Tamil Nadu Election: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज, BJP-AIADMK गठबंधन में सीट बंटवारे पर मतभेद

तमिलनाडु में सत्ता की जंग: क्या बीजेपी की 'कैबिनेट' वाली शर्त तोड़ देगी अन्नाद्रमुक से गठबंधन? तमिलनाडु की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब दिल्ली की गुप्त बैठक में बीजेपी ने 56 सीटों के साथ-साथ भविष्य की सरकार में 3 मंत्री पदों की मांग रख दी। एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) के लिए यह शर्त गले की फांस बन गई है, क्योंकि उन्हें डर है कि 'पावर शेयरिंग' का ऐलान डीएमके को हमला करने का मौका दे देगा। क्या गठबंधन बचेगा?

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Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 9, 2026

Tamil Nadu Election: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस चुनाव में BJP और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के बीच गठबंधन तय हो चुका है, लेकिन सीट शेयरिंग और गठबंधन की शर्तों को लेकर अभी भी कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। हाल के दिनों में दोनों दलों के शीर्ष नेताओं के बीच लगातार बैठकों का दौर चल रहा है, जिससे साफ है कि चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने की कोशिशें तेज हो गई हैं।

अमित शाह और पलनीस्वामी की दिल्ली में अहम मुलाकात

हाल ही में AIADMK के महासचिव एडप्पाडी के. पलनीस्वामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस बैठक को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना गया। इसके बाद शुक्रवार को प्रदेश BJP अध्यक्ष नयनार नागेन्द्रन ने चेन्नई में पलनीस्वामी से भेंट की। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में दिल्ली में हुई बातचीत को आगे बढ़ाते हुए सीट शेयरिंग और गठबंधन की रूपरेखा पर चर्चा की गई।

सीट बंटवारे को लेकर BJP की बड़ी मांग

सूत्रों के अनुसार, 23 दिसंबर को चेन्नई में पलनीस्वामी और तमिलनाडु चुनाव प्रभारी व केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के बीच हुई बैठक में BJP ने 50 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। इसके बाद अमित शाह से दिल्ली में हुई बातचीत में भी BJP अपने इस रुख पर कायम रही। पार्टी का मानना है कि राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए उसे पिछली बार से कहीं ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए।

AIADMK की सख्त शर्तें, सहमति से इनकार

हालांकि AIADMK ने BJP की इस मांग पर अब तक कोई सहमति नहीं दी है। AIADMK की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि पार्टी कम से कम 170 सीटों पर खुद चुनाव लड़ना चाहती है। तमिलनाडु विधानसभा की कुल 234 सीटों को देखते हुए इसका मतलब यह है कि AIADMK, BJP समेत सभी सहयोगी दलों के लिए केवल 64 सीटें ही छोड़ने के पक्ष में है। यही वजह है कि सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं।

गठबंधन विस्तार की शर्त पर भी मतभेद

सीट शेयरिंग के अलावा गठबंधन के विस्तार को लेकर भी दोनों दलों के विचार मेल नहीं खा रहे हैं। BJP चाहती है कि गठबंधन को मजबूत बनाने के लिए AIADMK से अलग हो चुके पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम और टीटीवी दिनाकरण की पार्टी AMMK को भी साथ लाया जाए। हालांकि AIADMK सूत्रों के मुताबिक, हालिया बैठक में BJP को साफ तौर पर बता दिया गया कि ओ. पन्नीरसेल्वम को गठबंधन में शामिल करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। वहीं टीटीवी दिनाकरण के मुद्दे पर बाद में विचार करने की बात कही गई है।

पीएम मोदी के चुनावी कार्यक्रमों पर मंथन

बैठक में इस बात पर भी विस्तार से चर्चा हुई कि चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम किन-किन इलाकों में आयोजित किए जाएं, ताकि गठबंधन को उनकी लोकप्रियता और छवि का अधिकतम लाभ मिल सके। BJP का मानना है कि पीएम मोदी की रैलियों से पार्टी को शहरी और युवा मतदाताओं के बीच बढ़त मिल सकती है।

2021 के नतीजों की छाया में मौजूदा मांग

गौरतलब है कि 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में AIADMK ने BJP को 25 सीटें दी थीं, जिनमें से BJP केवल 4 सीटों पर जीत हासिल कर पाई थी। इस बार BJP की ओर से दोगुनी से भी ज्यादा सीटों की मांग ने गठबंधन के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर जल्द ही सहमति नहीं बनी, तो गठबंधन के भीतर तनाव और बढ़ सकता है।

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