Tata Sons Listing : RBI ने टाटा संस की लिस्टिंग पर रुख किया स्पष्ट, गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नियम समझाए

टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बड़ी NBFC कंपनियों के पंजीकरण और सूचीबद्धता से जुड़े नियमों का बचाव किया है। आखिर टाटा संस पर ये नियम क्यों लागू हो सकते हैं और इसका टाटा समूह पर क्या असर पड़ेगा?

Tata Sons Listing

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 24, 2026

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Tata Sons Listing :  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने टाटा संस को ऊपरी स्तर की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी यानी NBFC के रूप में वर्गीकृत किए जाने को उचित ठहराया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन तक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष पहुंच रखने वाली बड़ी NBFC और मुख्य निवेश कंपनियों (CIC) के लिए केंद्रीय बैंक के साथ पंजीकरण जरूरी है। उनके मुताबिक, टाटा संस जैसी कंपनियां बड़े कारोबारी समूहों के शीर्ष पर होती हैं और समूह की कंपनियों के वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल करके धन जुटा सकती हैं। इससे वित्तीय व्यवस्था में जोखिम पैदा होने की आशंका रहती है।

सार्वजनिक धन तक पहुंच के आधार पर लागू होंगे नियम

एक निजी चैनल के वर्ल्ड समिट में बोलते हुए RBI गवर्नर ने कहा कि सार्वजनिक धन कॉरपोरेट बॉन्ड, बैंकिंग व्यवस्था और दूसरे वित्तीय माध्यमों से आता है। इसलिए ऐसी कंपनियों की निगरानी जरूरी है, जिनकी गतिविधियों का असर व्यापक वित्तीय प्रणाली पर पड़ सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन मुख्य निवेश कंपनियों की सार्वजनिक धन तक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष पहुंच नहीं है, उन्हें कुछ परिस्थितियों में पंजीकरण की अनिवार्यता से छूट मिल सकती है। हालांकि, संबंधित कंपनी की श्रेणी और उस पर लागू नियमों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

ऊपरी स्तर की NBFC के लिए शेयर बाजार में सूचीबद्धता

मल्होत्रा के मुताबिक, यदि कोई कंपनी RBI के नियमों के अंतर्गत NBFC या CIC की श्रेणी में आती है और सार्वजनिक धन तक उसकी पहुंच है, तो उसे नियामकीय पंजीकरण कराना होगा। यदि कंपनी ऊपरी स्तर की NBFC के दायरे में आती है, तो उसके लिए शेयर बाजार में सूचीबद्धता की शर्त भी लागू हो सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य बड़ी वित्तीय कंपनियों में पारदर्शिता बढ़ाना और जोखिमों की निगरानी को मजबूत करना है।

टाटा संस का पंजीकरण से बाहर निकलने का आवेदन खारिज

पिछले महीने RBI ने टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की NBFC पंजीकरण प्रमाणपत्र लौटाने की अर्जी खारिज कर दी थी। टाटा संस को सितंबर 2022 में ऊपरी स्तर की NBFC के रूप में वर्गीकृत किया गया था। कंपनी ने मार्च 2024 में पंजीकरण से बाहर निकलने के लिए आवेदन किया था और पात्रता हासिल करने के प्रयास में अपना कर्ज चुकाया था। RBI के फैसले के बाद कंपनी की संभावित शेयर बाजार सूचीबद्धता पर चर्चा तेज हुई है। हालांकि, टाटा संस ने इस मुद्दे पर विभिन्न विकल्पों पर विचार करने की बात भी कही है।

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महंगाई पर नियंत्रण RBI की प्राथमिकता

RBI गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक की प्राथमिकता महंगाई को निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप रखना, कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और आर्थिक विकास को समर्थन देना है। उनके अनुसार, सीमेंट और इस्पात की बिक्री, ऋण वृद्धि, कर संग्रह तथा वाहन बिक्री जैसे संकेतक आर्थिक गतिविधियों में मजबूती दिखाते हैं। हालांकि, खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में बदलाव अब भी महंगाई के लिए चुनौती बने हुए हैं। उन्होंने चालू वर्ष के लिए औसत मुद्रास्फीति का अनुमान 5.1 प्रतिशत बताया।

रुपये की विनिमय दर पर RBI की नीति

डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत पर मल्होत्रा ने कहा कि RBI किसी निश्चित विनिमय दर को लक्ष्य बनाकर काम नहीं करता। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित परिस्थितियां बनाए रखना और अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है।

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