दिव्यांगों के अधिकारों के लिए लड़ने वाली सुवर्णा राज ने पैरा खेलों में रचा इतिहास

नागोया भारत की सुवर्णा राज ने एशियन पैरा खेलों की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में महिलाओं की चक्का फेंक एफ54 स्पर्धा में 15.66 मीटर के बेस्ट थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता। ग्रेटर नोएडा की रहने वाली 44 साल की सुवर्णा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने छह प्रयासों में से चार में 15 मीटर से अधिक का थ्रो किया। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में बेस्ट थ्रो करके पोडियम पर टॉप स्थान हासिल किया। भारत का गेम्स में 15वां गोल्ड मेडल सुवर्णा राज ने भारत के लिए एशियन पैरा गेम्स में 15वां और चौथे दिन का पहला गोल्ड जीता। ईरान की शाहला

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Published On :

अक्टूबर 22, 2026

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नागोया
भारत की सुवर्णा राज ने एशियन पैरा खेलों की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में महिलाओं की चक्का फेंक एफ54 स्पर्धा में 15.66 मीटर के बेस्ट थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता। ग्रेटर नोएडा की रहने वाली 44 साल की सुवर्णा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने छह प्रयासों में से चार में 15 मीटर से अधिक का थ्रो किया। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में बेस्ट थ्रो करके पोडियम पर टॉप स्थान हासिल किया।

भारत का गेम्स में 15वां गोल्ड मेडल
सुवर्णा राज ने भारत के लिए एशियन पैरा गेम्स में 15वां और चौथे दिन का पहला गोल्ड जीता। ईरान की शाहला हदीदी 15.45 मीटर के साथ दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि वियतनाम की थी न्गोक थुई गुयेन ने 14.65 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता। व्हीलचेयर का उपयोग करने वाली सुवर्णा 2017 में इस खेल से जुड़ी और तब से उन्होंने पिंटू नागर के मार्गदर्शन में लगातार कड़ी मेहनत की है। वह अभी तक तीन एशियाई पैरा खेलों और कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी है। वह चक्का फेंक की एफ54 श्रेणी में एशिया में दूसरे स्थान पर हैं।

सुवर्णा राज के नाम कई बड़े इवेंट में मेडल
सुवर्णा ने 17वीं फज्जा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में महिलाओं के चक्का फेंक एफ54/55 में कांस्य पदक जीता था। उन्होंने इस साल जनवरी में ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा ट्रैक मीट में चक्का फेंक में स्वर्ण और शॉट पुट में रजत पदक जीता था। एफ54 श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके धड़ और निचले हिस्से के अंग सक्षम नहीं होते हैं और वह व्हीलचेयर पर बैठकर थ्रो करते हैं। एथलीट अपने शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत और बांहों की गति का उपयोग करके शक्ति पैदा करते हैं।

मैदान से बाहर भी सुवर्णा की पहचान
एथलेटिक्स के अलावा सुवर्णा ‘एक्सेसिबिलिटी स्पेशलिस्ट’ और दिव्यांगता अधिकार अधिवक्ता के रूप में काम करती हैं। उन्होंने पूरे भारत में 1,000 से अधिक एक्सेसिबिलिटी ऑडिट किए हैं, ताकि दिव्यांग लोगों को आने वाली बाधाओं की पहचान की जा सके। उन्हें 2015 में खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय युवा पुरस्कार से सम्मानित किया था। वह चुनाव आयोग की ब्रांड एंबेसडर के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं। सरकार की वार्षिक प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिता योजना (एसीटीसी) के तहत उनके अभ्यास और प्रतियोगिता संबंधी खर्चों को 7,70,607 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।