UP News: उत्तर प्रदेश में नदियों की स्वच्छता और ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। शनिवार को जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य की पवित्र नदियों, विशेषकर गंगा और यमुना को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के कार्यों में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रमुख शहरों में एसटीपी (STP) निर्माण में तेजी
मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने नमामि गंगे परियोजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माणाधीन सभी सीवेज शोधन संयंत्रों का कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, मथुरा और आगरा जैसे गंगा-यमुना तट पर बसे शहरों के साथ-साथ लखनऊ, अयोध्या और गोरखपुर जैसे प्रमुख केंद्रों में भी एसटीपी की सुविधा पूरी तरह बहाल की जाए। मंत्री का स्पष्ट लक्ष्य है कि “किसी भी नाले का पानी बिना ट्रीटमेंट के सीधे नदियों में नहीं गिरना चाहिए,” ताकि जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखा जा सके।
नदियों का पुनरुद्धार और जल संचयन
बड़ी नदियों की स्वच्छता के साथ-साथ प्रदेश की छोटी नदियों के अस्तित्व को बचाने के लिए भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री ने निर्देश दिया कि जिला स्तर पर ‘डिस्ट्रिक्ट रिवर रिजुवेनेशन प्लान’ के तहत प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। इसके अतिरिक्त, प्रदेश में लागू ‘शोधित जल के पुर्नउपयोग नीति’ (Reuse of Treated Water Policy) को प्रभावी बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया, जिससे शोधित जल का सिंचाई और अन्य उद्योगों में पुन: उपयोग किया जा सके।
गर्मी में निर्बाध जलापूर्ति का लक्ष्य
भीषण गर्मी के मौसम को देखते हुए मंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, उन्नाव और बलिया जैसे संवेदनशील जिलों में पेयजल व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए। चूँकि जल जीवन मिशन फेज-4 की सरफेस वाटर आधारित योजनाओं को पूरा होने में अभी समय लगेगा, इसलिए वर्तमान आवश्यकता की पूर्ति के लिए प्रदेश भर में लगाए गए करीब 8000 से अधिक ‘टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट’ (TTSP) को पूरी क्षमता के साथ संचालित किया जाए।
15 दिनों में मरम्मत का अल्टीमेटम
जलापूर्ति में आने वाली किसी भी बाधा को दूर करने के लिए मंत्री ने अधिकारियों को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी टीटीएसप (TTSP) की मरम्मत की जरूरत है, तो उसे तत्काल ठीक कराया जाए ताकि प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को शुद्ध और पर्याप्त मात्रा में पेयजल मिल सके। जल निगम (ग्रामीण) के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे नियमित रूप से ग्राउंड जीरो पर योजनाओं की निगरानी करें और किसी भी तकनीकी समस्या का त्वरित समाधान निकालें।










