Tamil Nadu Election 2026: अप्रैल-मई 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर दिल्ली में सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस आलाकमान ने पांच राज्यों के चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है, जिसमें तमिलनाडु सबसे महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। शनिवार शाम राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तमिलनाडु के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक के बाद उम्मीद की जा रही है कि पिछले दो दशकों से चले आ रहे डीएमके-कांग्रेस गठबंधन के भविष्य पर लगा प्रश्नचिह्न हट जाएगा। कांग्रेस के भीतर एक धड़ा अब पारंपरिक राजनीति से हटकर नए प्रयोगों की वकालत कर रहा है।
सत्ता में भागीदारी का पेंच: स्टालिन सरकार से कांग्रेस की बढ़ी उम्मीदें
कांग्रेस और डीएमके के बीच मतभेद की सबसे बड़ी वजह सत्ता में हिस्सेदारी है। तमिलनाडु में डीएमके गठबंधन को केवल चुनावी जीत तक सीमित रखती है और सरकार में सहयोगियों को शामिल नहीं करती। इस बार कांग्रेस ने अपना रुख कड़ा कर लिया है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस, एम.के. स्टालिन सरकार में कम से कम छह मंत्री पद चाहती है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि बिना सत्ता सुख के कार्यकर्ताओं में जोश भरना मुश्किल है। हालांकि, डीएमके नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि वे गठबंधन सहयोगियों को सरकार में शामिल करने के मूड में नहीं हैं, जिससे दोनों दलों के बीच दरार गहरी होती दिख रही है।
सीटों का गणित: डीएमके का ऑफर कम, कांग्रेस की मांग ज्यादा
सीटों के बंटवारे को लेकर भी दोनों दलों के बीच खींचतान जारी है। 2021 के चुनाव में कांग्रेस 25 सीटों पर लड़ी थी, लेकिन इस बार वह कम से कम 35 सीटों की मांग कर रही है। कांग्रेस ने ऐतिहासिक आंकड़ों का हवाला देते हुए याद दिलाया कि 2011 में वह 63 और 2006 में 48 सीटों पर चुनाव लड़ चुकी है। दूसरी ओर, डीएमके ने कांग्रेस को केवल 19 सीटों का ऑफर दिया है, जो कांग्रेस को कतई मंजूर नहीं है। 15 दिसंबर की डेडलाइन बीत जाने के एक महीने बाद भी सीटों पर सहमति न बनना इस गठबंधन के टूटने की आहट माना जा रहा है।
सुपरस्टार विजय की टीवीके: कांग्रेस के लिए क्यों है यह फायदे का सौदा?
अभिनेता विजय की नई पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) कांग्रेस के लिए एक आकर्षक विकल्प बनकर उभरी है। सूत्रों के मुताबिक, विजय ने कांग्रेस को 60 से ज्यादा सीटें देने और सरकार बनने पर सत्ता में बराबर का भागीदार बनाने का वादा किया है। कांग्रेस के आंतरिक सर्वे बताते हैं कि विजय को करीब 30 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं। विजय की लोकप्रियता और उनकी ईसाई पृष्ठभूमि न केवल तमिलनाडु में बल्कि केरल के ईसाई वोट बैंक को साधने में भी कांग्रेस की मदद कर सकती है। राहुल गांधी का हाल ही में विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ का समर्थन करना और करूर हादसे के बाद उनसे फोन पर बात करना इसी नई दोस्ती की ओर इशारा करता है।
दबाव की राजनीति या नए युग की शुरुआत?
हालांकि, डीएमके जैसे पुराने और विश्वसनीय सहयोगी को छोड़ना कांग्रेस के लिए जोखिम भरा हो सकता है। जानकारों का मानना है कि टीवीके के साथ बातचीत केवल डीएमके पर दबाव बनाने का एक पैंतरा हो सकता है। 1967 के बाद से तमिलनाडु में कांग्रेस का अपना मुख्यमंत्री नहीं रहा है और पार्टी का आधार काफी हद तक डीएमके की बैसाखियों पर टिका है। राष्ट्रीय राजनीति और लोकसभा सीटों के लिहाज से डीएमके कांग्रेस के लिए अपरिहार्य है। अब देखना यह है कि शनिवार की बैठक में राहुल और खरगे पार्टी के भविष्य के लिए कौन सा रास्ता चुनते हैं।
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