Sweden Crime News: स्वीडन से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। एक व्यक्ति पर अपनी ही पत्नी को 100 से अधिक पुरुषों के हाथों बेचने और उसे देह व्यापार के लिए मजबूर करने के गंभीर आरोप लगे हैं। स्वीडिश अभियोजकों ने सोमवार को इस मामले का विवरण साझा करते हुए बताया कि आरोपी ने न केवल अपनी पत्नी का शारीरिक शोषण किया, बल्कि उसे आर्थिक लाभ के लिए 120 से अधिक पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाने के लिए प्रताड़ित किया। इस मामले की तुलना फ्रांस के कुख्यात ‘गिज़ेल पेलिकॉट’ केस से की जा रही है, जहाँ पति अपनी पत्नी को नशीली दवाएं देकर अजनबियों से रेप करवाता था।
कमजोरी और नशे की लत का फायदा उठाकर बनाया ‘यौन गुलाम‘
62 वर्षीय संदिग्ध आरोपी, जो कथित तौर पर ‘हेल्स एंजल्स’ गैंग का पूर्व सदस्य रह चुका है, पर अपनी पत्नी की लाचारी का फायदा उठाने का आरोप है। जांच में सामने आया है कि महिला नशे की लत से जूझ रही थी और आरोपी पति उसे ड्रग्स मुहैया कराकर अपनी उंगलियों पर नचाता था। वह खुद ऑनलाइन विज्ञापन बनाता था, ग्राहकों से मुलाकातें तय करता था और पूरी प्रक्रिया की निगरानी करता था। अभियोजक इडा एनरस्टेड ने इसे “निर्दयी शोषण” करार देते हुए बताया कि आरोपी ने महिला को ऑनलाइन वीडियो और लाइव यौन कृत्यों के लिए भी मजबूर किया ताकि अधिक पैसे कमाए जा सकें।
‘ना‘ कहने पर मिलती थी यातना: रेप और मारपीट के संगीन आरोप
पीड़िता ने अक्टूबर 2024 में उत्तरी स्वीडन की पुलिस से गुहार लगाई, जिसके बाद यह काला सच सामने आया। महिला ने बताया कि हालांकि वह अपनी आर्थिक स्थिति और नशे की लत के कारण शुरू में कुछ हद तक सहमत थी, लेकिन उसकी अपनी कुछ सीमाएं थीं। जब उसने कुछ खास परिस्थितियों या ग्राहकों को ‘ना’ कहा, तो उसके पति ने उन सीमाओं का सम्मान करने के बजाय उसके साथ दरिंदगी की। आरोपी पर आठ बार रेप और रेप की कोशिश के साथ-साथ गंभीर मारपीट के आरोप तय किए गए हैं। यह सिलसिला 11 अगस्त 2022 से शुरू होकर 21 अक्टूबर 2025 तक जारी रहा।
स्वीडन का कानून और 120 संदिग्ध ग्राहकों की पहचान
स्वीडन के वेश्यावृत्ति कानून के तहत यौन संबंध खरीदना अपराध है, लेकिन बेचना नहीं। हालांकि, किसी को यौन संबंध बेचने में मदद करना या दलाली करना अवैध है। इस मामले में पुलिस ने अब तक उन 120 पुरुषों की पहचान कर ली है जिन्होंने महिला की सेवाएं खरीदी थीं। इनमें से 26 पुरुषों पर औपचारिक रूप से आरोप लगाए जा चुके हैं, जबकि बाकी के खिलाफ जांच जारी है। पीड़िता की वकील सिल्विया इंगोल्फ्सडॉटिर का कहना है कि यह उनकी मुवक्किल के साथ हुआ सबसे जघन्य अपराध है और अब उन्हें केवल अदालत से न्याय की उम्मीद है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगामी सुनवाई की तारीख
इस मामले ने स्वीडन के राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। लैंगिक समानता मंत्री नीना लार्सन ने इस घटना को “घृणित और चौंकाने वाला” बताते हुए पुरुषों से महिलाओं के शरीर की खरीद-फरोख्त बंद करने की अपील की है। उन्होंने इसे ‘स्वीडिश पेलिकॉट मामला’ करार दिया है। आरोपी ने फिलहाल सभी आरोपों से इनकार किया है। मामले की औपचारिक सुनवाई 13 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली है, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
मानवता को शर्मसार करती एक कड़वी सच्चाई
यह घटना दर्शाती है कि कैसे करीबी रिश्ते भी विश्वासघात और क्रूरता की पराकाष्ठा तक जा सकते हैं। स्वीडन जैसे विकसित समाज में इस तरह के संगठित शोषण का सामने आना सुरक्षा प्रणालियों पर भी सवाल उठाता है। अब सबकी नजरें 13 अप्रैल को शुरू होने वाले मुकदमे पर हैं, जहाँ यह तय होगा कि इस “डिजिटल युग के अपराधी” को उसके किए की क्या सजा मिलती है।









