Taliban Attack : अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने एक बेहद चौंकाने वाला और आक्रामक कदम उठाते हुए पाकिस्तान की सीमा के भीतर सैन्य कार्रवाई करने का दावा किया है। तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि उसकी वायुसेना ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में स्थित आतंकी संगठन ISIS के ठिकानों को निशाना बनाया है। तालिबान का कहना है कि यह रात भर चला एक व्यापक सैन्य ऑपरेशन था, जिसमें उन्होंने आतंकी संगठनों को भारी नुकसान पहुँचाया है। इस दावे ने दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और अधिक विस्फोटक बना दिया है।
किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?
तालिबान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई में पाकिस्तान के रणनीतिक क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। विशेष रूप से बलूचिस्तान के किला अब्दुल्ला जिले के गुलिस्तान इलाके और चागई जिले के शकर आब जंगल गार्डी क्षेत्र में स्थित ISIS के ठिकानों पर जोरदार हमले किए गए। इसके साथ ही, खैबर पख्तूनख्वा की ओरकजई एजेंसी के कम्बर खेल इलाके में भी बमबारी की गई। तालिबान का दावा है कि कम्बर खेल का यह इलाका ISIS-खुरासान के शीर्ष नेताओं का मुख्य ठिकाना था, जहाँ से वे अक्सर अपनी गतिविधियों को संचालित करते थे। तालिबान ने दावा किया है कि उनके द्वारा चिन्हित किए गए सभी ‘हाई-वैल्यू’ लक्ष्यों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है।
अफगानिस्तान की सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव
इस हमले के बाद तालिबान सरकार ने अपनी सख्त रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि अफगानिस्तान अब अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए किसी भी खतरे को बर्दाश्त नहीं करेगा। रक्षा मंत्रालय ने साफ किया कि कुछ ‘शत्रुतापूर्ण खुफिया हलकों’ के इशारे पर इन ठिकानों का इस्तेमाल अफगानिस्तान के विरुद्ध हमलों की साजिश रचने के लिए किया जा रहा था। तालिबान ने चेतावनी दी है कि वे भविष्य में भी अपनी पूरी सैन्य क्षमता का उपयोग करके ऐसे खतरों को शुरुआती चरण में ही खत्म करने के लिए तत्पर रहेंगे। यह बयान तालिबान की बदली हुई आक्रामक सुरक्षा नीति का संकेत है।
पाक-अफगान सीमा पर लगातार बढ़ रहा सैन्य तनाव
यह घटनाक्रम पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच फरवरी 2026 से जारी बढ़ते हुए सैन्य टकराव का परिणाम है। पिछले कुछ महीनों में सीमा पर तोपखाने की गोलाबारी, ड्रोन हमले और सैन्य झड़पें आम हो गई हैं। जून की शुरुआत में भी दोनों देशों के बीच जबरदस्त तनातनी देखने को मिली थी। 11 जून को अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के हवाई हमलों और अपने हवाई क्षेत्र के उल्लंघन का कड़ा विरोध दर्ज कराया था। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद के अनुसार, 9 जून को कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में हुए पाकिस्तानी हमलों में कई निर्दोष नागरिक, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, मारे गए थे।
आरोपों का सिलसिला और बढ़ता हुआ मानवीय संकट
पाकिस्तान लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और ISIS-खुरासान जैसे आतंकी गुट अफगान धरती का उपयोग पाकिस्तान के खिलाफ हमले करने के लिए करते हैं। दूसरी ओर, काबुल में बैठी तालिबान सरकार इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करती रही है। इस संघर्ष के कारण अब तक दोनों देशों की सीमा पर सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, जिसमें बड़ी संख्या आम नागरिकों की है। इस ताजा एयरस्ट्राइक के बाद क्षेत्र में स्थिरता की उम्मीदें धूमिल होती दिख रही हैं, जिससे दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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