T20 World Cup Trophy: गौतम गंभीर और सूर्यकुमार के मंदिर दर्शन पर भड़की TMC, कीर्ति आजाद ने साधा निशाना

भारतीय क्रिकेट टीम की टी20 वर्ल्ड कप जीत के बाद अब राजनीति गरमा गई है। मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार यादव के हनुमान मंदिर में ट्रॉफी के साथ दर्शन करने पर कांग्रेस और टीएमसी ने आपत्ति जताई है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि खेल को धर्म से दूर रखना चाहिए और ट्रॉफी पूरे देश की साझा विरासत है।

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मार्च 11, 2026

T20 World Cup Trophy: भारतीय क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक टी20 विश्व कप विजय का उल्लास अभी थमा भी नहीं था कि अब इस गौरवमयी उपलब्धि पर ‘राजनीतिक पिच’ तैयार हो गई है। टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार यादव द्वारा विश्व कप ट्रॉफी के साथ हनुमान मंदिर में दर्शन करने के बाद देश का सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं ने इसे खेल के मैदान में धर्म की एंट्री बताते हुए तीखे हमले किए हैं।

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हुसैन दलवई का तीखा प्रहार

बताते चले कि, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत विविधताओं का देश है और यह वर्ल्ड कप ट्रॉफी पूरे राष्ट्र की साझा संपत्ति है, न कि किसी विशिष्ट विचारधारा या व्यक्तिगत पसंद की। दलवई ने प्रश्न खड़ा किया कि आखिर जीत के प्रतीक को लेकर मंदिर जाने की क्या विवशता थी? उन्होंने कीर्ति आजाद के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि खेल और सांस्कृतिक आयोजनों को राजनीति एवं धार्मिक कट्टरता से कोसों दूर रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, ट्रॉफी को केवल एक ही धार्मिक स्थल पर ले जाकर अन्य धर्मों की उपेक्षा की गई है।

TMC सांसद कीर्ति आजाद का तर्क

पूर्व क्रिकेटर और वर्तमान टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस विवाद को और हवा दी है। उन्होंने 1983 के ऐतिहासिक विश्व कप की याद दिलाते हुए वर्तमान टीम प्रबंधन की आलोचना की। आजाद का तर्क है कि जब कपिल देव की कप्तानी में भारत ने पहली बार खिताब जीता था, तब टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व था। उन्होंने सवाल उठाया कि मोहम्मद सिराज या संजू सैमसन जैसे खिलाड़ी ट्रॉफी लेकर मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे क्यों नहीं गए? उनके अनुसार, राष्ट्रीय टीम पूरे भारत का चेहरा है, किसी एक संप्रदाय का नहीं।

लोकसभा अध्यक्ष पर निशाना

क्रिकेट के मैदान से शुरू हुआ यह विवाद संसद की चौखट तक भी जा पहुंचा है। हुसैन दलवई ने इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के विरुद्ध विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का भी समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को पूर्णतः निष्पक्ष होना चाहिए, किंतु बिरला का आचरण सत्ता पक्ष के प्रति झुकाव वाला प्रतीत होता है। दलवई ने तंज कसते हुए कहा कि यदि उनमें आत्मसम्मान शेष है, तो उन्हें नैतिकता के आधार पर अपने पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए।

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