
रांची
झारखंड की महिलाएं अब पोल्ट्री व्यवसाय के जरिए आर्थिक रूप से समृद्ध हो रही हैं। इससे जुड़कर ग्रामीण महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अपने परिवार को सशक्त बनाने और बच्चों को उचित शिक्षा देने में भी योगदान दे रही हैं।
राज्य की करीब 5600 महिलाएं झारखंड महिला स्वावलंबी पोल्ट्री सहकारी संघ लिमिटेड से जुड़कर कार्य कर रही हैं। संघ ने इस वर्ष कुल 10,907 मीट्रिक टन ब्रायलर मुर्गियों का उत्पादन किया गया। इन महिलाओं ने 2.19 करोड़ अंडों का उत्पादन किया है। इसी तरह ब्रीडर यूनिट में 50.36 लाख हैचिंग अंडे का उत्पादन किया गया।
वहीं, हैचरी में 39.83 लाख ब्रायलर चिक्स का उत्पादन किया गया। संघ ने 16,632.5 मीट्रिक टन ब्रायलर फीड और 3641.4 मीट्रिक टन लेयर फीड का उत्पादन किया।
अभी तक 122.71 करोड़ रुपये का व्यवसाय
संघ की अध्यक्ष पूर्णिमा देवी ने बताया कि वर्ष 2025-26 में पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़ी सभी नौ सहकारी समितियों को लाभ हुआ। सभी समितियों ने कुल 122.71 करोड़ का व्यवसाय किया। सदस्यों को उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने के लिए 9.75 करोड़ का भुगतान किया गया।
समितियों का कुल लाभ 1.80 करोड़ और संघ का लाभ 34 लाख रहा। कुल मिलाकर 2.15 करोड़ का शुद्ध लाभ हुआ है। संघ के सदस्यों को 34.70 लाख का नकद प्रोत्साहन भी दिया गया।
5,600 महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर
पोल्ट्री संघ की नौ सहकारी समितियों के साथ राज्य की 5,600 महिला जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं मुख्य रूप से ब्रायलर और अंडा उत्पादन के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। गुमला की रहने वाली राहिल होरो ने लेयर पोल्ट्री फार्मिंग शुरू कर अपनी मासिक आय एक हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपये से अधिक कर ली है।
उक्त कमाई से उन्होंने अपनी बिकी हुई जमीन वापस खरीद लिया। दुमका की ललिता मरांडी ने पति का निधन होने के बाद अकेले बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी संभाली और उन्होंने मुर्गी पालन से सालाना 50 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित की और अपने बच्चों को हास्टल में पढ़ाया।
इसी तरह गुमला की रहने वाली अर्चना तिर्की के पति की असामयिक मृत्यु के बाद पोल्ट्री संघ के सहयोग से सुपरवाइजर बनीं और अभी 30 हजार मासिक कमा रही हैं।
सरकार से भी मिला आर्थिक सहयोग
कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की ओर से ग्रांट टू एफपीओ योजना के तहत पोल्ट्री संघ से जुड़ी छह समितियों को आर्थिक लाभ मिला है।
इसमें गुमला, पोटका, लोहरदगा, बिसया, पेटरवार एवं दुमका को कुल 66.12 लाख की अनुदान राशि मिला है। पोल्ट्री संघ ने अपने साथ जुड़े सभी सदस्यों, सुपरवाइजरों और कर्मचारियों का बीमा भी कराया है।
राज्य में पोल्ट्री व्यवसाय में बहुत ज्यादा संभावनाएं है, यहां के लोग पारंपरिक रूप से भी मुर्गी पालते हैं। अगर बड़े स्तर पर लेयर फार्मिग किया जाए, तो इससे स्वरोजगार के साथ-साथ पोषण की कमी को भी दूर करने में मदद मिलेगी।
-प्रदीप कुमार हजारी, पूर्व विशेष सचिव सह सलाहकार, कृषि विभाग, झारखंड।











