Taksal Shootout Case : उत्तर प्रदेश की राजनीति और अपराध जगत से जुड़ी एक बड़ी खबर वाराणसी से सामने आई है। दो दशक से भी अधिक समय पहले हुए बहुचर्चित टकसाल सिनेमा शूटआउट मामले में वाराणसी की MP-MLA कोर्ट ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने सबूतों के अभाव में बाहुबली विधायक अभय सिंह और उनके साथियों को बड़ी राहत देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया है। यह मामला न केवल कानूनी रूप से जटिल था, बल्कि पूर्वांचल में सत्ता और वर्चस्व की जंग का एक बड़ा प्रतीक भी माना जाता था।
क्या था 4 अक्टूबर 2002 का वह खूनी मंजर?
घटना आज से लगभग 22-24 साल पहले की है, जब वाराणसी का कैंट इलाका गोलियों की गड़गड़ाहट से दहल उठा था। 4 अक्टूबर 2002 को बाहुबली और पूर्व सांसद धनंजय सिंह का काफिला टकसाल सिनेमा के पास से गुजर रहा था। आरोप था कि इसी दौरान चार पहिया वाहनों से आए हमलावरों ने अत्याधुनिक हथियारों से काफिले पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले का मुख्य आरोपी अभय सिंह और एमएलसी विनीत सिंह को बनाया गया था। उस वक्त इस घटना ने पूरे उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे, क्योंकि इसमें पांच लोगों को गोलियां लगी थीं।
बाहुबलियों की दुश्मनी और राजनीतिक रंजिश
यह पूरा मामला पूर्वांचल की राजनीति में पैठ रखने वाले दो बड़े गुटों के बीच की ‘गैंगस्टर राइवलरी’ से जुड़ा था। धनंजय सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि जब वह जौनपुर लौट रहे थे, तब उन पर जानलेवा हमला किया गया। हमले में धनंजय सिंह के गनर और ड्राइवर को गंभीर चोटें आई थीं। पुलिस ने इस मामले में गैंगस्टर एक्ट समेत हत्या के प्रयास की कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। अभय सिंह ने कोर्ट परिसर में प्रवेश करते समय मीडिया से कहा था कि वह पिछले 24 सालों से इस “फर्जी मुकदमे” के कारण मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेल रहे हैं।
साक्ष्यों की कमी और कोर्ट का फैसला
वाराणसी की विशेष MP-MLA कोर्ट में चली लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा। चश्मदीद गवाहों और मौके से मिले साक्ष्यों के बीच विरोधाभास और समय के साथ कमजोर हुई पैरवी के कारण कोर्ट ने पाया कि आरोपियों पर आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना पुख्ता सबूतों के किसी को भी अपराधी करार नहीं दिया जा सकता। इसके बाद कोर्ट ने अभय सिंह और अन्य आरोपियों को बाइज्जत बरी करने का आदेश जारी किया।
चश्मदीदों की गवाही और पुरानी रंजिश का साया
घटना के समय मौजूद चश्मदीदों ने बताया था कि हमलावरों ने एडवांस राइफलों और पिस्तौलों का इस्तेमाल किया था। हमले के पीछे पुरानी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई बताई गई थी। उस दौर में आईजीपी (IGP), एसएसपी (SSP) और एसपी सिटी जैसे वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद इस केस की कमान संभाली थी। हालांकि, दो दशकों के लंबे अंतराल के बाद अब इस केस का पटाक्षेप हो गया है। बरी होने के बाद आरोपियों के समर्थकों में खुशी की लहर है, जबकि यह फैसला कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है कि इतने बड़े हमले के पीछे के असली गुनहगार कौन थे।
Read More: Spam Calls: स्पैम कॉल्स पर क्यों नहीं लग रही रोक, जानिए पूरी रिपोर्ट









