Delhi Riots Case: “हाईकोर्ट से मिलेगा इंसाफ…” उम्रकैद की सजा मिलते ही ताहिर हुसैन का पहला बड़ा बयान

दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे के दौरान IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में फैसला सुनाया है। अदालत ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांचों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस जघन्य हत्याकांड में अंकित के शरीर पर 40 से अधिक घाव पाए गए थे।

Delhi Riots Case

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 31, 2026

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Delhi Riots Case: दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को साल 2020 के बहुचर्चित उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी (IB) के सुरक्षा सहायक अंकित शर्मा हत्याकांड में एक बहुत बड़ा फैसला सुनाते हुए आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित पांचों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा के ऐलान के बाद जब ताहिर हुसैन को अदालत परिसर से बाहर लाया गया, तो पत्रकारों से संक्षिप्त बातचीत में उन्होंने केवल इतना ही कहा कि उन्हें देश के उच्च न्यायालय (High Court) से पूरा इंसाफ मिलने की उम्मीद है।

दिल्ली पुलिस द्वारा मौत की सजा की मांग

आपको बता दे कि, इससे पहले अदालत ने गत 13 जुलाई को इस सनसनीखेज मामले की सभी कानूनी सुनवाई पूरी करने के बाद मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन के अलावा नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को हत्या और अन्य गंभीर धाराओं के तहत दोषी करार दिया था। सजा पर हुई अंतिम बहस के दौरान दिल्ली पुलिस ने आतंकवाद और बर्बरता का हवाला देते हुए सभी पांचों दोषियों के लिए फांसी यानी मौत की सजा की पुरजोर मांग की थी, लेकिन कड़कड़डूमा कोर्ट ने विचार-विमर्श के बाद उन्हें आजीवन कारावास की सजा पर मुहर लगाई।

फरवरी 2020 की उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, यह पूरा मामला फरवरी 2020 का है, जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भयानक दंगे भड़क उठे थे। इन्हीं दंगों के बीच खुफिया विभाग (IB) के युवा सुरक्षा सहायक अंकित शर्मा को बहुत बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया था। उनका क्षत-विक्षत शव चांदबाग इलाके के एक स्थानीय नाले से बरामद किया गया था। इस मामले की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला और दहला देने वाला खुलासा हुआ था कि मृतक अंकित के शरीर पर चाकुओं और अन्य हथियारों के 40 से अधिक गहरे घाव थे।

कोर्ट द्वारा छह लोगों को बरी करने का आदेश

इस बहुचर्चित हत्याकांड के मुकदमे में कुल 11 आरोपी ट्रायल का सामना कर रहे थे, जिनमें से विचारण न्यायालय ने पुख्ता साक्ष्यों के अभाव में छह आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। हालांकि, अदालत ने ताहिर हुसैन समेत पांच लोगों को इस जघन्य कृत्य में सीधे तौर पर शामिल माना। अभियोजन पक्ष का कहना था कि यह हत्या बेहद सुनियोजित तरीके से दंगे के माहौल को और ज्यादा भड़काने के उद्देश्य से की गई थी, ताकि सरकारी तंत्र में खौफ पैदा किया जा सके।

आपराधिक साजिश (120B) के आरोप पर कोर्ट का रुख

अदालत ने सभी पांचों दोषियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 365 (अपहरण), 188, 153A, 147, 148 और 149 के अंतर्गत दोषी ठहराया है। हालांकि, कड़कड़डूमा कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इन आरोपियों को मुख्य आपराधिक साजिश यानी धारा 120B के विशेष आरोप से बरी कर दिया। बचाव पक्ष के वकीलों ने कम सजा की मांग करते हुए तर्क दिया कि आरोपियों का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं है और उनके परिवार हैं, लेकिन अदालत ने अपराध की प्रकृति को देखते हुए नरमी बरतने से इनकार कर दिया।

अदालत की तीखी टिप्पणी

सजा का ऐलान करते हुए जज ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह घटना पूरे सभ्य समाज को अंदर तक झकझोर देने वाली बेहद गंभीर वारदात थी। अदालत ने कहा कि अंकित शर्मा की जिस अमानवीय तरीके से हत्या की गई और उनके शव को एक जानवर की तरह फेंक दिया गया, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। इस तरह के मामलों में न्याय सुनिश्चित करना समाज में कानून का राज बनाए रखने के लिए बेहद आवश्यक है।

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