Ram Navami Rally: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर राज्य में सियासी पारा अपने चरम पर है। इस चुनावी गहमागहमी के बीच, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में एक विशाल रामनवमी रैली का नेतृत्व किया। भवानीपुर, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का गढ़ माना जाता है, वहाँ सुवेंदु अधिकारी की इस रैली ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। जय श्री राम के उद्घोष और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूँज के बीच निकली इस शोभायात्रा को भाजपा के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। सुवेंदु ने इस दौरान जनता का अभिवादन स्वीकार किया और धर्म व संस्कृति के संरक्षण का संकल्प दोहराया।
नंदीग्राम और भवानीपुर: दो मोर्चों पर सुवेंदु अधिकारी की दोहरी चुनौती
सुवेंदु अधिकारी इस बार के चुनाव में न केवल नंदीग्राम बल्कि भवानीपुर से भी भाजपा के उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं। नंदीग्राम, जहाँ उन्होंने पिछले चुनाव में ममता बनर्जी को मात दी थी, वहां उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है, तो वहीं भवानीपुर में वे सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस के मुख्यालय में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। रामनवमी के अवसर पर भवानीपुर में रैली निकालकर उन्होंने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि वे मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में भाजपा के आधार को मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। स्थानीय मतदाताओं के बीच उनकी सक्रियता ने मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और चुनाव आयोग की पैनी नजर
रामनवमी के उपलक्ष्य में आयोजित इस रैली को लेकर प्रशासन और चुनाव आयोग दोनों ही हाई अलर्ट पर रहे। बंगाल के पिछले चुनावी इतिहास को देखते हुए किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। सुवेंदु अधिकारी ने रैली के दौरान शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन साथ ही ममता सरकार पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि “बंगाल की जनता अब डरने वाली नहीं है और वह अपनी आस्था का उत्सव पूरे गर्व के साथ मनाएगी।” चुनाव आयोग ने पूरी रैली की वीडियोग्राफी करवाई है ताकि आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन न हो।
ध्रुवीकरण की राजनीति या आस्था का संगम? तृणमूल और भाजपा में वार-पलटवार
सुवेंदु अधिकारी की इस रैली पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि भाजपा धर्म का सहारा लेकर चुनावों में ध्रुवीकरण की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, भाजपा का तर्क है कि रामनवमी बंगाल की संस्कृति का हिस्सा है और इसे रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। भवानीपुर के स्थानीय निवासियों में इस रैली को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ इसे धार्मिक उत्साह मान रहे हैं, तो कुछ इसे शुद्ध रूप से राजनीतिक लाभ लेने का जरिया बता रहे हैं। बंगाल चुनाव के इस मोड़ पर धर्म और राजनीति का यह मेल आने वाले मतदान प्रतिशत पर बड़ा असर डाल सकता है।
2026 का चुनाव: बंगाल के भविष्य और अस्मिता की निर्णायक लड़ाई
सुवेंदु अधिकारी की यह सक्रियता दर्शाती है कि भाजपा इस बार बंगाल में सत्ता परिवर्तन के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। भवानीपुर से लेकर नंदीग्राम तक, सुवेंदु का आक्रामक प्रचार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। आने वाले दिनों में गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों के बाद बंगाल का चुनावी रण और अधिक तेज होने की उम्मीद है। सुवेंदु ने रैली के अंत में दावा किया कि “इस बार भवानीपुर की जनता इतिहास रचेगी और बंगाल में असल परिवर्तन की शुरुआत यहीं से होगी।”
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