिक की घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है और इसे ‘आतंकवादी गतिविधियों’ के चश्मे से देखा जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका: ‘डेमोग्राफिक बैलेंस’ बिगाड़ने की बड़ी साजिश

पिटीशनर के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दलील दी है कि धोखाधड़ी, लालच और ज़बरदस्ती के ज़रिए कराया जाने वाला धर्म परिवर्तन कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि यह एक गहरी साज़िश का हिस्सा है। याचिका में दावा किया गया है कि एक संगठित नेटवर्क के माध्यम से भारत के जनसांख्यिकीय संतुलन (Demographic Balance) को बदलने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे विदेशी संगठनों से फंडिंग मिल रही है। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि केंद्र और राज्य सरकारों को ‘गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन’ के खिलाफ सख्त रुख अपनाना चाहिए और इस तरह की हरकतों पर आतंकवाद विरोधी कानून (Terrorism Law) के तहत मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

TCS नासिक केस: महिला कर्मचारियों के गंभीर आरोप और मंत्री का दावा

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब TCS के नासिक स्थित सेंटर की कम से कम नौ महिला कर्मचारियों ने अपने सहकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए। इन महिलाओं का दावा है कि उन्हें पिछले दो-तीन सालों से मानसिक और यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया जा रहा था। महाराष्ट्र के मंत्री और भाजपा नेता गिरीश महाजन ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि “कंपनी के कुछ मुस्लिम कर्मचारियों और अधिकारियों ने युवा लड़कियों को अच्छी सैलरी और प्रमोशन का झांसा देकर उन्हें नमाज़ पढ़ने और रोज़ा रखने के लिए मजबूर किया।” इस खुलासे के बाद भारत की सबसे प्रतिष्ठित आईटी कंपनी की छवि को गहरा धक्का लगा है।

पुलिस की कार्रवाई: छह आरोपी गिरफ्तार, SIT कर रही है जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए नासिक पुलिस ने तुरंत एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिकायत दर्ज कराने वाली महिला कर्मचारियों की उम्र 18 से 25 साल के बीच है। अब तक पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें इंजीनियर रैंक का एक अधिकारी भी शामिल है। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, राजा मेमन, तौसिफ अत्तर और अश्विन चिनानी के रूप में हुई है। इन पर छेड़छाड़ और ज़बरन धर्म परिवर्तन की कोशिश की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

TCS का बड़ा कदम: BPO ऑपरेशन बंद, वर्क-फ्रॉम-होम का आदेश

विवाद के तूल पकड़ने और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए TCS प्रबंधन ने नासिक में अपने BPO डिपार्टमेंट के कामकाज को अस्थायी रूप से रोक दिया है। कंपनी ने एक आधिकारिक निर्देश जारी कर सभी कर्मचारियों को अगले आदेश तक वर्क-फ्रॉम-होम (WFH) के आधार पर काम करने को कहा है। कंपनी का कहना है कि वे जांच में पुलिस का पूरा सहयोग कर रहे हैं और कर्मचारियों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस घटना ने कॉरपोरेट जगत में ‘वर्कप्लेस कल्चर’ और आंतरिक सुरक्षा नीतियों पर नई बहस छेड़ दी है।

निष्कर्ष और सुरक्षा की मांग

पिटीशन में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि अगर समय रहते इस तरह के संगठित नेटवर्क पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। फिलहाल, सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि वह इस जनहित याचिका पर क्या रुख अपनाता है और नासिक पुलिस की SIT जांच में आगे और कौन से बड़े खुलासे होते हैं।

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