Supreme Court WB DA: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, पश्चिम बंगाल के 20 लाख कर्मचारियों को मिलेगा बकाया DA

पश्चिम बंगाल के करीब 20 लाख कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। सालों से चल रही कानूनी जंग के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार की दलीलों को दरकिनार करते हुए बकाया DA पर जो फैसला सुनाया है, उसने सबको चौंका दिया है। आखिर क्या है वो '25 प्रतिशत' का फॉर्मूला और कब से मिलेगा पैसा? जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी।

Supreme Court WB DA

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 5, 2026

Supreme Court WB DA:  पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य कर्मचारियों के बीच लंबे समय से चले आ रहे महंगाई भत्ता (DA) विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और राहत भरा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत के इस निर्णय से राज्य के करीब 20 लाख कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के चेहरे पर खुशी लौट आई है। अदालत ने ममता सरकार को आदेश दिया है कि वह वर्ष 2008 से लेकर 2019 तक का लंबित बकाया महंगाई भत्ता कर्मचारियों को जल्द से जल्द भुगतान करे। यह फैसला उन लाखों परिवारों के लिए एक बड़ी आर्थिक मजबूती लेकर आया है जो वर्षों से अपने कानूनी अधिकार की प्रतीक्षा कर रहे थे।

25 प्रतिशत भुगतान की समयसीमा तय: 6 मार्च तक मिलेगी पहली किस्त

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसके पूर्व में दिए गए अंतरिम आदेश का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। अदालत ने निर्देश दिया है कि कुल बकाया DA का 25 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से 6 मार्च तक कर्मचारियों के खातों में जमा कर दिया जाए। शेष राशि के भुगतान के लिए एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई जाएगी, ताकि राज्य की वित्तीय व्यवस्था पर अचानक अत्यधिक बोझ न पड़े। कोर्ट ने साफ किया कि कर्मचारियों को उनके अधिकारों से अधिक समय तक वंचित नहीं रखा जा सकता।

जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी का गठन

बकाया राशि के भुगतान की जटिलता और विशालता को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी की कमान सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस इंदु मल्होत्रा को सौंपी गई है। कमेटी के अन्य सदस्यों में जस्टिस तरलोचन सिंह चौहान, जस्टिस गौतम विधूड़ी और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। यह उच्च स्तरीय समिति यह निर्धारित करेगी कि शेष राशि का भुगतान किस्तों में किस प्रकार किया जाए ताकि कर्मचारियों को उनका हक मिले और राज्य का बजट भी संतुलित रहे।

ममता सरकार पर 43,000 करोड़ का वित्तीय भार: 16 मई को अगली सुनवाई

पश्चिम बंगाल सरकार के अनुमान के मुताबिक, इस फैसले को लागू करने के लिए सरकारी खजाने से लगभग 43,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम भुगतान करना होगा। हालांकि राज्य सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने कर्मचारियों के पक्ष को मजबूती से रखा है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “DA कोई दान नहीं, बल्कि कर्मचारियों का अधिकार है।” गठित कमेटी को 16 मई तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई की जाएगी।

कलकत्ता हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक का कानूनी सफर

इस विवाद की जड़ें काफी पुरानी हैं। मई 2022 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह जुलाई 2008 से लंबित DA का भुगतान तीन महीने के भीतर करे। जब ममता सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, तो शीर्ष अदालत ने पिछले साल 16 मई को अंतरिम आदेश जारी कर सरकार को कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा तुरंत देने का निर्देश दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी के माध्यम से भुगतान की अंतिम रूपरेखा तैयार करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।

कर्मचारियों के आंदोलनों और संघर्ष का मिला मीठा फल

पश्चिम बंगाल के राज्य कर्मचारी संगठन लंबे समय से कोलकाता की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे। कई संगठनों ने भूख हड़ताल और ‘पेन-डाउन’ जैसे आंदोलनों के जरिए सरकार पर दबाव बनाया था। इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि न्यायिक व्यवस्था में धैर्य और संघर्ष का सकारात्मक परिणाम निकलता है। 16 मई को आने वाली कमेटी की रिपोर्ट अब यह तय करेगी कि बाकी का 75 प्रतिशत बकाया कर्मचारियों को कब और कितनी किस्तों में प्राप्त होगा।